shiv chalisa

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love relation पर मार्मिक कविता : रिश्ते

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poetry on love
जब हम और तुम मिले थे
नहीं था अपेक्षाओं का रिश्ता
नहीं था मैं बड़ा
तुम छोटे का भाव
फिर अपेक्षाओं का
विनिमय शुरू हुआ
मेरे प्रति तुम्हारा उधार
तुम्हारे सिर पर मेरा उधार
हम गिनते गए अहसान
और भारी होता गया उधार
शिकवों की रेत इकठ्ठा होती गई
रिश्तों का पानी सूखता गया
इस किनारे तुम
उस किनारे हम
बैठें हैं अपने उधार के साथ
तलाशते एक सोता रिश्ते का।
 
(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)

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