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कही-अनकही 25 : मार कैसे खाओगी तुम?

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अनन्या मिश्रा

फिर एक त्योहार ‘खोटा’ हो गया 
 
आज थोड़ी लम्बी लेकिन बेहद ज़ख़्मी सी कहानी, ऐसी हजारों ‘एना’ की, जो मुस्कुराना भूल चुकी हैं। जिनके घरों में बेवजह क्लेश है, क्योंकि बहुओं ने अपने हक़, अधिकार और जिम्मेदारियों को भलीभांति समझ लिया है... और इसलिए घर में सभी, खासकर उनके पति, उनसे कोई बात करना तो दूर, उन्हें प्रताड़ित करने के नए तरीके खोजने में ही समय बीता देते हैं... 
 
घर में जब सामान्य दिनों में ही इतना क्लेश हो जाता है, तो ख़ास मौकों पर न हो ऐसा कैसे हो सकता है? घर में पूजा थी, और आज भी ऐसा ही कुछ माहौल था। एना से बात न करनी पड़े, इसलिए आदि दोपहर से सो रहा था। एना किराना लेने जा रही थी, लेकिन आदि के तेवर ही कुछ अलग थे।
 
‘क्या लाना है तुमको, एना? बहुत अभाव में जी रही हो मेरे साथ, है न? चैन से जी भी नहीं सकता इस घर में ।’
 
‘आदि, तुम सो जाओ, मैं ही जा रही हूँ मार्केट। इतना चिढ़ते क्यों हो तुम? बात तक नहीं करते?’
 
‘क्योंकि पसंद ही नहीं है मुझे तुमसे बात करना।’
 
‘तो मुझसे शादी क्यों की, आदि? कोई और पसंद है तो पहले बता देते। मैं चले जाती हूँ।’ कह कर एना ने मार्केट जाने के लिए अपना पर्स उठाया और दरवाज़ा खोला।
 
‘तुम कहाँ जाओगी। मैं ही चले जाता हूँ छत से कूदने।’ एना को धक्का दे कर अचानक आदि फ्लैट से बाहर निकला, जोर-जोर से गालियाँ देता हुआ और एना को कोसता हुआ सीधे छत पर चला गया।
 
एना को कुछ समझ नहीं आया । वह फिर लिफ्ट से 8वीं मंजिल तक पहुंची, तो उसने चैन की सांस ली। आदि सीढ़ियों से नीचे ही उतर रहा था ।
 
‘आदि, क्या कर रहे हो ये? आस-पड़ोस के लोग सुन रहे होंगे... तुम इतनी जोर से गालियाँ दे रहे थे। हो गया है गुस्सा या बाकी है? चलें फ्लैट वापस?’
 
‘तुमको तो बताता हूँ मैं आज। चलो तुम फ्लैट, एना।’
 
एना ने इस धमकी से डर कर तेज़ी से सीढियां उतरना शुरू किया। आदि और एना में एक फ्लोर का अंतर था। डर के मारे फ्लैट जाने की बजाए सीधे पार्किंग में जा कर बेंच पर बैठ गयी। आधा घंटा बीता और एना वहां बैठ कर सोचती रही क्या करे, क्योंकि वह सोच ही नहीं पा रही थी कि क्या यह वही आदि है जिसने दुनिया से लड़ कर एना से शादी की? क्या यह वही है जो शादी से पहले इतना ध्यान रखता था कि एना को लगा था कि इससे बेहतर पार्टनर तो हो ही नहीं सकता। क्या वो अपने घर फ़ोन करे? क्या वो आदि की बहन को फ़ोन करे? क्या वो ऑटो ले कर अपने घर चले जाए? क्या वो पड़ोसियों से मदद ले? इतने में आदि उसके पास आया और एना कांपने लगी।
 
‘यहाँ क्यों बैठी हो तुम? ऊपर चलो चुपचाप।’
 
