Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

गोपाष्टमी 2020 : कार्तिक शुक्ल अष्टमी को कैसे करें गाय और बछड़े का पूजन

webdunia
हिन्दू संस्कृति में गाय का विशेष महत्व माना गया है और उन्हीं को समर्पित हैं ये गोपाष्टमी पर्व। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार दिवाली के ठीक बाद आने वाली कार्तिक शुक्ल अष्टमी को गोपाष्टमी पर्व के रूप में मनाया जाता है। 
 
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गौ चारण लीला शुरू की थी। कार्तिक शुक्ल अष्टमी के दिन मां यशोदा ने भगवान कृष्ण को गौ चराने के लिए जंगल भेजा था। इस दिन गो, ग्वाल और भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करने का महत्व है। 
 
हिन्दू धर्म में गाय को माता का स्थान दिया गया है। अत: गाय को गौ माता भी कहा जाता है। आइए जानें कैसे मनाएं गोपाष्टमी पर्व? 
 
* गोपाष्टमी यानी कार्तिक शुक्ल अष्टमी के दिन प्रात:काल में उठकर नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नानादि करके स्वच्छ धुले हुए वस्त्र धारण करें। 
 
* तत्पश्चात प्रात:काल में ही गायों को भी स्नान आदि कराकर गौ माता के अंग में मेहंदी, हल्दी, रंग के छापे आदि लगाकर सजाएं।
 
* इस दिन गायों को खूब सजाया-संवारा जाता है।
 
* इस दिन बछड़े सहित गाय की पूजा करने का विधान है। 
 
* प्रात:काल में ही धूप-दीप, अक्षत, रोली, गुड़ आदि वस्त्र तथा जल से गाय का पूजन किया जाता है और धूप-दीप से आरती उतारी जाती है।
 
* इस दिन ग्वालों को उपहार आदि देकर उनका भी पूजन करने का महत्व है।  
 
* इस दिन सभी परिवार के लोग गौ यानी गाय की विधि विधान से पूजा करते हैं।
 
* इसके बाद गाय को चारा आदि डालकर उनकी परिक्रमा करते हैं। परिक्रमा करने के बाद कुछ दूर तक गायों के साथ चलते हैं। 
 
* संध्याकाल में गायों के जंगल से वापस लौटने पर उनके चरणों को धोकर तिलक लगाने का महत्व है। 
 
* इस संबंध में ऐसी आस्था भी है कि गोपाष्टमी के दिन गाय के नीचे से निकलने वालों को बड़ा पुण्य मिलता है। 
 
* गोपाष्टमी के शुभ अवसर पर गौशाला में गो संवर्धन हेतु गौ पूजन का कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है।
गोपाष्टमी क्यों मनाएं, जानिए पौराणिक महत्व
ॐ जय जय गौमाता : गोपाष्टमी पर पढ़ें गाय माता की यह आरती
 
 

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

शनि ग्रह का पेड़ है आपके घर के पास तो जानिए 7 काम की बातें