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औद्योगिक हब के रूप में विकसित होगा यमुना एक्सप्रेस-वे, यूपी बना देश का सबसे भरोसेमंद निवेश गंतव्य

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हमें फॉलो करें Chief Minister Yogi Adityanath

वेबदुनिया न्यूज डेस्क

लखनऊ (उप्र) , शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 (12:31 IST)
Uttar Pradesh news : उत्तर प्रदेश सरकार यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र को निर्यात आधारित औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के सेक्टर-29 में 175 एकड़ में अपैरल पार्क विकसित किया जा रहा है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने बीते पौने नौ वर्षों में विकास की वह यात्रा तय की है, जो वर्ष 2017 से पहले कल्पना से परे थी। एक समय निवेशकों के लिए अविश्वसनीय माना जाने वाला प्रदेश आज देश का सबसे बड़ा निवेश गंतव्य बन चुका है।

यह परियोजना प्रदेश को गारमेंट इंडस्ट्री के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगी। अपैरल पार्क के विकास से महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और उनके सामाजिक, आर्थिक सशक्तिकरण को बल मिलेगा। यह परियोजना प्रदेश सरकार की औद्योगिक नीति और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप है। राज्य सरकार के ‘मेक इन यूपी’ और भारत सरकार के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियानों को भी मजबूती मिलेगी। 
 
उत्तर प्रदेश सरकार यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र को निर्यात आधारित औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के सेक्टर-29 में 175 एकड़ में अपैरल पार्क विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना प्रदेश को गारमेंट इंडस्ट्री के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगी। अपैरल पार्क के विकास से महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और उनके सामाजिक, आर्थिक सशक्तिकरण को बल मिलेगा।
यह परियोजना प्रदेश सरकार की औद्योगिक नीति और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप है। राज्य सरकार के ‘मेक इन यूपी’ और भारत सरकार के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियानों को भी मजबूती मिलेगी। एयरपोर्ट के संचालन के बाद गारमेंट उत्पादों के निर्यात को नई गति मिलेगी। दिल्ली-एनसीआर से निकटता के कारण लॉजिस्टिक्स से जुड़ी लागत कम होगी और निर्यातकों को समय पर डिलीवरी की सुविधा मिलेगी, जो निर्यातकों के लिए बहुत जरुरी है। 
 
परियोजना के अंतर्गत अपैरल पार्क में ‘कॉमन फैसिलिटी सेंटर’ विकसित किया जाएगा। इसमें डिजाइन सेंटर, ट्रेनिंग सेंटर, यूनिट टेस्टिंग लैब और क्वालिटी कंट्रोल से जुड़ी सुविधाएं शामिल होंगी। साथ ही रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) सेंटर, मार्केटिंग सपोर्ट सिस्टम आदि की भी सुविधाएं निर्यातक इकाइयों को दी जाएंगी।
 
सरकार का यह उद्देश्य और प्रयास है कि छोटे और मध्यम उद्यमों को अलग-अलग महंगे इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश न करना पड़े और वे साझा संसाधनों का उपयोग कर इसका लाभ उठा सकें। इससे उत्पादन लागत घटेगी और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। अपैरल पार्क रोजगार सृजन के मामले में भी अपनी बड़ी भूमिका निभाएगा। इस परियोजना के माध्यम से बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
सिलाई, डिजाइन पैटर्न मेकिंग, पैकेजिंग, क्वालिटी कंट्रोल और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को रोजगार के मौके मिलेंगे। यह परियोजना प्रदेश की नीति के अनुरूप है। योगी सरकार का फोकस कच्चे माल आधारित उत्पादन से आगे बढ़कर वैल्यू एडेड मैन्युफैक्चरिंग पर है। अपैरल पार्क के जरिए प्रदेश में टेक्सटाइल इंडस्ट्री की पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की योजना है। इससे किसानों, हथकरघा कारीगरों और छोटे उद्यमियों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। उत्तर प्रदेश अब निवेश और उद्योग के लिए अनुकूल वातावरण वाला प्रदेश बन गया है।
 
यह परियोजना जब अपने पूर्ण रूप में आएगी तो यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा प्राप्त होगी। प्रदेश में अब तक 15 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश वाली 16 हजार से ज्यादा परियोजनाओं का शिलान्यास हो चुका है, जिनमें से हजारों परियोजनाएं व्यावसायिक रूप से संचालित होकर लाखों युवाओं को रोजगार दे रही हैं। 
 