‘आदि, मैं इतने खौफ में, इतनी स्ट्रेस में नहीं रह सकती हूँ। रोज़ की बात हो गयी है। महीनों बीत गए हैं। मुझे जाने दो। तुम मुझसे बहुत परेशान हो। मैं अकेले इतना सब नहीं संभाल पा रही हूँ। या तुम तुम्हारे हिसाब से जी लो, मैं तुम्हारी ज़िन्दगी में अब ज़रा भी हस्तक्षेप नहीं करुँगी।’
 
फ्लैट लौटने पर आदि तो बेडरूम में जा कर गालियाँ ही देता रहा, चिल्लाता रहा, कोसता रहा एना को, कि कैसे उससे शादी करने से उसकी ज़िन्दगी बर्बाद हो चुकी है। लेकिन एना दो घंटे तक डरी हुई हॉल की बालकनी के एक कोने में बैठी रही। उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि वो क्या करे। आदि का ऐसा रूप तो उसने कभी देखा ही नहीं था। उसकी आँखों में इतनी नफरत थी जैसे वो कभी भी एना पर हाथ उठा सकता था। क्या उसे घर फ़ोन करना चाहिए?
 
एना की सोच अचानक कुछ ‘धम-धम’जैसी आवाज़ों से टूटी। घबरा कर एना ने जा कर बेडरूम में देखा, तो आदि जोर-जोर से बेडरूम के दरवाज़े पर अपना सिर फोड़ रहा था। इतनी जोर से कि पूरा फ्लैट गूँज रहा था। जोर-जोर से ‘आह-आह’ बोल कर चिल्ला रहा था –जैसे किसी के वश में हो... वरना कोई खुद को इतनी जोर से क्यों मारेगा?
 
‘आदि क्या कर रहे हो... उठो आदि, लग जाएगी... आदि, सिर फट जाएगा आदि... खून आ जाएगा आदि।. प्लीज उठो ।.’
 
‘हट जा तू मेरे रास्ते से... तूने मेरी ज़िन्दगी बर्बाद कर दी है एना।.. निकल जा यहाँ से।..’
 
‘आदि उठो!’ एना ने आदि का हाथ खींचा, लेकिन आदि झटके से उठा और एना की ओर अपने हाथों का शिकंजा बना कर बढ़ा , जैसे एना का सिर दीवार पर दे मारेगा। एना डर कर पीछे हट गई। आदि चिल्लाता हुआ बाथरूम में घुस गया और अन्दर से दरवाज़ा बंद करने की कोशिश करने लगा। एना ने खुद को बाथरूम के दरवाज़े और दीवार के बीच फंसा लिया, ताकि दरवाज़ा बंद न हो। लेकिन आदि दरवाज़े को दबाने लगा। एना को छाती में दरवाज़ा चुभ रहा था, लेकिन वो हटी नहीं। वो डरी हुई थी क्योंकि आदि धमका रहा था की वो फिनाइल पी लेगा। उसकी गालियाँ और चिल्लाना बंद नहीं हुआ था। बाथरूम सारे फ्लैट के पास-पास ही थे, और ज़ाहिर था कि एक बाथरूम की आवाज़ दूसरे फ्लैट में सुनाई दे रही थी, सन्नाटा था और रात कि 11 बज रही थी।
 
‘आदि हटो, मुझे भी लग रही है । मत करो प्लीज, जैसा बोलोगे वैसा कर दूँगी । प्लीज बाहर आ जाओ ।’
 
‘चली जा यहाँ से तू। तूने ज़िन्दगी नर्क बना दी मेरी एना...’
 
‘जा ही तो रही थी मैं आदि... तुम ही छत से कूदने चले गए...’
 
‘तो मरने देती न, क्यों आई पीछे? तूने जैसे भी कोई रास्ता नहीं छोड़ा मेरे लिए मरने के अलावा...’
 
‘तुम बाहर आओ आदि ..’
 
