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जनसंख्‍या पर अंकुश क्या नरेन्द्र मोदी अगला बड़ा कदम है?

हमें फॉलो करें जनसंख्‍या पर अंकुश क्या नरेन्द्र मोदी अगला बड़ा कदम है?

वेबदुनिया न्यूज डेस्क

, गुरुवार, 15 अगस्त 2019 (10:44 IST)
मुस्लिम महिलाओं को 3 तलाक से मुक्ति की बात हो या फिर जम्मू-कश्मीर को विशेषाधिकार देने वाली धारा 370 हटाने का काम हो, मोदी सरकार ने संकेत दिए हैं वह अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने एक और संकेत दिया है, जो आने वाले समय में भारत के लिए बहुत बड़ा कदम साबित हो सकता है। 
 
नरेन्द्र मोदी ने इशारों-इशारों में ही कह दिया है कि वे आने समय में बढ़ती जनसंख्‍या के खिलाफ कुछ निर्णय ले सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं कहा कि वे क्या करने जा रहे हैं, लेकिन यह तय है कि कुछ न कुछ तो होगा ही। वैसे भी चीन के बाद दुनिया का दूसरी सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। इस समय भारत की आबादी 130 करोड़ के लगभग है, जो कि देश में मौजूद संसाधनों के हिसाब से काफी ज्यादा है। 
 
यह इससे भी जाहिर होता है कि मोदी 'छोटे परिवार' को देशभक्ति से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि छोटा परिवार रखने वालों का देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। जिनका छोटा परिवार है, उनसे हमें सीखने की जरूरत है। इसके लिए सामाजिक जागरूकता की भी बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें इस बात का भी खास ध्यान रखना होगा कि आबादी शिक्षित होना चाहिए साथ ही बच्चे के जन्म से पहले उसकी जरूरतों के बारे में भी सोचें। अर्थात यह भी देखें कि क्या हमारे पास जितने संसाधन हैं क्या आने वाली पीढ़ी को वे सभी सुविधाएं दे सकते हैं, जिनकी उन्हें जरूरत है। 
 
हालांकि यह भी सही है कि यदि मोदी सरकार इस दिशा में कोई फैसला लेती है तो कुछ लोग इसे भी राजनीति से जोड़कर देखेंगे। क्योंकि भाजपा के नेता हमेशा से जनसंख्या को लेकर एक वर्ग विशेष को निशाना पर लेते रहे हैं। इस संबंध में एक नारा 'हम 5 हमारे 25' भी उछलता रहता है। इस बात को इससे भी बल मिलता है कि 3 तलाक खत्म करने के कानून को भी इस वर्ग विशेष के खिलाफ फैसले से जोड़कर देखा गया था। 
 
हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि इंदिरा गांधी के शासनकाल में जब नसबंदी योजना लागू की गई थी तब एक वर्ग विशेष के लोगों ने इसका तीखा विरोध किया था। हालांकि उस समय जात-पांत, धर्म-वर्ग का भेदभाव किए बिना अधिक संतान वाले लोगों की नसबंदियां की गई थीं। उस समय चूंकि सरकारी कर्मचारियों को नसबंदी के लक्ष्य भी दिए थे, अत: जबरिया नसबंदी करने के मामले भी सामने आए थे।

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