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छत्तीसगढ़ की सियासत में बड़ा भूचाल, टीएस सिंहदेव ने पंचायत विभाग के मंत्री पद से दिया इस्तीफा

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रविवार, 17 जुलाई 2022 (00:41 IST)
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ जारी टकराव के बीच राज्य के वरिष्ठ नेता और मंत्री टीएस सिंहदेव ने शनिवार को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से इस्तीफा दे दिया। सिंहदेव हालांकि लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, बीस सूत्रीय कार्यान्वयन, वाणिज्यिक कर (जीएसटी) विभाग के मंत्री बने रहेंगे।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को इस्तीफा सौंपने से कुछ समय पहले सिंहदेव ने कहा था,मैंने पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग से इस्तीफा देने का फैसला कर लिया है। मुख्यमंत्री को जल्द ही इस्तीफा सौंप दिया जाएगा। बाद में सिंहदेव ने अपना इस्तीफा बघेल को भेज दिया। चार पृष्ठ लंबे पत्रनुमा इस इस्तीफे में जिसे सार्वजनिक भी किया गया है सिंहदेव ने सरकार के कामकाज पर असंतोष जताया है।

सिंहदेव ने इस्तीफे में कहा है, जन-घोषणा पत्र के विचारधारा के अनुरूप महत्वपूर्ण विषयों को दृष्टिगत रखते हुए, मेरा यह मत है कि विभाग के सभी लक्ष्यों को समर्पण भाव से पूर्ण करने में वर्तमान परिस्थितियों में स्वयं को असमर्थ पा रहा हूं। अतएव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के भार से मैं अपने आप को पृथक कर रहा हूं। आपने मुझे शेष जिन विभागों की जिम्मेदारी दी है उन्हें अपनी पूर्ण क्षमता और निष्ठा से निभाता रहूंगा।

सिंहदेव ने इस्तीफे में कहा है, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश के आवास विहीन लोगों को आवास बनाकर दिया जाना था, जिसके लिए मैंने कई बार आपसे चर्चा कर राशि आवंटन का अनुरोध किया था। लेकिन इस योजना में राशि उपलब्ध नहीं की जा सकी। फलस्वरूप राज्य के लगभग आठ लाख लोगों के लिए आवास नहीं बनाए जा सके।

उन्होंने कहा, मुझे दुःख है कि इस योजना का लाभ प्रदेश के आवास विहीन लोगों को नहीं मिल सका। उन्होंने विभाग और शासन के कामकाज को लेकर कहा है, किसी भी विभाग के अधीन विवेकाधीन योजनाओं के अंतर्गत कार्यों की स्वीकृति का अनुमोदन उस विभाग के मंत्री का अधिकार है, लेकिन समग्र ग्रामीण विकास योजना के अंतर्गत कार्यों की अंतिम स्वीकृति के लिए रूल्स ऑफ बिजनेस के विपरीत मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सचिवों की एक समिति गठित की गई।

उन्होंने कहा, इस पर मेरे द्वारा समय-समय पर लिखित रूप से आपत्ति दर्ज कराई गई। लेकिन अब तक व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। सिंहदेव ने आरोप लगाया है कि एक साजिश के तहत मनरेगा का कार्य करने वाले रोजगार सहायकों से हड़ताल करवाकर राज्य में मनरेगा के कार्यों को प्रभावित किया गया, जिसमें सहायक परियोजना अधिकारियों (संविदा) की भूमिका स्पष्ट रूप से निकलकर आई है।

टीएस सिंहदेव राज्य के सरगुजा क्षेत्र के अंबिकापुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। राज्य में मुख्यमंत्री पद के ढाई-ढाई वर्ष के बंटवारे की चर्चा के दौरान सिंहदेव का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा था। सिंहदेव के समर्थकों का कहना है कि आलाकमान ने उनसे ढाई वर्ष मुख्यमंत्री पद का वादा किया था। हालांकि किसी ने इस दावे की सार्वजनिक तौर पर पुष्टि नहीं की।

सिंहदेव के इस्तीफा देने के प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य की मुख्य विपक्षी भाजपा ने इसे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ‘तानाशाही’ रवैए का प्रमाण करार दिया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा है, सिंहदेव द्वारा एक विभाग छोड़ना मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की तानाशाही का प्रमाण है। मुख्यमंत्री न खुद कोई काम कर रहे हैं और न ही मंत्रियों को करने दे रहे हैं। इसी से तंग आकर मंत्री सिंहदेव ने पंचायत विभाग छोड़ दिया है।

उन्होंने कहा, सिंहदेव को स्वास्थ्य मंत्री के पद से भी इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि इस विभाग में भी उन्हें काम नहीं करने दिया जा रहा है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा है कि सिंहदेव एक ऐसे मंत्री हैं, जिन्होंने सरकार को यहां तक लाने में (कांग्रेस पार्टी की जीत में) महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी धैर्य की सीमा टूट गई है। इससे सरकार में मंत्री और मुख्यमंत्री के बीच कैसा संबंध है पता चल रहा है।

रमन सिंह ने कहा कि सरकार के वरिष्ठतम मंत्री को अपने विभाग में काम करने का अधिकार नहीं है। यह ​स्थिति सभी मंत्रियों की है। सिंहदेव ने इस्तीफा दे दिया है। अन्य मंत्री भी नाराज हैं। उन्होंने कहा, लग रहा है जैसी स्थिति महाराष्ट्र में बनी थी कि सरकार धरी रह गई और सारे लोग बगावत कर गए, वही स्थिति यहां भी बनेगी।(भाषा) 

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