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Vinayak Chaturthi 2026: फाल्गुन मास का विनायक चतुर्थी व्रत, जानें मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि, मंत्र और लाभ

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हमें फॉलो करें चतुर्थी व्रत पर गणेश पूजन का सुंदर फोटो

WD Feature Desk

, शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026 (11:30 IST)
What to Do on Dhundhiraj Vinayak Chaturthi: फाल्गुन मास का विनायक चतुर्थी व्रत विशेष रूप से गणेश जी की पूजा से संबंधित होता है। यह व्रत विशेष रूप से फाल्गुन मास की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा का दिन होता है और इस दिन की पूजा से समृद्धि, सुख-शांति और विघ्नों से मुक्ति की प्राप्ति होती है। इस बार यह व्रत 21 फरवरी 2026, दिन शनिवार को रखा जा रहा है, जिसे ढुण्ढिराज विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है।ALSO READ: Holashtak 2026: 24 फरवरी से प्रारंभ होंगे 'होलाष्टक', शुभ कार्य रहेंगे वर्जित

  1. ढुण्ढिराज चतुर्थी के शुभ मुहूर्त 2026
  2. विनायक चतुर्थी व्रत का महत्व
  3. विनायक चतुर्थी व्रत की पूजा विधि
  4. विनायक चतुर्थी व्रत के विशेष मंत्र
  5. विनायक चतुर्थी व्रत से जुड़े कुछ लाभ

ढुण्ढिराज चतुर्थी के शुभ मुहूर्त 2026

 
ढुण्ढिराज चतुर्थी शनिवार, 21 फरवरी 2026 को
 
फाल्गुन शुक्ल चतुर्थी तिथि का प्रारंभ- 20 फरवरी, 2026 को 02:38 पी एम से, 
चतुर्थी तिथि समापन- 21 फरवरी, 2026 को 01:00 पी एम बजे
 
ढुण्ढिराज चतुर्थी का समय
 
चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त- 11:27 ए एम से 01:00 पी एम
अवधि - 01 घंटा 34 मिनट्स
एक दिन पूर्व, 20 फरवरी को वर्जित चंद्रदर्शन का समय- 02:38 पी एम से 09:12 पी एम।
अवधि - 06 घंटे 34 मिनट्स
 
चंद्र दर्शन निषेध/ वर्जित चंद्रदर्शन का समय- 08:56 ए एम से 10:16 पी एम
अवधि - 13 घंटे 20 मिनट्स
 

विनायक चतुर्थी व्रत का महत्व

 
विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा विशेष रूप से विघ्नहर्ता के रूप में की जाती है। यह पूजा करने से जीवन में आने वाली कठिनाइयां दूर होती हैं और सभी प्रकार की रुकावटों से मुक्ति मिलती है। यह दिन खासकर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण होता है जो किसी विशेष कार्य या कार्यस्थल में विघ्नों का सामना कर रहे होते हैं।

इस दिन गणेश जी की पूजा से सफलता और समृद्धि प्राप्त होती है। इस व्रत को रखने से मन को शांति मिलती है और मानसिक तनाव दूर होता है। साथ ही, यह व्रत घर में सुख-शांति और समृद्धि लेकर आता है। 
 

विनायक चतुर्थी व्रत की पूजा विधि:

 
1. इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान करके स्वच्छता का ध्यान रखें और फिर पूजा स्थल को साफ करें।
 
2. इस दिन व्रत का संकल्प लेकर भगवान गणेश की पूजा करने का विचार करें। इस दिन आप उपवास रख सकते हैं या फलाहार कर सकते हैं।
 
3. गणेश जी की पूजा के लिए आपको कुछ मुख्य चीज़ों की आवश्यकता होगी:
 
- गणेश जी की मूर्ति या चित्र
- दीपक, अगरबत्ती
- दूध, दही, घी, शहद और शक्कर मिश्रित पंचामृत
- फल, मिठाइयां- विशेष रूप से मोदक और लड्डू
- गुलाब के पुष्प, चंदन, अक्षत/ चावल
- ताम्बूल (पान और सुपारी)
 
4. पूजा विधि:
 
- सबसे पहले गणेश जी की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ करें और उस पर चंदन का लेप लगाएं।
- पंचामृत से भगवान गणेश का अभिषेक करें और फिर पानी से उनका स्नान कराएं।
- फिर दीपक जलाकर, अगरबत्तियां और फूल अर्पित करें।
- फिर अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें।
- पूजा के दौरान गणेश जी के मंत्र का जाप करें।
 
5. गणेश मंत्र का जाप: पूजा के समय भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें। सबसे प्रसिद्ध और प्रभावी मंत्र है:
 
- 'ॐ गं गणपतये नमः'
- यह मंत्र भगवान गणेश के विनायक रूप का ध्यान करते हुए जाप किया जाता है।
 
6. आरती: पूजा के बाद भगवान गणेश की आरती करें। 
इस आरती का पाठ भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है।
 
7. व्रत का समापन: व्रत का समापन भगवान गणेश की पूजा और उनका धन्यवाद करके करें। इस दिन किसी गरीब या ब्राह्मण को दान देने का विशेष महत्व है। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है और व्रत का पूरा लाभ मिलता है।ALSO READ: Dhulendi in 2026: रंगों वाली होली का पर्व 3 को मनाएं या कि 4 मार्च को जानिए सही तारीख
 

विनायक चतुर्थी व्रत के विशेष मंत्र:

 
1. विनायक मंत्र:
 
- 'ॐ श्री गणेशाय नमः'
- यह मंत्र भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। इसे नियमित रूप से जाप करने से शुभ फल मिलते हैं।
 
2. गणेश की विनती करने वाला मंत्र:
- 'ॐ गं गणपतये नमः'
-  यह मंत्र भी विघ्नों के नाश और सफलताओं की प्राप्ति के लिए प्रसिद्ध है।
 
3. गणेश स्तोत्र (गणेश पूजा के बाद पढ़ें):
 

विनायक चतुर्थी व्रत से जुड़े कुछ लाभ

 
* इस दिन किए गए व्रत और पूजा से जीवन में समृद्धि और सुख-शांति मिलती है।
* व्यवसाय या व्यापार में आ रही समस्याओं का समाधान होता है।
* बुरे समय से बाहर निकलने के लिए भगवान गणेश की कृपा मिलती है।
* घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: होलाष्टक के 8 दिन क्यों माने जाते हैं अशुभ? जानें 12 राशियों पर क्या पड़ेगा असर
 

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