Webdunia - Bharat's app for daily news and videos

Install App

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

महाराष्ट्र : मराठा आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

webdunia
  • facebook
  • twitter
  • whatsapp
share
शुक्रवार, 26 मार्च 2021 (23:51 IST)
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र में शिक्षण संस्थानों और राज्य सरकार की नौकरियों में मराठा आरक्षण को बरकरार रखने वाले बंबई उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई पूरी कर ली। न्यायालय इस पर अपना फैसला बाद में सुनाएगा।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण के नेतृत्व वाली पांच न्यायाधीशों की एक संविधान पीठ ने मामले में दलीलें सुनीं, जिनमें यह प्रतिवेदन भी प्रेषित था कि क्या 1992 के ऐतिहासिक इंद्रा साहनी फैसले (मंडल फैसले के तौर पर चर्चित) पर भी वृहत पीठ द्वारा पुनर्विचार किए जाने की जरूरत है। इस फैसले के तहत 50 प्रतिशत आरक्षण की अधिकतम सीमा तय की गई थी।

पीठ ने कहा, रिट याचिका पर दिए गए प्रतिवेदन के जवाब में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अपनी दलीलें दी हैं। भारत संघ (यूनियन ऑफ इंडिया) और गुजरात राज्य की तरफ से पेश हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने भी उनके प्रतिवेदन को अपनाया है। सुनवाई पूरी हुई। फैसला सुरक्षित है।

पीठ में न्यायमूर्ति अशोक भूषण के अलावा न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर, न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट भी शामिल हैं। शीर्ष अदालत ने आठ मार्च को कहा था कि वह मुद्दों पर विचार करने का प्रस्ताव करती है, जिनमें यह भी शामिल होगा कि क्या इंदिरा साहनी मामले को वृहद पीठ को संदर्भित किए जाने या उस पर पुनर्विचार की जरूरत है खासतौर पर बाद में हुए संवैधानिक संशोधनों, फैसलों और समाज के बदलते सामाजिक ताने-बाने के मद्देनजर।

उच्च न्यायालय ने जून 2019 में कानून को बरकरार रखते हुए कहा था कि 16 प्रतिशत आरक्षण न्यायोचित नहीं था और रोजगार में 12 प्रतिशत तथा दाखिलों में 13 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण नहीं होना चाहिए।(भाषा)

Share this Story:
  • facebook
  • twitter
  • whatsapp

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

webdunia
टिकैत ने मोदी सरकार को कहा तानाशाह, कहा- भाजपा नेताओं का करेंगे बहिष्कार