Publish Date: Mon, 27 Jan 2025 (17:21 IST)
Updated Date: Mon, 27 Jan 2025 (17:36 IST)
Naga Baba 17 Adornments: महाकुंभ में नागा साधुओं का अमृत स्नान एक अद्भुत दृश्य होता है। या आप जानते हैं अमृत स्नान से पहले नागा साधु अपने शरीर पर 17 प्रकार के श्रृंगार करते हैं। जी हां हिन्दू मान्यता के अनुसार सुहागिन महिलाओं के लिए 16 श्रृंगार हैं लेकिन नागा साधु17 प्रकार के श्रृंगार करते हैं। ये श्रृंगार केवल सजावट नहीं होते बल्कि इनका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। आइए जानते हैं नागा साधुओं के इन 17 श्रृंगारों के बारे में।
नागा साधुओं के लिए 17 श्रृंगार का महत्व
नागा साधुओं के लिए 17 श्रृंगार एक पवित्र अनुष्ठान है। ये श्रृंगार उन्हें भगवान शिव से जोड़ते हैं और उन्हें आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करते हैं। इन श्रृंगारों का प्रत्येक तत्व एक विशेष अर्थ रखता है।
इन 17 श्रृंगारों से परिपूर्ण होते हैं नागा साधु
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भभूत: भभूत भगवान शिव का प्रतीक है। इसे लगाने से नागा साधु शिव के साथ एकात्मता का अनुभव करते हैं।
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लंगोट: लंगोट सादगी और त्याग का प्रतीक है।
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चंदन: चंदन शीतलता और शांति का प्रतीक है।
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चांदी या लोहे के बने पैरों के कड़े: ये कड़े शक्ति और स्थिरता का प्रतीक हैं।
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रुद्राक्ष: रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई है। नागा साधु सिर, गले और बाजुओं में रुद्राक्ष की माला धारण करते हैं।
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रोली का लेप: रोली शुभता और समृद्धि का प्रतीक है।
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अंगूठी: अंगूठी शक्ति और अधिकार का प्रतीक है।
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फूलों की माला: फूल प्रकृति और सौंदर्य का प्रतीक हैं।
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हाथों में चिमटा: चिमटा तपस्या और संयम का प्रतीक है।
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डमरू: डमरू भगवान शिव का वाद्य यंत्र है।
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कमंडल: कमंडल में गंगाजल होता है जो पवित्रता का प्रतीक है।
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जटाएं: जटाएं तपस्या और वैराग्य का प्रतीक हैं।
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तिलक: तिलक भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।
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काजल: काजल बुरी नजर से बचाता है और आंखों को शक्ति प्रदान करता है।
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हाथों में कड़ा: हाथों में कड़ा शक्ति और संरक्षण का प्रतीक है।
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विभूति का लेप: विभूति भगवान शिव का प्रतीक है।
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साधना: सर्वमंगल की कामना से नागा साधु जो साधना करते हैं, वह महत्वपूर्ण श्रृंगार है।
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17 श्रृंगार का महत्व
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धार्मिक महत्व: ये 17 श्रृंगार नागा साधुओं के धार्मिक विश्वासों से जुड़े हुए हैं।
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आध्यात्मिक शक्ति: इन श्रृंगारों के माध्यम से नागा साधु आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करते हैं।
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पहचान: ये श्रृंगार नागा साधुओं की पहचान होते हैं।
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संस्कृति: ये श्रृंगार भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
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