Publish Date: Tue, 01 May 2018 (18:43 IST)
Updated Date: Tue, 01 May 2018 (18:47 IST)
जम्मू। अधिकारियों की मानें तो बीसियों आतंकी एलओसी क्रॉस कर कश्मीर में घुसने में कामयाब रहे हैं। नतीजतन कश्मीर की शांति खतरे में पड़ गई है। सेना ने आतंकी हमलों को रोकने की खातिर रात्रि तलाशी अभियान तेज करते हुए रात्रि गश्त के साथ-साथ नाकेबंदी की पुरानी रणनीति भी अपनाई है जिस कारण लोगों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने माना कि पिछले पखवाड़े पाक सेना बीसियों आतंकियों को इस ओर धकेलने में कामयाब हुई है। घुसपैठ करने वाले ताजा आतंकियों के प्रति चौंकाने वाला तथ्य यह है कि वे अति घातक हथियारों से लैस हैं जिन्हें कश्मीर की शांति भंग करने का टास्क दिया गया है।
एक सैन्य सूत्र के मुताबिक, एलओसी के कुछ इलाकों में संदिग्ध व्यक्ति देखे गए हैं। हालांकि इस सूत्र ने उन इलाकों की निशानदेही करने से इंकार करते हुए कहा कि इलाकों की पहचान बताए जाने से वहां लोगों में दहशत फैल सकती है।
एलओसी से सटे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर आतंकी घुसपैठ की फिराक में भी हैं। माना जा रहा है कि इन आतंकियों को भारतीय सीमा में दाखिल करवाने के लिए ही छद्मतौर पर युद्ध की स्थिति बनाई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि एलओसी की तरफ आतंकवादियों का मूवमेंट देखा गया है। जिसके बाद आशंका जताई जा रही है कि कश्मीर में फिदायीन हमले बढ़ सकते हैं।
दरअसल पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी कैंप्स से आतंकी निकलकर भारत की ओर आ रहे हैं। ऐसे में ये जम्मू कश्मीर में दाखिल होने की फिराक में हैं। माना जा रहा है कि आतंकी सेना का सड़क संपर्क बाधित कर सकते हैं या फिर कश्मीर में सेना की रोड ओपनिंग पार्टी को अपने निशाने पर ले सकते हैं।
आतंकियों के ताजा दलों द्वारा घुसपैठ में कामयाब होने के बाद उनके इरादों के बारे में मिली जानकारी सुरक्षाधिकारियों को परेशान कर रही है। वे बताते हैं कि उन्हें भयानक तबाही मचाने का टास्क दिया गया है। वैसे वे इससे भी इंकार नहीं करते थे कि घुसपैठ करने वालों में तालिबानी, अल-कायदा या आईएस के सदस्य हो सकते हैं क्योंकि सुने गए वायरलेस संदेश इसके प्रति शंका पैदा करते थे।
अधिकारियों का कहना था कि स्थिति से निपटने की खातिर सेना को रात्रि गश्त बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। सेना ने रात्रि तलाशी अभियान फिर से आरंभ किए हैं। साथ ही नाकेबंदी में सेना की सहायता भी ली जाने लगी है। यह सच था कि सेना द्वारा स्थानीय प्रशान को एलओसी के इलाकों में मदद दिए जाने के कारण आम नागरिकों को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। पर एक नागरिक प्रशासनिक अधिकारी का कहना था कि सुरक्षा की खातिर इतनी असुविधा को तो सहन करना होगा।
About Writer
सुरेश एस डुग्गर
सुरेश डुग्गर वेबदुनिया के लिए जम्मू कश्मीर से समाचार संकलन के लिए अधिकृत हैं। वे तीन दशक से ज्यादा समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।....
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