P. Chidambaram's statement on Union Budget : वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लगातार 9वीं बार आम बजट लोकसभा में पेश किया। इस बीच वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने इस बजट को लेकर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण पर निशाना साधा है। चिदंबरम ने तंज कसते हुए कहा, ऐसा लगता है कि सीतारमण ने या तो आर्थिक सर्वे को ढंग से पढ़ा नहीं है या फिर उसे जानबूझकर दरकिनार कर दिया। पूर्व वित्तमंत्री ने चाबहार पोर्ट प्रोजक्ट के लिए कोई राशि नहीं रखे जाने को लेकर भी सरकार को घेरा। चिदंबरम ने कहा कि आयकर अधिनियम 2026, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होना है, उसके पारित होने के कुछ महीनों बाद ही दरों में बदलाव कर दिए गए।
खबरों के अनुसार, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार 9वीं बार आम बजट लोकसभा में पेश किया। इस बीच वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने इस बजट को लेकर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण पर निशाना साधा है। चिदंबरम ने तंज कसते हुए कहा, ऐसा लगता है कि सीतारमण ने या तो आर्थिक सर्वे को ढंग से पढ़ा नहीं है या फिर उसे जानबूझकर दरकिनार कर दिया।
पूर्व वित्तमंत्री ने चाबहार पोर्ट प्रोजक्ट के लिए कोई राशि नहीं रखे जाने को लेकर भी सरकार को घेरा। कांग्रेस नेता चिदंबरम ने कहा कि सरकार किसी के दबाव के आगे झुक रही है। चिदंबरम ने केंद्रीय बजट में चाबहार बंदरगाह के लिए कोई आवंटन न करने पर केंद्र की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सरकार किसी के दबाव के आगे झुक रही है।
इस टिप्पणी को अमेरिकी टैरिफ उपायों से उत्पन्न दबाव के संदर्भ में देखा जा रहा है। चिदंबरम ने 2025-26 के वित्तीय खातों को बुनियादी लेखांकन मानकों से भी खराब बताया। रेवेन्यू रिसीट्स में 78,086 करोड़ रुपए की कमी, कुल व्यय में 1,00,503 करोड़, रेवेन्यू व्यय में 75,168 करोड़ और कैपिटल व्यय में 1,44,376 करोड़ (केंद्र में 25,335 करोड़ और राज्यों में 1,19,041 करोड़) की कमी हुई।
कैपिटल व्यय जीडीपी अनुपात 3.2% से घटकर 3.1% हो गया, लेकिन कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। चिदंबरम ने निष्कर्ष निकाला कि बजट भाषण और प्रस्तावों में अर्थव्यवस्था की संरचनात्मक कमजोरियों का सामना करने या आम भारतीयों की जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया गया।
चिदंबरम ने कहा कि आयकर अधिनियम 2026, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होना है, उसके पारित होने के कुछ महीनों बाद ही दरों में बदलाव कर दिए गए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि देश की अधिकांश आबादी आयकर के दायरे में ही नहीं आती, इसलिए इन बदलावों का आम जनता पर सीमित असर होगा।
Edited By : Chetan Gour