Publish Date: Thu, 26 Apr 2018 (17:34 IST)
Updated Date: Thu, 26 Apr 2018 (17:36 IST)
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गुरुवार को ट्रेन और बस की टक्कर में जिन 13 बच्चों की मृत्यु हुई, उनमें से तीन परिवारों के सात बच्चे सगे भाई-बहन थे।
दुर्घटनास्थल पर यहां-वहां पड़े बैग, कॉपी, किताबें और टिफिन बॉक्स इस बात की तस्दीक कर रहे थे कि हादसा किस कदर भयावह रहा होगा। रेल क्रॉसिंग के इर्द-गिर्द पड़े खून की छींटे और खस्ताहाल बस के अवशेष दुर्घटना स्थल की विकृत तस्वीर बयां करने के लिए काफी थे।
इस हादसे में मिश्रौली गांव के प्रधान अमरजीत सिंह के दो लडके और एक बेटी की मृत्यु हो गई। रो-रो कर बेहाल अमरजीत ने कहा कि विश्वास नहीं होता कि मेरे लाड़ले संतोष, रवि और रागिनी अब इस दुनिया में नहीं हैं। तीनों भाई-बहन पढ़ने में अव्वल थे। घर की रौनक थे मेरे लाड़ले। अब जीने का मकसद ही नहीं रह गया, जिसके लिए जी रहे थे वही नहीं रहे।
यही स्थिति कोकिल पटटी निवासी नौशाद की है जिसके दो होनहार बेटे अतीउल्लाह और गोल्डन इस दुर्घटना में उनसे हमेशा के लिए बिछड़ गए। बच्चों के शव देखते ही मां बेहोश हो गई जिसे पड़ोसी संभालने की कोशिश कर रहे थे। ग्रामीणों ने बताया कि नौशाद के बच्चे होनहार और मिलनसार थे। वे पूरे गांव के लाड़ले थे। गांव का हर शख्स उन्हें बेहद प्यार करता था।
बतरौली निवासी हसन के घर भी कोहराम मचा हुआ था। उनके पुत्र साजिद और पुत्री तमन्ना बस हादसे का शिकार बने। बदहवास हसन ने कहा कि मेरी तो दुनिया ही उजड़ गई। आज भोर तक जिन बच्चों के शोर से घर का चप्पा-चप्पा गूंजा करता था। कल के बाद वहां वीरानी छाई रहेगी।
जिंदगी का सहारा हमसे बिछड़ गया। अब जीने की कोई तमन्ना नहीं है। अल्लाह हमें भी इस दुनिया से रुखसत करे। इसके अलावा मनोज (8) और मुस्कान (7) भाई बहन हैं जो महिराणा के निवासी हैं। मृत बच्चों में हरिओम (8), अरशद (9), अनस (8) और गोलू भी शामिल हैं।
गौरतलब है कि पूर्वोत्तर रेलवे के गोरखपुर-सिवान रेल खंड पर दुदही रेलवे स्टेशन के पास मानवरहित क्रासिंग पर थावे-बढ़नी सवारी गाड़ी से एक स्कूली वैन के टकराने से स्कूल जा रहे 13 स्कूली बच्चों की घटना स्थल पर ही मृत्यु हो गई। अन्य सात बच्चे घायल हो गए। (वार्ता)