Publish Date: Thu, 30 Oct 2025 (09:05 IST)
Updated Date: Thu, 30 Oct 2025 (09:43 IST)
Akshaya Navami Significance: आंवला नवमी, जिसे अक्षय नवमी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाने वाला एक अत्यंत पवित्र पर्व है। 'अक्षय' का अर्थ है 'जिसका कभी क्षय न हो', और इसी कारण इस दिन किए गए किसी भी शुभ कार्य, दान, या पूजा का पुण्य कभी समाप्त नहीं होता और कई जन्मों तक उसका फल प्राप्त होता है।
ALSO READ: Amla Navami: आंवला नवमी पर करें ये 7 विशेष उपाय, मिलेंगे अनगिनत फायदे
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आंवले के वृक्ष को भगवान विष्णु का निवास स्थान माना जाता है और यह भगवान शिव को भी प्रिय है। पौराणिक ग्रंथों में इस दिन को द्वापर युग का आरंभ दिवस भी माना गया है, जो इसकी पवित्रता और महत्ता को और बढ़ाता है।
यहां जानें आंवला नवमी के 9 दिलचस्प तथ्य:
1. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन आंवला नवमी का पर्व मनाते हैं।
2. इसे अक्षय नवमी भी कहते हैं। 'अक्षय' का अर्थ होता है जो कभी खत्म न हो।
3. इस दिन किए गए दान-पुण्य, पूजा-पाठ और शुभ कार्यों का फल अक्षय होता है।
4. आंवला नवमी विशेष रूप से आंवले के पेड़ की पूजा, व्रत और परिवार की समृद्धि की कामना के लिए मनाई जाती है।
5. यह माना जाता है कि कार्तिक मास की नवमी से पूर्णिमा तक भगवान विष्णु आंवले के पेड़ में वास करते हैं।
6. इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे भोजन पकाना, भगवान को भोग लगाना और प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
7. एक पौराणिक कथा के अनुसार, देवी लक्ष्मी ने आंवले के पेड़ के नीचे भोजन तैयार करके भगवान विष्णु तथा शिव जो खिलाया था तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
8. आंवला नवमी के शुभ अवसर पर मथुरा-वृन्दावन की परिक्रमा का भी विशेष महत्व है। श्रद्धालु अक्षय पुण्य अर्जित करने के लिए परिक्रमा करते हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।