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गुरु पूर्णिमा से मध्यप्रदेश के 'नर्मदापुरम्' में प्रारंभ होगा 84 दिवसीय जनकल्याणार्थ महायज्ञ

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Guru Purnima 2025
हमारी वैदिक परम्परा में यज्ञ को भगवान विष्णु का रूप माना गया है। हमारे सनातन धर्म के प्रत्येक कार्य की पूर्णाहुति बिना हवन के अपूर्ण मानी जाती है। यज्ञ से ना केवल साधक की आध्यात्मिक उर्जा में वृद्धि होती है अपितु इससे उठने और चहुंओर फैलने वाले धूम्र (धुएं) से पर्यावरण की भी शुद्धि होती है। पूर्ण शुचिता एवं सात्विक उद्देश्य से सम्पन्न किए यज्ञ में जनकल्याण के साथ-साथ संपूर्ण विश्व का कल्याण निहित होता है। 
 
ऐसा ही जनकल्याणार्थ महायज्ञ मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से 75 किमी. दूर स्थित पवित्र पावन मां नर्मदा के तट पर बसे 'नर्मदापुरम्' नगर में होने जा रहा है। इस आयोजन से जुड़े ज्योतिषाचार्य पं हेमन्त रिछारिया ने बताया कि इस महायज्ञ का आयोजन श्री धूनीवाले दादाजी के कृपापात्र सेवक संत श्री दादाजी शिवानन्द महाराज द्वारा किया जा रहा है। 
 
बाबा शिवानन्द जी महाराज अखंड परिक्रमावासी हैं, जो अपना आगामी चातुर्मास मां नर्मदा के तट पर स्थित नर्मदापुरम् नगर में व्यतीत करेंगे। दादाजी शिवानन्द महाराज श्री धूनीवाले दादाजी, दादाजी दरबार (खण्डवा) की परम्परा के सिद्ध संत हैं, जो बाल्यकाल से ही आध्यात्मिक साधना में रत हैं। 

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बाबाजी के अनुसार दिनांक 10 जुलाई 2025, गुरु पूर्णिमा से प्रारंभ होने वाला यह जनकल्याणार्थ महायज्ञ लगभ 84 दिनों तक चलेगा, जिसमें दादाजी का दरबार स्थापित होगा। दादाजी दरबार में प्रतिदिन आरती, हवन एवं अग्निहोत्र होगा। संपूर्ण आयोजन में दरबार के समक्ष 5100 दीपों की अखंड ज्योति की स्थापना होगी। प्रतिदिन नर्मदेश्वर महादेव का अभिषेक, पूजन, आरती एवं मां नर्मदा का पूजन-अर्चन होगा। आयोजन में पधारे सभी भक्तों को प्रतिदिन भंडारा प्रसादी का निशुल्क वितरण किया जाएगा। 
 
इस महायज्ञ के उद्देश्य के बारे में बताते हुए बाबाजी कहते हैं कि 'हम तो केवल निमित्त मात्र हैं, सारी योजना तो दादाजी श्री धूनीवाले ही बनाते हैं। उनकी ही कृपा से ऐसा परम वैभवशाली आयोजन सम्पन्न हो पाना सम्भव है। जहां तक इस महायज्ञ के उद्देश्य का प्रश्न है तो यह किसी व्यक्तिगत कामना से परे विशुद्ध जन-कल्याण एवं विश्व कल्याण हेतु किया जा रहा है।' 
 
आयोजन के बारे में ज्योतिषाचार्य पं रिछारिया का कहना है कि यह नर्मदापुरम् क्षेत्र के निवासियों व साधकों के लिए परम सौभाग्य की बात है कि इतने सिद्ध संत का चातुर्मास हमारे नगर में नर्मदा तट पर होगा। दादाजी श्री शिवानन्द महाराज के सानिध्य एवं इस महायज्ञ के आयोजन से आम जनमानस के आध्यात्मिक संस्कारों में वृद्धि होगी और वे इस पुनीत कर्म में अपनी श्रद्धा रूपी आहुति देकर पुण्यलाभ अर्जित करेंगे।

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