राजस्थान की इन 10 सीटों पर रहेंगी पूरे देश की नजरें

सोमवार, 10 दिसंबर 2018 (21:20 IST)
राजस्थान की 200 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में कई सीटें ऐसी हैं जिनके परिणामों पर सबकी नजरें हैं। सबके मन में यही उत्सुकता है आखिर इन सीटों का परिणाम क्या होगा...
 
झालरापाटन : इस बार झालरापाटन सीट की चर्चा सबसे ज्यादा है, क्योंकि यहां से मुख्‍यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ मानवेन्द्रसिंह चुनाव लड़ रहे हैं। सिंह चुनाव से ठीक पहले भाजपा से कांग्रेस में आए हैं। वे भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंतसिंह के पुत्र हैं। मानवेन्द्र 2009 में बाड़मेर सीट से सांसद भी रह चुके हैं। हालांकि उनका वसुंधरा के खिलाफ जीतना मुश्किल ही है, क्योंकि राजे 2003 से इस सीट से लगातार चुनाव जीतती आ रही हैं। इस सीट पर कांग्रेस ने उनके खिलाफ एक बार सचिन पायलट की मां रमा पायलट को भी उतारा था, लेकिन वे भी वसुंधरा के गढ़ को ढहाने में नाकाम रही थीं।
 
 
टोंक : यह सीट इसलिए चर्चा में है, क्योंकि यहां से राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट चुनाव लड़ रहे हैं। यहां से भाजपा ने मुस्लिम नेता और राज्य के परिवहन मंत्री यूनुस खान को उतारा है। चूंकि यह सीट मुस्लिम बहुत है इसलिए यहां मुकाबला रोचक हो गया है। यूनुस नागौर जिले की डिडवाना सीट से विधायक हैं।
 
सांगानेर : भारत वाहिनी पार्टी के प्रत्याशी और भाजपा के दिग्गज नेता रहे घनश्याम तिवाड़ी इस बार भाजपा के खिलाफ ही खम ठोंक रहे हैं। 6 बार विधायक रह चुके तिवाड़ी पिछले 3 बार से सांगानेर सीट से विधायक चुने जाते रहे हैं। भाजपा ने यहां से अशोक लाहोटी और कांग्रेस ने ब्राह्मण चेहरे पुष्पेन्द्र भारत को मैदान में उतारा है। लाहोटी जयपुर नगर निगम के महापौर हैं, जबकि अलवर की रामगढ़ सीट से विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने यहां से निर्दलीय प्रत्याशी बनकर मुकाबले को चतुष्कोणीय बना दिया है। उन्हें यहां के सिन्धी और पंजाबी वोटों का समर्थन मिल सकता है।
 
 
सरदारपुरा : चूंकि यहां से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत चुनाव लड़ रहे हैं, ऐसे में इस सीट का सुर्खियों में आना स्वाभाविक है। गहलोत इस बार भी मुख्‍यमंत्री पद के चेहरे हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। जोधपुर की यह सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है। मोदी लहर में जब जिले की 9 सीटें भाजपा ने जीती थीं, सरदारपुरा सीट तब भी कांग्रेस के कब्जे में रही थी। भाजपा ने यहां से एक फिर शंभूसिंह खेतासर पर भरोसा जताया है। माली और अल्पसंख्यक बहुल इस सीट पर कांग्रेस की जीत तय मानी जा रही है।
 
 
उदयपुर शहर : मेवाड़ इलाके की उदयपुर सीट पर भी इस बार रोचक मुकाबला देखने को मिला। यहां कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री गिरिजा व्यस को उम्मीदवार बनाया है तो भाजपा ने वसुंधरा सरकार में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया को मैदान में उतारा है। दोनों ही उम्मीदवारों के लिए यह चुनाव खास है, क्योंकि दोनों ही 70 साल से ऊपर के हैं। ऐसे में उन्हें अगला मौका मिलने की संभावना नहीं के बराबर है।
 
 
नाथद्वारा : मेवाड़ के ही राजसमंद जिले की नाथद्वारा सीट पर भी मुकाबला कम रोचक नहीं है। यहां कांग्रेस उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी जोशी की प्रतिष्ठा दांव पर है। जोशी 2008 के विधानसभा चुनाव में जब मुख्‍यमंत्री पद के प्रबल दावेदार थे तब इस सीट से 1 वोट से चुनाव हार गए थे। यहां से भाजपा ने नए चेहरे महेश प्रताप सिंह को उतारा है।
 
सपोटरा : करौली जिले की सपोटरा सीट पर भाजपा ने मीणा नेता किरोड़ीलाल मीणा ने पत्नी गोलमा देवी को प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस ने रमेश मीणा को। यहां न सिर्फ भाजपा बल्कि किरोड़ी मीणा की प्रतिष्ठा दांव पर हैं। मीणा राजस्थान सरकार में मंत्री रहने के साथ ही लोकसभा और राज्यसभा से भी सांसद रह चुके हैं। वर्ष 2013 में मोदी लहर के वक्त भी रमेश मीणा ने भाजपा के ऋषिकेश मीणा को हराकर इस सीट पर जीत दर्ज की थी। 2008 में भी इस सीट पर रमेश मीणा का कब्जा था। गोलमा देवी 2 बार विधायक और 1 बार मंत्री रह चुकी हैं।
 
 
चुरू : भाजपा ने यहां से राज्य सरकार के मंत्री और वसुंधरा के करीबी राजेन्द्रसिंह राठौड़ को एक बार फिर प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस ने अपने पूर्व विधायक हाजी मकबूल मंडेलिया के बेटे रफीक मंडेलिया को मैदान में उतारा है। इस सीट पर मुस्लिम आबादी करीब 12 फीसदी है। भाजपा के राजेन्द्र राठौड़ ने पिछले चुनाव में मकबूल मंडेलिया को 24 हजार से ज्यादा मतों से हराया था। हालांकि इस बार राज्य में भाजपा के खिलाफ लहर है इसलिए मुकाबला कांटे का माना जा रहा है।
 
 
रतनगढ़ : चुरू जिले की रतनगढ़ सीट पर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही प्रत्याशियों को बागियों का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा ने यहां से अभिषेक महर्षि को उतारा है, जबकि कांग्रेस ने भंवरलाल पुजारी को उम्मीदवार बनाया है। टिकट कटने से नाराज भाजपा सरकार के मंत्री और वर्तमान विधायक राजकुमार रिणवा भाजपा को चुनौती ही चुनौती दे रहे हैं, वहीं कांग्रेस के बागी पूसाराम गोदारा ने भी मैदान संभाल रखा है।
 
 
महुवा : दौसा जिले की महुवा सीट पर चाचा-भतीजे का रोचक मुकाबला देखने को मिला। भाजपा ने यहां से मौजूद विधायक ओमप्रकाश हुड़ला का टिकट काटकर डॉ. किरोड़ीलाल मीणा के भतीजे राजेन्द्र मीणा को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने युवा अजय बोहरा को उम्मीदवार बनाया है। दोनों के बीच चाचा और भतीजे का रिश्ता है।
 
इनके अलावा बीकानेर पूर्व (सिद्धि कुमारी), सीकर जिले की खंडेला (मंत्री बंशीधर बाजिया और कांग्रेस के बागी पूर्व केंद्रीय मंत्री महादेव खंडेला), खिंवसर (हनुमान बेनीवाल), जयपुर सिविल लाइन (प्रतापसिंह खाचरियावास-अरुण चतुर्वेदी) आदि सीटों के परिणाम पर भी लोगों की करीबी नजर है।

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