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नहीं रहे नेताजी सुभाष बोस के ड्राइवर कर्नल निजामुद्दीन

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Netaji Subhas Chandra Bose
आजमगढ़। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के ड्राइवर रहे आजाद हिंद फौज के कर्नल निजामुद्दीन का सोमवार को यहां निधन हो गया।
कर्नल निजामुद्दीन की उम्र 107 वर्ष से ज्यादा थी। लम्बे समय से बीमार चल रहे वयोवृद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ने अपने पैतृक गांव ढकवा में अंतिम सांस ली। उनके परिवार में पत्नी, तीन बेटे और दो बेटियां हैं। उनके दो बेटे बाहर सऊदी अरब और मुंबई में हैं, जबकि बडा बेटा शेख अकरम उन्हीं के पास रहता था। 
 
परिजनों के मुताबिक उनका अंतिम संस्कार गांव के ही कब्रिस्तान में किया जाएगा। निजामुद्दीन ने नेताजी की मृत्यु 1945 में हवाई जहाज की दुर्घटना में होने से इन्कार किया था। उन्होंने नेताजी की मृत्यु की जांच के लिए बने आयोगो से भी यही कहा था। उनका कहना था कि हवाई दुर्घटना के बाद भी वह नेताजी से मिले थे तो ये कैसे मान लिया जाए कि उनकी मृत्यु उस दुर्घटना में हुई थी। 
      
निजामुद्दीन 1942 में ब्रिटिश सेना में शामिल होकर सिंगापुर चले गए, लेकिन कुछ ही समय बाद वह आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गए। वह नेताजी के ड्राइवर और अंगरक्षक थे। उनका वास्तविक नाम सैफुद्दीन था, लेकिन खुफिया संगठन आइएनए में भर्ती होने के बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर निजामुद्दीन रख लिया था। वह 1969 में आजमगढ़ लौट आए। 
 
उनके परिजनों के अनुसार नेताजी के साथ कहीं जाते समय 1944 में निजामुद्दीन को बर्मा के जंगलों में गोली लग गई थी। नेताजी ने उन्हें कर्नल उपनाम दिया था। 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान वाराणसी में एक रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनसे मुलाकात की थी और उनका आशीर्वाद लिया था। (वार्ता)

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