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Sankashti Ganesh Chaturthi 2026, कब है साल की पहली संकष्टी गणेश चतुर्थी, जानें महत्व, पूजा विधि और मुहूर्त

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WD Feature Desk

, मंगलवार, 6 जनवरी 2026 (09:10 IST)
Ganesh Chaturthi fasting 2026: नववर्ष 2026 में पहली संकष्टी गणेश चतुर्थी 06 जनवरी, दिन मंगलवार को मनाई जाएगी। यह विशेष दिन भगवान गणेश की पूजा का दिन होता है, जो हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आता है।ALSO READ: January 2026 Vrat Dates: जनवरी माह 2026 के प्रमुख व्रत एवं त्योहारों की लिस्ट

इस बार संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत माघ मास के महीने में कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाया जाएगा, जिसे लंबोदर संकष्टी चतुर्थी तथा सकट चौथ के नाम से जाना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों द्वारा किया जाता है, जो अपने जीवन में आने वाली समस्याओं और कठिनाइयों से उबरने के लिए भगवान गणेश की पूजा करते हैं।
 
संकष्टी गणेश चतुर्थी मुहूर्त 2026:
सकट चौथ पूजन/ लंबोदर संकष्टी चतुर्थी: 06 जनवरी 2026, मंगलवार
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ- 06 जनवरी, 2026 को 08:01 ए एम बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त- 07 जनवरी, 2026 को 06:52 ए एम बजे
 
संकष्टी के दिन चन्द्रोदय - 08:54 पी एम होगा।
 
संकष्टी गणेश चतुर्थी का महत्व: 
 
1. दुःखों का निवारण: संकष्टी गणेश चतुर्थी का महत्व इसलिए है क्योंकि इस दिन भगवान गणेश की पूजा से सभी तरह के संकट और समस्याओं से मुक्ति मिलती है। जो लोग कठिनाईयों में घिरे होते हैं, उनके लिए यह दिन विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।
 
2. धन की प्राप्ति: संकष्टी गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है। इससे आर्थिक स्थिति में सुधार और धन की प्राप्ति होती है।
 
3. विद्या और बुद्धि की प्राप्ति: भगवान गणेश जी को विद्या और बुद्धि के देवता माना जाता है। इस दिन उनकी पूजा करने से विद्यार्थियों को सफलता मिलती है और उनका ज्ञान वर्धन होता है।
 
4. स्वास्थ्य में सुधार: संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत करने से शरीर की शुद्धि होती है और सेहत में भी सुधार आता है।ALSO READ: January 2026: जनवरी 2026 के प्रमुख ग्रह गोचर राशि परिवर्तन
 
संकष्टी गणेश चतुर्थी पूजा विधि
 
1. स्नान और शुद्धता: इस दिन व्रती को पूजा से पहले नहा-धोकर शुद्ध होना चाहिए। इससे शरीर और मन की शुद्धि होती है।
 
2. गणेश प्रतिमा की स्थापना: संकष्टी गणेश चतुर्थी के दिन सबसे पहले भगवान गणेश की प्रतिमा को अपने घर में स्थापित करें। आप मिट्टी, सोने, चांदी या किसी भी अन्य सामग्री की गणेश प्रतिमा का पूजन कर सकते हैं।
 
3. पुष्प, फल और लड्डू अर्पित करें: भगवान गणेश को उनकी पसंदीदा चीजें जैसे मोदक, लड्डू, केला, नारियल, आदि अर्पित करें। साथ ही साथ ताजे फूल और फल भी चढ़ाएं।
 
4. धूप, दीप और अगरबत्तियां: पूजा स्थान पर दीपक, अगरबत्तियां और धूप जलाएं, ताकि वातावरण शुद्ध हो और गणेश जी का स्वागत ठीक से किया जा सके।
 
5. गणेश मंत्र: पूजा में 'ॐ गण गणपतये नमः', 'ॐ श्री गणेशाय नमः' जैसे मंत्रों का जाप करें। इस दिन विशेष रूप से 'संकष्टी गणेश व्रत कथा' सुनने या पढ़ने का महत्व है, जो व्रति की सभी इच्छाओं की पूर्ति करता है।
 
6. व्रत का पालन करें: इस दिन उपवास रखने का महत्व है, लेकिन जो लोग उपवासी नहीं रह सकते, वे फलाहार कर सकते हैं। व्रत के दौरान मन, वचन और क्रिया से पवित्र रहना जरूरी है।
 
7. संध्या पूजा: संकष्टी गणेश चतुर्थी की पूजा दिन में एक बार और फिर संध्या वेला में दूसरी बार करें। संध्या समय में गणेश जी को दूध, शहद और चीनी मिश्रित जल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
 
8. आरती और भजन: पूजा के बाद गणेश जी की आरती और भजन गाएं। 'जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा...' जैसे भजनों से पूजा संपन्न होती है।
 
यह तिथि संकष्टी गणेश चतुर्थी के लिए सबसे उत्तम है, क्योंकि इस दौरान गणेश जी की पूजा करने से सभी समस्याओं का निवारण होता है।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: संकटों का अंत और सुखों का आरंभ: क्यों खास है चतुर्थी का उपवास?

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