Publish Date: Thu, 14 May 2020 (12:42 IST)
Updated Date: Thu, 14 May 2020 (12:44 IST)
प्राणायम की प्रारंभिक क्रिया है अनुलोम और विलोम। इससे मस्तिष्क में ऑक्सिजन लेवल बढ़ता है और फेंफड़े मजबूत होते हैं। कोरोना के संक्रमण के दौर में फेंफड़ों का मजबूत होना आवश्यकत है। अत: जानिए कि कैसे करें अनुलोम विलोम प्राणायाम।
प्राणायाम करते समय 3 क्रियाएं करते हैं- 1.पूरक, 2.कुंभक और 3.रेचक। इसे ही हठयोगी अभ्यांतर वृत्ति, स्तम्भ वृत्ति और बाह्य वृत्ति कहते हैं। यही अनुलोम और विलोम है। यही नाड़ीशोधन प्रणायाम की प्रारंभिक क्रिया है।
(1) पूरक - अर्थात नियंत्रित गति से श्वास अंदर लेने की क्रिया को पूरक कहते हैं। श्वास धीरे-धीरे या तेजी से दोनों ही तरीके से जब भीतर खींचते हैं तो उसमें लय और अनुपात का होना आवश्यक है।
(2) कुंभक - अंदर की हुई श्वास को क्षमतानुसार रोककर रखने की क्रिया को कुंभक कहते हैं। श्वास को अंदर रोकने की क्रिया को आंतरिक कुंभक और श्वास को बाहर छोड़कर पुन: नहीं लेकर कुछ देर रुकने की क्रिया को बाहरी कुंभक कहते हैं। इसमें भी लय और अनुपात का होना आवश्यक है।
(3) रेचक - अंदर ली हुई श्वास को नियंत्रित गति से छोड़ने की क्रिया को रेचक कहते हैं। श्वास धीरे-धीरे या तेजी से दोनों ही तरीके से जब छोड़ते हैं तो उसमें लय और अनुपात का होना आवश्यक है।
इसका लाभ : तनाव घटाकर शांति प्रदान करने वाले इस प्राणायम से सभी प्रकार की नाड़ियों को भी स्वस्थ लाभ मिलता है। नेत्र ज्योति बढ़ती है और रक्त संचालन सही रहता है। अनिद्रा रोग में यह प्राणायाम लाभदायक है। मस्तिष्क के सभी विकारों को दूर करने में सक्षम है। फेंफड़ों में जमा गंदगी बहार होती है और फेंफड़े मजबूत बनते हैं। 10 मिनट अनुलोम-विलोम करने से सिरदर्द ठीक हो जाता है। नकारात्मक चिंतन से चित्त दूर होकर आनंद और उत्साह बढ़ जाता है।