Publish Date: Mon, 04 Aug 2025 (14:25 IST)
Updated Date: Mon, 04 Aug 2025 (14:30 IST)
rakhi kab kholna chahiye : रक्षाबंधन का पावन पर्व, भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक, हर साल ढेर सारी खुशियाँ लेकर आता है। बहनें अपने भाई की कलाई पर प्यार और शुभकामनाओं का धागा बांधती हैं, और भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देते हैं। लेकिन, राखी बांधने के कुछ दिनों बाद एक सवाल अक्सर मन में आता है – "कलाई पर बंधी राखी को आखिर कब उतारना चाहिए?" क्या इसका कोई निश्चित नियम है या इसे अपनी इच्छानुसार कभी भी उतारा जा सकता है? आइए, इस पारंपरिक दुविधा को समझते हैं।
राखी उतारने का नियम
राखी, जिसे 'रक्षा सूत्र' भी कहा जाता है, सिर्फ एक धागा नहीं बल्कि बहन के प्रेम, भाई की प्रतिज्ञा और शुभकामनाओं का पवित्र प्रतीक है। इसे रक्षा कवच के रूप में भी देखा जाता है जो भाई को बुरी शक्तियों और संकटों से बचाता है। इसलिए, इसे तुरंत उतारने की परंपरा नहीं है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राखी को कुछ शुभ दिनों तक कलाई पर धारण करना चाहिए ताकि उसका सकारात्मक प्रभाव बना रहे।
कब उतारें राखी?
राखी उतारने के लिए मुख्य रूप से तीन प्रमुख शुभ तिथियों का उल्लेख मिलता है, जो हिंदू पंचांग के अनुसार तय होती हैं:
1. भाद्रपद (भादौ) मास की पूर्णिमा: रक्षाबंधन श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसके ठीक बाद भाद्रपद मास की शुरुआत होती है। कई परिवारों और क्षेत्रों में यह मान्यता है कि भाद्रपद मास की पूर्णिमा तक राखी को कलाई पर धारण करना चाहिए। इस पूर्णिमा को 'श्राद्ध पूर्णिमा' भी कहते हैं। इस समय तक राखी को धारण करने से उसका रक्षात्मक प्रभाव बना रहता है।
2. गणेश चतुर्थी: गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। यह भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। कुछ परंपराओं में गणेश चतुर्थी के दिन राखी उतारने का रिवाज है। माना जाता है कि इस दिन गणेश जी की पूजा के साथ राखी उतारने से वे सभी विघ्नों का हरण करते हैं और भाई-बहन के रिश्ते पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं।
3. जन्माष्टमी: जन्माष्टमी का पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है, जो भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव का प्रतीक है। जन्माष्टमी के दिन भी राखी उतारने की परंपरा है। यह पर्व भी बहुत पवित्र माना जाता है और इस दिन राखी उतारना शुभ माना जाता है।
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