Festival Posters

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

शीतला अष्टमी पर क्यों खाया जाता है बासी खाना? जानिए इसके पीछे की धार्मिक मान्यता

Advertiesment
Pictured are devotees worshipping the Hindu goddess Shitala Mata, with a temple in the background.
Sheetala saptami kab hai: भारतीय संस्कृति में शीतला अष्टमी या 'बासौड़ा' का पर्व केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि सेहत और स्वच्छता का एक अनूठा संदेश है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाले इस त्यौहार पर चूल्हा न जलाने और बासी भोजन (ठंडा खाना) करने का विधान है। 09 मार्च को शीतला सप्तमी और 10 मार्च 2026 को शीतला अष्टमी रहेगी। आइए जानते हैं इस अनूठे 'कोल्ड फूड फेस्टिवल' के पीछे के मुख्य कारण।

शीतलता और सेहत का संगम

होली के बाद जब प्रकृति में गर्मी बढ़ने लगती है, तब हमारे शरीर को अंदरूनी ठंडक की जरूरत होती है। शीतला माता को चेचक और खसरा जैसे रोगों से बचाने वाली देवी माना जाता है। मान्यता है कि उन्हें ठंडा और बासी भोजन (जैसे कढ़ी, बाजरा, गुड़ का चूरमा और दही) अर्पित करने से मां प्रसन्न होती हैं और परिवार को संक्रामक रोगों से दूर रखती हैं।
 

बासी खाना क्यों है खास?

तपन का संतुलन: गर्मी की शुरुआत में शरीर के तापमान को संतुलित करने के लिए ठंडा भोजन आयुर्वेद के नजरिए से भी हितकारी माना गया है।
प्रोबायोटिक्स का खजाना: रात भर रखे गए चावल या बाजरे में प्राकृतिक रूप से 'गुड बैक्टीरिया' यानी प्रोबायोटिक्स पैदा होते हैं, जो हमारी आंतों और पाचन तंत्र के लिए वरदान साबित होते हैं।
संक्रमण से बचाव: प्राचीन समय में इस दिन चूल्हा न जलाकर यह सुनिश्चित किया जाता था कि घर के वातावरण में गर्मी न बढ़े और भोजन दूषित न हो।
 
शीतला अष्टमी हमें सिखाती है कि मौसम के बदलाव के साथ खान-पान में बदलाव करना कितना जरूरी है। यह पर्व श्रद्धा के साथ-साथ एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सीख देता है। बस ध्यान रहे कि भोजन को साफ-सुथरी जगह और सही तापमान पर ही स्टोर किया गया हो।
 

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

Malavya Rajyog 2026: अगले 28 दिन इन 4 राशियों पर होगी पैसों की बारिश, क्या आपकी किस्मत भी चमकने वाली है?