corona virus : 14 दिन विशेष शिविर में रहेंगे चीन से निकाले लोग

शुक्रवार, 31 जनवरी 2020 (20:06 IST)
नई दिल्ली। नोवल कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए चीन से विशेष विमान से स्वदेश लाए गए भारतीयों को 14 दिन तक दिल्ली में बनाए गए विशेष शिविरों में चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाएगा तथा घर नहीं जाने दिया जाएगा।
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स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि चीन से निकाले जाने वाले नागरिकों के लिए दिल्ली में दो विशेष शिविर बनाए गए हैं, जहां उन्हें दूसरे लोगों से अलग रखा जाएगा। एक शिविर मानेसर में बनाया गया है, जिसका संचालन सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा द्वारा किया जा रहा है। वहां पुरुषों को रखा जाएगा। दूसरा शिविर छावला कैंप में बनाया गया है, जिसका संचालन आईटीबीपी द्वारा किया जा रहा है और वहां महिलाओं को रखा जाएगा।
 
कुल 366 लोगों को निकालने के लिए एयर इंडिया का विशेष विमान शुक्रवार को मुंबई से रवाना होकर दिल्ली के रास्ते चीन के वुहान शहर पहुंच चुका है। विमान के आज रात दो बजे दिल्ली वापस पहुंचने की उम्मीद है। वुहान से निकाले जाने वाले नागरिकों में करीब 280 पुरुष और तकरीबन 90 महिलाएं हैं।
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मंत्रालय ने बताया कि वायरस के संक्रमण के बाद लक्षण सामने आने में 14 दिन का समय लगता है। इसलिए चीन से लोगों को स्वदेश लाने के बाद सीधे शिविरों में भेज दिया जाएगा, जहां उन्हें चिकित्सकों की नियमित निगरानी में रखा जाएगा। यदि किसी व्यक्ति में कोरोना वायरस के लक्षण पाए गए तो उसे अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा।
 
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. राजीव गर्ग को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। सफदरजंग अस्पताल में कोरोना वायरस से संक्रमित गंभीर मरीजों के लिए 50 बिस्तर वाली विशेष इकाई तैयार रखी गई है।
 
शुक्रवार दोपहर बाद 1.17 बजे एयर इंडिया की विशेष उड़ान दिल्ली से रवाना हुई। जम्बो बोइंग 747 विमान वुहान पहुंच चुका है। इस डबल डेकर विमान में 423 सीटें हैं। इसमें 5 पायलट और 15 केबिन क्रू के साथ दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल के पांच डॉक्टर और एयर इंडिया के एक पैरामेडिकल कर्मचारी को भी भेजा गया है। इंजीनियरों एवं सुरक्षाकर्मियों के एक दल को भी विमान में भेजा गया है।
 
वुहान से निकाले गए यात्रियों को विमान में कोई सेवा प्रदान नहीं की जाएगी। उनकी सीट पर पहले से ही खाने के पैकेट और मास्क रखे होंगे। इस प्रकार चालक दल के सदस्यों का उनसे संपर्क नहीं होगा, जिससे संक्रमण के फैलने का खतरा नहीं रहेगा।

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