आदि बाहर आया और बिस्तर पर लेट गया। एना डर कर फिर से हॉल में चले गयी। क्या उसे ऐसी ज़िन्दगी चाहिए जहाँ कोई उससे इतना परेशान हो कि मरने चला जाए? उसका ध्यान फिर से ‘धम-धम’ की आवाज़ की और गया। बेडरूम में आदि अब ज़मीन पर साष्टांग लेटा हुआ अपना सिर ज़मीन पर मार रहा था ।
 
‘आदि बंद करो ये सब और मेरी बात सुनो । मुझे बात करनी है हमारे दोनों के घर पर। मैं साथ नहीं रह सकती अब। मेरी वजह से मैं किसी को इतना परेशान नहीं देख सकती। तुम सोच कर बता दो, तुम खुद तुम्हारे घर बात करोगे या मैं दोनों घर पर बात कर लूं?’कह कर एना बाहर आ गयी ।
 
एक ओर एना समझ नहीं पा रही थी कि हुआ क्या है, आदि ऐसा कैसे हो गया, किसे फ़ोन करे, फ़ोन करने के बाद बोलेगी क्या... और दूसरी ओर आदि जोर-जोर से चिल्ला रहा था । इतने शोर, इतने स्ट्रेस से एना को चक्कर आ गए, माइग्रेन अटैक आया और एना बेहोश हो गई ।
 
अगले दिन सुबह हिम्मत कर उठी, तैयार हुई, ऑफिस चले गयी । शाम को लौटी और बिना एक शब्द कहे सो गई । तीन दिन तक दोनों में कोई बात तक नहीं हुई । रविवार के दिन सुबह उठी तो आदि किचन में ब्रेड सेंक रहा था । एना को ब्रेड-बटर पसंद था , ये वो जानता था ।
 
‘क्या कर रहे हो तुम आदि? छोड़ दो मैं सेंक दूँगी ।’
 
‘तुम्हारे लिए बेड-ब्रेकफास्ट बना रहा हूँ ।’
 
‘इसकी कोई ज़रूरत ही नहीं है ।’
 
‘तो किसकी ज़रूरत है ये बता दो तुम । वो कर दूंगा ।’
 
‘कुछ मत करो आदि, पहले ही काफी कुछ कर चुके हो ।’
 
‘मेरी तो कोई गलती नहीं है एना, तुमने और कोई चारा ही नहीं छोड़ा। मैं ऑफिस से परेशान, घर से परेशान, और तुम ज़रा भी अंडरस्टैंडिंग नहीं हो। इंसान अपना सिर नहीं फोड़ेगा तो क्या करेगा? गलियां नहीं देगा तो क्या भजन गायेगा? सब के लिए ज़िम्मेदार तो तुम ही हो , एना। तुम मेरे ज़रा से गुस्से से बेहोश हो गई, मार कैसे खाओगी तुम? ख़ुशी मनाओ कि खुद को ही मारा मैंने, कम से कम अभी तुम पर तो हाथ नहीं उठाया। मैं पागल नहीं हूँ जो तुम्हारे माँ-बाप के इसी शहर में होते हुए मैं तुम पर हाथ उठाऊँ... वो तो मुझे छोड़ेंगे ही नहीं फिर । हाहाहा... ’ बोल कर आदि हंसने लगा ।
 
एना वहीं फटी-फटी आँखों से उसे देखती रही । सोचती रही कि क्या अगर उसके माँ-पिता इसी शहर में नहीं होते, तो आदि उसे मारता? क्या उसने जो किया क्या वो एना को मारने से कम था? क्या एना को ‘एहसान’ मानना चाहिए कि कम से कम आदि ने उसे ‘शारीरिक रूप से’ नहीं मारा? क्या आदि इतना ‘मेंटली डिस्टर्ब’ था कि एना को इतना चोट पहुँचाना उसकी आदत में शुमार था? क्या आदि ने इसीलिए एना से शादी की थी क्योंकि वह चुप रह कर सब सहन कर लेती थी-

और क्या यही आदि के लिए ‘अंडरस्टैंडिंग’ होने की परिभाषा थी? क्या महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार करना उसके घर में आम था? या पढ़े-लिखे होने के बावजूद भी वह स्त्री को हमेशा खुद से नीचले ओहदे पर देखने का ‘आदि’ था? कुछ ऐसे ही ख्यालों में, एना का फिर एक त्योहार ‘खोटा’ हो गया।

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