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'अपनी भाषा' के लिए एक याचिका, अभियान का हिस्सा बनें

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ज्यादातर बैंकिंग सेवाएं और जानकारियां केवल अंग्रेजी भाषा में दी जाती हैं। इनमें खाता खोलने से लेकर नेट बैकिंग, खाता संबंधी एसएमएस से लेकर बैंक की ओर से मिलने वाला अन्य पत्राचार, किसानों के कृषि ऋण के दस्तावेज, दुपहिया वाहन के समझौते और अन्य प्रपत्र, गृह ऋण के दस्तावेज आदि सभी शामिल हैं। 
बैंक किस दस्तावेजों और किन शर्तों पर हस्ताक्षर ले रहा है, अंग्रेजी न जानने वाले करोड़ों ग्राहकों को कभी पता ही नहीं चलता है। नोटबंदी की घोषणा के बाद नोट बदलने का प्रपत्र भी भारतीय रिजर्व बैंक ने सिर्फ अंग्रेजी जारी किया, जिसे अंग्रेजी के ज्ञान के अभाव या फिर किसी अन्य व्यक्ति की मदद के बिना भरा ही नहीं जा सकता था। तो क्या ऐसा नहीं हो सकता कि भारतवासियों को बैंकिंग सेवाएं उनकी भाषाओं में ही मिलें? 
 
इसी को ध्यान में रखकर एक याचिका के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अनुरोध किया गया है कि भारत में कार्यरत बैंकों के लिए सभी ऑनलाइन और ऑफलाइन बैंकिंग सेवाएं भारतीय भाषाओं में उपलब्ध करवाने का अनिवार्य निर्देश जारी करें। खाता खोलते समय ही बैंक ग्राहकों से पूछे कि वह किस भारतीय भाषा में बैंकिंग सेवाएं चाहते हैं, यही विकल्प मौजूदा ग्राहकों को भी मिले। अभियान में हिस्सेदारी के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करें...

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