Webdunia - Bharat's app for daily news and videos

Install App

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

क्या कोरिया रियासत के राजा ने नहीं मारा था देश का आखिरी चीता?, भारत में चीतों के विलुप्त होने की पूरी कहानी

हमें फॉलो करें webdunia
webdunia

विकास सिंह

शुक्रवार, 16 सितम्बर 2022 (08:43 IST)
70 साल बाद आखिरकार इंतजार की वह घड़ियां अब बस खत्म होने वाली है जब देश की धरती पर एक बार चीता अपनी दस्तक दे देगा। 1952 में भारत में चीते को विलुप्त वन्य जीव घोषित कर दिया था। ऐसा कहा जाता है कि साल 1948 में छत्तीसगढ़ के सरगुजा स्टेट की कोरिया रियासत के महाराजा रामानुज प्रताप सिंह देव ने देश के आखिरी तीन चीतों का शिकार किया था। जिसके बाद भारत में चीता कहीं नहीं देखा गया। 
 
बताया जाता है कि कोरिया रियासत के महाराज रामानुज प्रताप सिंहदेव शिकार के शौकीन थे। उन्होंने अपने जीवन काल में कई बाघ, तेंदुए, हिरण, चीतल, बारहसिंगा जैसे अनेक जानवरों का शिकार किया,जिसकी गवाही आज भी बैकुंठपुर के भव्य रामानुज पैलेस की दीवारों प  टंगे सिर देते हैं।
webdunia
शिकार के शौकीन 1948 में रामानुज प्रताप सिंह देव बैकुंठपुर से लगे गांव सलखा के जंगल में शिकार करने गए थे तभी ग्रामीणों ने जंगली जानवार के हमले की बात की। बताया जाता है कि ग्रामीणों ने आदमखोर जंगली जानवर की शिकायत भी रामानुज प्रताप सिंह से की।  जिसके बाद महाराज रामानुज प्रताप सिंहदेव शिकार के लिए निकल पड़े और उन्होंने एक साथ तीन चीतों का मार गिराया। शिकार किए गए तीनों नर चीते थे और पूरी तरह वयस्क भी नहीं हुए थे। परंपरा के मुताबिक महाराज रामानुज प्रताप सिंहदेव तीनों मृत चीतों के साथ बंदूक लिए फोटो खिंचाई। तीन चीतों के शिकार की यहीं तस्वीर बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के पास आज भी जमा है। माना जाता है कि यह तीन चीते भारत के आखिरी चीते थे और उसके बाद भारत में कभी चीते नहीं देखे गए।
webdunia
वहीं अब जब भारत में चीतों की दोबारा वापसी हो रही है तब अचानक से कोरिया राजघराना और महाराजा रामानुज प्रताप सिंह के भारत के आखिरी चीतों के शिकार की बात फिर सुर्खियों में है। जब मीडिया की खबरों में महाराजा रामानुज प्रताप सिंह को भारत के आखिरी चीतों के हत्यारों के तौर पर पेश किया जा रहा है तब कोरिया राजघराने की वर्तमान वारिस और महाराजा रामानुज प्रताप सिंह की पोती अंबिका सिंहदेव ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। 
 
 

 

webdunia

अंबिका सिंहदेव कहती है कि यह जरूर सच है कि मेरे बाबा ने चीतों का शिकार किया था लेकिन इसके कोई आधिकारिक प्रमाण नहीं है कि वह देश का आखिरी चीता था। अंबिका सिंहदेव कहती हैं कि उनके पिता रामचंद्र सिंहदेव से कहना था कि बाबा रामानुज प्रताप सिंह के चीतों का शिकार करने के बाद भी इस इलाके में चीते देखे गए थे। हलांकि अंबिका सिंहदेव ने अपने बाबा रामानुज प्रताप सिंह तो नहीं देखा लेकिन अपने परिवार के अन्य सदस्यों से चीतों के शिकार का पूरा वकाया सुना है।  

दरअसल रामानुज प्रताप सिंहदेव के पुत्र और छत्तीसगढ़ के पहले वित्तमंत्री रामचंद्र सिंहदेव भी मानते थे कि महाराजा रामानुज प्रताप सिंह के चीतों के शिकार करने की घटना के बाद भी उसी इलाके में ढाई-तीन साल बाद भी चीते देखे थे, जहां शिकार किया गया था। रामचंद्र सिंहदेव कहते थे कि जिन चीतों का शिकार किया गया था वह पूरी तरह वयस्क नहीं थे तो उन चीतों के माता-पिता जंगल में क्यों नहीं मिले।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

भारी बारिश से पानी-पानी हुआ लखनऊ, स्कूल बंद