Publish Date: Mon, 01 Mar 2021 (16:58 IST)
Updated Date: Mon, 01 Mar 2021 (21:10 IST)
आम लोगों में कोरोना की वैक्सीन को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और असंमजस की स्थिति है, हालांकि इस भ्रम को दूर करने के लिए अब कई लोग आगे आ रहे हैं और वैक्सीन लगावा रहे हैं।
शहर के कई प्रबुद्ध नागरिकों ने दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान में आगे आकर वैक्सीन लगवाकर खुद को सुरक्षित किया है। इनमें इंदौर की पद्मश्री जनक पल्टा मगिलिगन शामिल हैं। इनके साथ ही कई बड़े डॉक्टरों और प्रोफेशनल्स ने भी टीका अभियान में शामिल होकर यह साबित किया है कि वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित और आसान है। न तो इसके कोई साइड इफैक्ट है और न ही कोई ओर खतरा।
आइए जानते हैं शहर की शख्सियत पद्मश्री जनक पल्टा की जुबानी कोराना वैक्सीन की कहानी।
टीका लगवाकर प्रोग्राम में हुईं शामिल
वैक्सीनेश बहुत ही सुरक्षित और आसान है। मुझे पता भी नहीं चला, कब इंजेक्ट हो गया और कोई डी नहीं लगा। जहां तक इससे डरने की बात है तो मुझे मेरे जीवन में बहुत टांकें लगे हैं, मैं केंसर तक को झेल चुकी हूं, तो फिर इस छोटी सी वैक्सीन से क्या डरना। मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई। वैक्सीन लेने के 45 मिनट तक मैं ऑब्जर्वेशन में रही, अब यकीन करो कि मैं एक आयोजन में शामिल होने के लिए जा रही हूं।
वैक्सीनेशन के बाद मैंने फेसबुक पर अपडेट किया। नागरिकों से अपील करती हूं कि तुरंत जाए और खुद को सुरक्षित करें। यह बहुत आसान है, रजिस्ट्रेशन करना है, न हो तो सीधे अस्पताल पहुंच जाए वहां सब हो जाएगा। बस इसे लेकर सकारात्मक रहे और अपने आसपास के लोगों को इसके लिए प्रोत्साहित करे।
ठीक इसी तरह एमवाय अस्पताल के कई डॉक्टरों ने भी खुद को अपने परिवार के सदस्यों को वैक्सीनेट करवाया है। वेबदुनिया से चर्चा में उन्होंने बताया कि वैक्सीनेशन एक बहुत ही सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन इसके पूरे फायदे के लिए वैक्सीन के दोनो डोज का पूरा जरूर करे। तभी आपका शरीर हर्ड इम्युनिटी के लिए तैयार होगा और वायरस से लड पाएगा। इन सारे प्रबुद्ध नागरिकों ने आम लोगों से अपील की है कि वे आगे आए और जीवन रक्षक टीका लगवाएं। यह सुरक्षित और आसान है।
About Writer
नवीन रांगियाल
नवीन रांगियाल DAVV Indore से जर्नलिज्म में मास्टर हैं। वे इंदौर, भोपाल, मुंबई, नागपुर और देवास आदि शहरों में दैनिक भास्कर, नईदुनिया, लोकमत और प्रजातंत्र जैसे राष्ट्रीय अखबारों में काम कर चुके हैं। करीब 15 साल प्रिंट मीडिया में काम करते हुए उन्हें फिल्ड रिपोर्टिंग का अच्छा-खासा अनुभव है।
उन्होंने अखबार....
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