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कितना खतरनाक है निपाह (NiV) वायरस, क्या हैं लक्षण और कैसे फैलता है?

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, सोमवार, 21 मई 2018 (18:47 IST)
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक़ निपाह वायरस (NiV) तेज़ी से उभरता वायरस है, जो जानवरों और इंसानों में गंभीर बीमारी को जन्म देता है। NiV के बारे में सबसे पहले 1998 में मलेशिया के कम्पंग सुंगाई निपाह से पता चला था। वहीं से इस वायरस को ये नाम मिला। बताया जाता है कि उस समय इस वायरस का स्रोत सूअर थे। 
 
इसके बाद 2004 में NiV एक बार फिर खबरों में आया जब बांग्लादेश में कुछ लोग इस वायरस की चपेट में आए। तब पता चला कि इन लोगों ने खजूर के पेड़ से निकलने वाले तरल को चखा था और इस तरल तक वायरस को लेने जानी वाली चमगादड़ थीं, जिन्हें फ्रूट बैट कहा जाता है। 
 
कोई इलाज नहीं : अधिकतर वायरस की तरह इसका भी फिलहाल कोई इलाज नहीं है। इंसानों या जानवरों में इस बीमारी को दूर करने के लिए अभी तक कोई इंजेक्शन या टीका नहीं बना है। 
 
आम तौर पर ये वायरस इंसानों में इंफेक्शन की चपेट में आने वाली चमगादड़ों, सूअरों या फिर दूसरे इंसानों से फैलता है। मलेशिया और सिंगापुर में इसके सूअरों के ज़रिए फैलने की जानकारी मिली थी जबकि भारत और बांग्लादेश में इंसान से इंसान का संपर्क होने पर इसकी चपेट में आने का ख़तरा ज़्यादा रहता है।
 
क्या है इस वायरस से ग्रसित होने के लक्षण : सेंटर फ़ॉर डिसीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक निपाह वायरस का इंफ़ेक्शन एंसेफ़्लाइटिस से जुड़ा है, जिसमें दिमाग़ को नुकसान होता है। इंसानों में NiV इंफ़ेक्शन से सांस लेने से जुड़ी गंभीर बीमारी हो सकती है या फिर जानलेवा इंसेफ़्लाइटिस भी अपनी चपेट में ले सकता है। 
 
5 से 14 दिन तक इसकी चपेट में आने के बाद ये वायरस तीन से 14 दिन तक तेज बुखार और सिरदर्द की वजह बन सकता है।  यदि समय पर उपचार न मिले तो 24-48 घंटों में मरीज कोमा में पहुंच सकते हैं।
 
इंफ़ेक्शन के शुरुआती दौर में सांस लेने में समस्या होती है जबकि आधे मरीज़ों में न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें भी होती हैं। 
 
साल 1998-99 में जब ये बीमारी फैली थी तो इस वायरस की चपेट में 265 लोग आए थे। 40% मरीजों को गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी हुई थी और ये बच नहीं पाए थे।

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