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UP Election: जिसका हस्तिनापुर उसका उत्तर प्रदेश

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हिमा अग्रवाल

शुक्रवार, 14 जनवरी 2022 (21:25 IST)
मेरठ। हस्तिनापुर का सिंहासन भले ही अब अतीत के गर्त में जा चुका हो, लेकिन यहां की विधानसभा सीट अब भी सबका ध्यान केंद्रित किए हुए है। मेरठ जिले की इस विधानसभा सीट पर जो विजय पताका लहराता है, सरकार उसी पार्टी की बनती है। इस मिथ को राजनीतिक दल इतना महत्व देते हैं कि चुनावी बिसात बहुत सोच-समझ कर बिछाते हैं और जीत के लिए पूरा दम-खम लगा देते हैं। इस बार यहां मतदान प्रथम चरण में आगामी 10 फरवरी को होना है। 
 
यूं तो मेरठ की सभी 7 सीटें अपनी विशिष्ट पहचान रखती हैं, लेकिन हस्तिनापुर आज तक द्रौपदी के श्राप को झेलते हुए बदहाल है। मान्यता के मुताबिक करीब 5 हजार साल पहले कौरव और पांडवों के बीच द्यूत क्रीड़ा हुई थी, जिसमें धर्मराज युधिष्ठर ने खेल के दौरान द्रौपदी को दांव पर लगा दिया और हार गए। परिणामस्वरूप कौरवों ने द्रौपदी को जीत लिया।
 
कौरवों ने जीत के बाद द्रौपदी का भरे राजभवन में बालों से घसीटकर चीरहरण किया। कृष्ण ने उनकी लाज बचाई। इस दौरान द्रौपदी ने श्राप दिया कि हस्तिनापुर कभी भी आबाद नहीं होगा क्योंकि हस्तिनापुर में एक नारी का अपमान किया गया है, इसलिए हस्तिनापुर हमेशा बदहाली झेलेगा। लोगों को विश्वास है कि द्रौपदी के श्राप से हस्तिनापुर कभी मुक्त नहीं हुआ।

हस्तिनापुर सीट पर भारतीय जनता पार्टी दो बार अपना भगवा फहरा चुकी है। 1994 में भाजपा के गोपाल काली के बाद हस्तिनापुर की जनता ने 2017 में मोदी लहर के चलते भाजपा के दिनेश खटीक 30 हजार वोटों से विजयी हुए। दिनेश खटीक ने 99,436 वोट पाए, जबकि पीस पार्टी से लड़े पूर्व विधायक योगेश वर्मा को 63374 वोट मिले और सपा से पूर्व मंत्री प्रभुदयाल वाल्मीकि 48979 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे।
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हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक को सरकार के पांच साल पूरे होने से पहले ही योगी सरकार ने उन्हें मंत्री बना दिया। दिनेश खटीक पर भाजपा को पूरा भरोसा है कि वह 2022 में फिर से इस सीट पर विजय हासिल करेंगे, जिसके चलते उनका हस्तिनापुर से टिकट पक्का माना जा रहा है। 2012 के चुनावों में सपा सरकार में हस्तिनापुर विधानसभा सीट से प्रभुदयाल वाल्मीकि जीते और अखिलेश यादव ने उन्हें मंत्री पद बैठा दिया।
 
हस्तिनापुर की जनता ने 2017 के चुनाव में प्रभुदयाल वाल्मीकि के मंत्री पद का लिहाज भी नही रखा और उन्हें हरा दिया। इस बार भाजपा के विधायक दिनेश खटीक जो मंत्री पद पर सुशोभित हैं, वह भी मंत्री पद की लाज बचा पाते हैं या नही यह तो चुनाव परिणाम बताएंगे, लेकिन हस्तिनापुर के बुजुर्ग कहते हैं कि यहां से एक पार्टी का विधायक दोबारा नही चुना गया है।

