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Ekdant Sankashti Chaturthi 2026: एकदंत संकष्टी चतुर्थी के शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, और मह‍त्व

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चित्र में एकदंत संकष्टी चतुर्थी मैसेज के साथ भगवान श्री गणेश के पूजन का फोटो
Ekadanta Sankashti Chaturthi 2026: ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को 'एकदंत संकष्टी चतुर्थी' कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश के 'एकदंत' स्वरूप की पूजा करने से मानसिक शांति और कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। चूंकि यह चतुर्थी व्रत 5 मई 2026 को है, तो इस व्रत से जुड़े महत्वपूर्ण विवरण निम्नलिखित हैं:ALSO READ: 2026 में 2 ज्येष्ठ मास का दुर्लभ योग: राशि अनुसार करें ये अचूक उपाय, मिलेगा बड़ा लाभ
 

1. एकदंत संकष्टी का समय और शुभ मुहूर्त 2026

हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी की तिथि और समय इस प्रकार है:
 
ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 5 मई 2026, 05:24 ए एम से
चतुर्थी तिथि समाप्त: 6 मई 2026, रात 07: 51 ए एम पर। 
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:51 बजे से 12:45 बजे तक।
एकदंत संकष्टी चतुर्थी व्रत मंगलवार, 5 मई, 2026 को। 
संकष्टी के दिन चंद्रोदय का समय: रात 10:35 पी एम पर।
 

2. पूजन विधि: कैसे करें प्रसन्न?

प्रात:काल स्नान: ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
 
व्रत संकल्प: हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।
 
स्थापना: चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा रखें। उन्हें जल, अक्षत, सिंदूर, और दूर्वा (21 गाठें) अर्पित करें।
 
प्रिय भोग: गणेश जी को मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।
 
शाम की मुख्य पूजा: संकष्टी चतुर्थी पर शाम की पूजा का विशेष महत्व है। गणेश जी की आरती करें और एकदंत संकष्टी कथा सुनें।
 
अर्घ्य दान: रात में चंद्रमा निकलने पर जल, दूध और चंदन मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बिना व्रत पूरा नहीं माना जाता।
 
जाप के लिए आज के विशेष मंत्र: 'एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ती प्रचोदयात्।'
2. मंत्र- 'ॐ गणेशाय नमः' का जाप करें।
 

3. एकदंत संकष्टी चतुर्थी का महत्व

भगवान गणेश का एकदंत स्वरूप बुद्धि और शक्ति के संतुलन को दर्शाता है। एक दांत (बुद्धि) और टूटा हुआ दांत (त्याग) का प्रतीक है। जैसा कि नाम 'संकष्टी' है, यह कष्टों को हरने वाली चतुर्थी है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान पर आने वाले कष्ट दूर होते हैं। ज्येष्ठ की गर्मी के दौरान आने वाला यह व्रत मन को शीतलता और धैर्य प्रदान करता है तथा समस्त बाधाओं का नाश करके मानसिक शांति देता है। 
 
टिप: यदि आप ज्येष्ठ मास की एकदंत संकष्टी चतुर्थी का व्रत रख रहे हैं, तो चंद्रमा को अर्घ्य देते समय अपनी मनोकामना मन में अवश्य दोहराएं!
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Bada Mangal 2026: क्या आप जानते हैं ज्येष्ठ मंगल को 'बड़ा मंगल' क्यों कहते हैं? जानें सटीक पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

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