Publish Date: Sat, 05 Apr 2025 (13:20 IST)
Updated Date: Sat, 05 Apr 2025 (14:02 IST)
ram navmi soorya tilak: अयोध्या में राम जन्मोत्सव के दिन एक बार फिर रामलला के सूर्य तिलक की तैयारी शुरू हो गई है। इस रामनवमी से लेकर अगले 20 सालों तक रामजन्मोत्सव पर सूर्य की किरणें रामलला का अभिषेक करेंगी। इसके लिए मंदिर के शिखर से सूर्य की किरणों को गर्भगृह तक लाया जाएगा। इस व्यवस्था के लिए विशेष किस्म के मिरर और लेंस लगाए जा रहे हैं। सूर्य तिलक का कार्यक्रम देश और विदेश में लाइव प्रसारित किया जाएगा।
राम जन्मोत्सव पर इस आयोजन के लिए रुड़की के वैज्ञानिकों की टीम अयोध्या पहुंच गई है और सूर्य तिलक के लिए उपकरण लगाने का काम शुरू कर दिया है। वैज्ञानिकों की ओर से दी गई जानकारी अनुसार अगले 19 सालों तक सूर्य तिलक का समय हर साल बढ़ता जाएगा।
इस साल रामजन्मोत्सव का पर्व छह अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन ठीक दोपहर 12:00 बजे रामलला का सूर्य तिलक होगा। वैज्ञानिकों ने इसे ''सूर्य तिलक मैकेनिज्म'' नाम दिया है जिसकी सहायता से हर रामनवमी यानी भगवान राम के जन्मदिन पर रामलला के माथे पर यह विशेष सूर्य तिलक सजेगा।
इस सूर्य तिलक के मैकेनिज्म को केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की के वैज्ञानिकों की एक टीम द्वारा विकसित किया गया है। जानकारी के अनुसार हर साल रामनवमी के दिन दोपहर 12 बजे 75 मिमी के गोलाकार रूप में सूर्य की किरणें भगवान राम की मूर्ति के माथे पर पड़ेंगी। करीब तीन से चार मिनट तक राम लला का सूर्य तिलक होगा । इस गियर-बेस्ड सूर्य तिलक मैकेनिज्म में बैटरी, बिजली या लोहे का उपयोग नहीं किया जाएगा।
कैसा है सूर्य तिलक का मैकेनिकल सिस्टम
सूर्य तिलक के लिए आईआईटी रुड़की द्वारा एक विशेष ऑप्टो मैकेनिकल सिस्टम तैयार किया है। यह ऑप्टो मैकेनिकल सिस्टम कुछ इस तरह काम करता है कि सबसे पहले मंदिर के तीसरे तल पर लगे दर्पण पर सूर्य की किरणें पड़ेंगी। दर्पण से 90 डिग्री पर परावर्तित होकर ये किरणें एक पीतल के पाइप से होते हुए दूसरे छोर पर एक और दर्पण से सूर्य किरणें एक बार फिर से परावर्तित होंगी और पीतल की पाइप के साथ 90 डिग्री पर मुड़ जाएंगी। किरणें दूसरी बार परावर्तित होने के बाद लंबवत दिशा में मंदिर के नीचे की ओर चलेंगी। इस दौरान एक के बाद एक तीन लेंसों से गुजरते हुए जब किरने मंदिर के गर्भगृह की ओर आगे बढेंगी तो इनकी तीव्रता और बढ़ जाएगी। इसके बाद लंबवत पाइप के दूसरे छोर पर लगे दर्पण पर किरणें पड़ेंगी और दोबारा 90 डिग्री पर मुड़ जाएंगी। यहां से किरणें सीधे रामलला के मस्तक पर पड़ेंगी और इस तरह से रामलला का सूर्य तिलक संपन्न होगा।
कैसे बढेगा सूर्य तिलक का समय
भारतीय खगोलीय भौतिकी संस्थान बंगलूरू के अनुसार आने वाले 19 सालों तक हर साल सूर्य तिलक का समय बढ़ता जाएगा। 19 साल बाद यानी 2025 रामनवमी को सूर्य तिलक का समय फिर से 2025 की रामनवमी जितनी देर का होगा। इस आशय यह है की19 साल बाद 2044 में भी उतनी ही देर के लिए सूर्य तिलक होगा।
इन मंदिरों में है सूर्य तिलक की परंपरा
सूर्य तिलक मैकेनिज्म का उपयोग प्राचीन समय से ही कुछ जैन मंदिरों में किया जा रहा है। इसके अलावा और कोणार्क के सूर्य मंदिर में भी सूर्य तिलक पद्धति विक्सित की गई थी। हालांकि उनमें अलग तरह की प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है।
About Writer
WD Feature Desk
अनुभवी लेखक, पत्रकार, संपादक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए गहन और विचारोत्तेजक आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।....
और पढ़ें