हस्तिनापुर विधानसभा रिजर्व सीट है। यहां वर्तमान में 3 लाख 42 हजार 314 वोटर हैं। जिसमें पुरुष मतदाता 1 लाख 87 हजार 884, महिला मतदाता 1 लाख 54 हजार 407 और थर्ड जेंडर 23 मतदाता हैं। 2017  विधानसभा चुनाव में 3 लाख 36 हजार के करीब मतदाता थे। इस सीट पर करीब एक लाख मुस्लिम वोटर हैं, जो सबसे ज्यादा हैं।
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दूसरे नंबर पर एससी/एसटी हैं, जिनकी संख्या 63 हजार है। गुर्जर वोटर की संख्या 56 हजार है। जाट 26 हजार, सिख 13 हजार, यादव 10 हजार, वाल्मीकि 8 हजार वोटर हैं। ब्राह्मण 7 हजार हैं। अन्य वोटों में सैनी, कश्यप, धीमर, खटीक, प्रजापति, गिरी हैं। भले ही यह सीट SC  कोटे के लिए आरक्षित हैं, लेकिन यहां मुस्लिम वोटों की संख्या सबसे अधिक है।

मोदी की लहर के चलते 2017 में भारतीय जनता पार्टी ने हस्तिनापुर सीट पर जीत का परचम फहराया और यहां से दिनेश खटीक विधायक बने तो भाजपा की सरकार यूपी में बनी। सन 2012 में समाजवादी पार्टी के प्रभुदयाल वाल्मीकि को जनता का खुले दिल से स्नेह मिला और वह जीते, तो यूपी में सपा सरकार बनी और अखिलेश यादव सीएम बने।
 
वर्ष 2007 में बसपा से योगेश वर्मा ने विजय हासिल की तो उत्तर प्रदेश के सिंहासन पर बसपा सुप्रीमो मायावती मुख्यमंत्री बैठीं। लेकिन, 2012 में बसपा से योगेश शर्मा का बहनजी ने टिकट काट दिया और वह बागी हो गए और उन्होंने पीस पार्टी से चुनाव लड़ा और बसपा इस चुनाव में सत्ता गंवा बैठी। साल 2002 में सपा के प्रभुदयाल वाल्मीकि ने जीत दिलवाकर मुलायम सिंह को मुख्यमंत्री की गद्दी दिलवाई थी। इस बार सपा और रालोद का गठबंधन है, दोनों युवा नेता भरपूर कोशिश करेंगे कि इस सीट को जीतें।
 
वहीं योगी आदित्यनाथ महिला सुरक्षा और हिंदूवाद की दुहाई देकर मतदाताओं को रिझाने का प्रयास करेंगे। अब देखना होगा मुस्लिम बाहुल्य विधानसभा में क्या एक बार फिर से भाजपा का कमल खिलेगा या तख्ता पलट जाएगा।
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हस्तिनापुर की प्रमुख समस्याएं : राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (National Sample Survey Office) की रिपोर्ट बताती है कि बेरोजगारी की दर में मेरठ 8.5% के हिसाब से देश में दूसरे नम्बर पर है। ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर और जैन धर्म का प्रमुख केंद्र होने के बाद भी यहां पर्यटन को बढ़ावा नहीं दिया गया है। इस क्षेत्र की प्रमुख फसलों में गन्ना और धान हैं। चीनी मिलें ही जीविका का सबसे बड़ा माध्यम हैं। स्वास्थ्य सेवाओं का हाल भी अच्छा नहीं है, यहां CHC-PHC तो जरूर हैं, लेकिन उनमें डॉक्टरों की काफी कमी है। 
 
हस्तिनापुर सीट से विजयी रहे विधायक  : 2017- दिनेश खटीक, भाजपा- योगी आदित्यनाथ, 2012- प्रभुदयाल वाल्मीकि, सपा- अखिलेश यादव, 2007 – योगेश वर्मा, बसपा- मायावती, 2002- प्रभुदयाल वाल्मीकि, सपा- मुलयाम सिंह यादव, 1996- अतुल कुमार निर्दलीय, 1994- गोपाल काली, भाजपा, 1989- झग्गर सिंह, जनता दल- मुलायम सिंह, 1985- हरशरण सिंह- कांग्रेस- वीर बहादुर सिंह, 1980- झग्गर सिंह, कांग्रेस- एनडी तिवारी, 1977- रेवती शरण मौर्य, जनता पार्टी- रामनरेश यादव, 1974- रेवती शरण मौर्य, कांग्रेस- हेमवती नंदन बहुगुणा, 1969- आशाराम इंदू, भारतीय क्रांति दल, 1967- रामजी लाल सहायक, कांग्रेस- चंद्रभान गुप्ता, 1962- प्रीतम सिंह कांग्रेस।

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