प्रधानमंत्री गति शक्ति मास्टर प्लान, डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर नीति, आईटी-आईटीईएस, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में किए गए सुनियोजित प्रयासों ने उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य की छवि से निकालकर भारत के औद्योगिक विकास का अगुआ बना दिया है। कानून-व्यवस्था, पारदर्शिता और समयबद्ध निर्णयों के साथ योगी सरकार ने यह साबित किया है कि उत्तर प्रदेश केवल संभावनाओं का नहीं, बल्कि संभावनाओं को परिणाम में परिवर्तित करने वाला राज्य है।
वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की पहचान कमजोर कानून-व्यवस्था, निवेशकों की उदासीनता और अधूरी परियोजनाओं से जुड़ी थी। उद्योग लगाने में वर्षों लग जाते थे, फाइलें दफ्तरों में अटकी रहती थीं और रोजगार की तलाश में युवा प्रदेश से बाहर पलायन करने को मजबूर थे। इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक पार्क और आधुनिक लॉजिस्टिक्स की कमी ने राज्य की अर्थव्यवस्था को जकड़ रखा था।
 
वर्ष 2017 में सत्ता संभालते ही योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले कानून-व्यवस्था, पारदर्शिता और गुड गवर्नेंस को प्राथमिकता दी। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’, ‘इन्वेस्ट यूपी’ और ‘निवेश सारथी’ जैसे प्लेटफॉर्म्स ने निवेशकों का भरोसा लौटाया। वर्ष 2018 की इन्वेस्टर्स समिट से शुरू हुई यह यात्रा 2023 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट तक 45 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्तावों तक पहुंची है और अब भी निरंतर जारी है। 
 
योगी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि निवेश सिर्फ एमओयू तक सीमित नहीं रहे। अब तक चार ग्राउंडब्रेकिंग समारोहों के जरिए 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली 16,000 से ज्यादा परियोजनाओं का शिलान्यास हो चुका है। इनमें 8,300 से अधिक परियोजनाओं का व्यावसायिक संचालन प्रारंभ हो चुका है, जिससे लाखों युवाओं को रोजगार मिला है।
योगी सरकार की औद्योगिक नीति ने कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित रहने के बजाय सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, लेदर, फूड प्रोसेसिंग, प्लास्टिक, परफ्यूम, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विविध क्षेत्रों को समान रूप से बढ़ावा दिया। पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क, मेगा लेदर क्लस्टर, फूड पार्क और फ्लैटेड फैक्ट्री मॉडल ने छोटे-मध्यम निवेशकों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा। आज देश के 65% से अधिक मोबाइल फोन उत्तर प्रदेश में बन रहे हैं और लखनऊ-नोएडा जैसे शहर उभरते टेक हब बन चुके हैं।
 
प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ उत्तर प्रदेश ने योजना, भूमि उपयोग और परियोजना क्रियान्वयन को एकीकृत किया। एक्सप्रेसवे-आधारित औद्योगिक क्लस्टर, मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब, ट्रांस-गंगा सिटी और ग्रेटर नोएडा निवेश क्षेत्र ने राज्य को इंफ्रास्ट्रक्चर-ड्रिवन इकोनॉमी की दिशा में अग्रसर किया। जिला स्तर तक डेटा-आधारित योजना आज उत्तर प्रदेश की पहचान बन चुकी है।
 
उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर, ब्रह्मोस इंटीग्रेशन सुविधा, अदानी डिफेंस जैसी मेगा यूनिट्स ने राज्य को राष्ट्रीय सुरक्षा उत्पादन का केंद्र बनाया। वहीं डेटा सेंटर नीति, आईटी-आईटीईएस विस्तार और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के जरिए उत्तर प्रदेश डिजिटल और नॉलेज इकानॉमी का नया हब बन रहा है। यह बदलाव केवल निवेश नहीं, बल्कि भविष्य की नौकरियों और तकनीकी नेतृत्व का आधार है।
 
बुंदेलखंड, पूर्वांचल व तराई क्षेत्रों में औद्योगिक पार्कों की स्थापना साबित करती है कि योगी सरकार का विकास मॉडल केवल पश्चिमी यूपी तक सीमित नहीं। वर्ष 2017 के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय संतुलन के साथ औद्योगिकीकरण साकार हुआ है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने यह साबित कर दिया है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, सख्त प्रशासन और स्पष्ट विजन से किसी भी राज्य की तस्वीर बदली जा सकती है। यूपी अब बीते कल की चुनौतियों में नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं में जी रहा है। एक ऐसा प्रदेश, जो भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने को तैयार है।
Edited By : Chetan Gour

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