घुंघरू की झंकार और तबले की थाप का इंदौर म्यूजिक फेस्टिवल में अनूठा प्रयोग

वेबदुनिया न्यूज डेस्क

सोमवार, 27 जनवरी 2020 (21:55 IST)
इंदौर। वहाँ सुर, ताल, लय, थाप, थिरकन, राग और रुनझुन स्वर थे। साँसों पर संतुलन, हाथों का नियंत्रण और स्वरों का अनुशासन था। एक अद्भुत युगलबंदी, अनूठा सामंजस्य और विलक्षण तालमेल था। इंदौर म्यूजिक फेस्टिवल का पहला दिन जिस तरह संगीत के समस्त तत्वों में सराबोर हुआ उससे लगा कि जैसे वसंत पंचमी दो दिन पूर्व आ गई हो।
 
अभय प्रशाल स्थित 'लाभ मंडपम' हॉल में गूंजते घुंघरू की मीठी झंकार, तबले की सुव्यवस्थित ताल और गायन की मधुरता ने जैसे शहद घोल दिया हो। गायिका मंजूषा कुलकर्णी अपने पूरे फॉर्म में थी वहीं तबले पर विजय घाटे ने जैसे आज नृत्यांगना शीतल कोल्वलकर को अपने सबसे खूबसूरत रूप में आने की ठान रखी थी।

माँ सरस्वती की इससे सुंदर आराधना और क्या होगी। आसमानी रंग की छटा में जैसे ही नृत्यांगना शीतल का आगमन हुआ, संगीत के सारे सुर जैसे अनुशासन में आबद्ध हो सुव्यक्त होने को बाध्य हो उठे।
गौतम काले की गुरुकुल संगीत संस्था प्रतिवर्ष अपने गुरु पंडित जसराज के जन्मदिन पर इंदौर म्यूजिक फेस्टिवल (आईएमएफ) का भव्य आयोजन करती है, जिसमें अब तक संगीत जगत की कई नामचीन हस्तियां शिरकत कर चुकी हैं। इस बार प्रथम दिन पंडित राजन साजन मिश्र आकर्षण का केंद्र रहे दूसरे दिन का आकर्षण उस्ताद राशिद खां होंगे।
 
कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत राग पुरिया धनश्री और ताल तिलवाड़ा में मंजूषा कुलकर्णी पाटिल ने अपने गायन से की। मंजूषा ने भारतीय शास्त्रीय संगीत में अपना मकाम बनाया है।

वह महाराष्ट्र के सांगली जिले से हैं और 12 साल की उम्र में ही उन्होंने गायन सीखना शुरू कर दिया था। वे अब तक देश के कई ख्यातनाम संगीत समारोह में शिरकत कर चुकी हैं। मंजूषा ठुमरी, भजन, नाट्य संगीत और खासतौर से अपनी ख़्याल गायकी के लिए जानी जाती है।
28 को ये कलाकार देंगे प्रस्‍तुति : मंगलवार को ख्‍यातनाम शास्त्रीय गायक उस्‍ताद राशिद खान अपनी प्रस्‍तुति देंगे। राशिद खान शास्त्रीय संगीत की दुनिया में एक बड़ा नाम हैं। वे रामपुर सहास्‍वान घराने से आते हैं। हालांकि फिल्‍म 'जब वी मेट' के गीत ‘आओगे जब तुम हो साजना’ के बाद वे आम लोगों के भी पंसदीदा हो गए।

मंगलवार को शहर के गौतम काले, पवन सेम, विवेक बंसोड, विजय घाटे, अजय जगलेकर, मुराद अली, अरमान खान और नागेश अडगांवकर की प्रस्‍तुति होगी।
 
 
आईएमएफ क्‍यों है खास : अपनी शास्‍त्रीय परंपरा की गायिकी और संस्‍कार में विशेष स्‍थान रखने वाला इंदौर म्‍यूजिक फेस्‍टिवल (आईएमएफ) इसलिए भी खास है क्‍योंकि इसमें अब तक हरिप्रसाद चौरसिया, बेगम परवीन सुल्‍ताना, पंडित विश्‍वमोहन भट्ट, मामे खां, साबरी ब्रदर्स, अहमद हुसैन-मोहम्‍मद हुसैन इसमें अपनी प्रस्‍तुति दे चुके हैं। उस्‍ताद जाकिर हुसैन तो इसी आयोजन की वजह से 15 साल के अंतराल के बाद इंदौर आए थे

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