Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

वर्ष 2030 तक 2 गीगावाट अतिरिक्त डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य लेकर काम करें : योगी आदित्यनाथ

Advertiesment
Chief Minister Yogi Adityanath's directives regarding additional data center capacity
- शीघ्र आएगी प्रदेश की नई डेटा सेंटर नीति, पहले से अधिक आकर्षक, प्रतिस्पर्धी और निवेशक अनुकूल होगी नई नीति
- प्रदेश में डेटा सेंटर के लिए 21,342 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव स्वीकृत, 644 मेगावाट क्षमता पर कार्य जारी
- डेटा, एआई और डिजिटल अवसंरचना भविष्य की अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार
- एआई आधारित कम्प्यूटिंग और ग्रीन डेटा सेंटर को मिलेगा विशेष प्रोत्साहन
Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2030 तक उत्तर प्रदेश में 2 गीगावाट से अधिक अतिरिक्त डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि डेटा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल अवसंरचना भविष्य की अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश को इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए अभी से ठोस तैयारी करनी होगी।
 
रविवार को उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2021 की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निवेशकों की अपेक्षाओं के अनुरूप अधिक आकर्षक, व्यावहारिक और समयानुकूल नई नीति तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नीति में एआई आधारित डेटा सेंटर, ऊर्जा दक्ष एवं पर्यावरण अनुकूल ग्रीन डेटा सेंटर, विश्वस्तरीय डिजिटल अवसंरचना, त्वरित अनुमोदन प्रणाली, निर्बाध विद्युत आपूर्ति तथा बेहतर कनेक्टिविटी जैसे विषयों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि उत्तर प्रदेश देश में डेटा सेंटर निवेश का सबसे पसंदीदा केंद्र बन सके।
 
प्रमुख सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि वर्ष 2026 तक देश की कुल डेटा सेंटर क्षमता में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 8 से 9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि डेटा सेंटर नीति-2021 के तहत 900 मेगावाट क्षमता विकसित करने तथा 30 हजार करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया था। इसके सापेक्ष अब तक 21,342.90 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव स्वीकृत किए जा चुके हैं और निवेशकों को लेटर ऑफ कंफर्ट भी जारी किए गए हैं। वर्तमान में प्रदेश में छह डेटा सेंटर पार्क और दो डेटा सेंटर इकाइयां संचालित हैं, जबकि 644 मेगावाट की प्रतिबद्ध क्षमता पर कार्य प्रगति पर है।
 
नई डेटा सेंटर नीति के विभिन्न प्रावधानों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि, पूंजी और ऋण संबंधी अनुदानों के साथ-साथ स्टाम्प शुल्क, विद्युत शुल्क तथा ट्रांसमिशन एवं व्हीलिंग शुल्क में दी जाने वाली रियायतों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने एआई आधारित उच्च क्षमता वाली कम्प्यूटिंग अवसंरचना को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन व्यवस्था विकसित करने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्धारित मानकों के अनुरूप उन्नत एआई कम्प्यूट संसाधन स्थापित करने वाले डेटा सेंटर पार्कों को अतिरिक्त सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए, जिससे प्रदेश में एआई आधारित डिजिटल अवसंरचना के विकास को बल मिलेगा।
 
मुख्यमंत्री ने डेटा सेंटर क्षेत्र में हरित और टिकाऊ विकास को विशेष महत्व देते हुए कहा कि उच्च स्तर का ग्रीन डेटा सेंटर प्रमाणन प्राप्त करने वाली इकाइयों और पार्कों को अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
 
बैठक में अधिकारियों ने प्रदेश में संचालित परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि हीरानंदानी समूह, एनटीटी ग्लोबल डेटा सेंटर्स, अडानी समूह, एसटी टेलीमीडिया, एसकेवीआर सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस, वेब वर्क्स तथा सिफी सहित कई प्रमुख कंपनियों की परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में बड़े स्तर पर डिजिटल अवसंरचना का विकास हो रहा है।
 
बैठक में संभावित निवेश प्रस्तावों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने प्रदेश में कुल 5,410 मेगावाट क्षमता के डेटा सेंटर विकसित करने में रुचि दिखाई है। इन परियोजनाओं में लगभग 4.90 लाख करोड़ रुपए के संभावित निवेश का अनुमान है।

प्रस्तावित निवेशों में एएम ग्रीन, ट्राइफैक्टा कॉनेक्स, एस्सार, ग्रू एनर्जी, गोल्डन स्टेट कैपिटल, मैपलेट्री, सीटीआरएल-एस, एनएक्स्ट्रा सहित अन्य प्रमुख निवेशकों की परियोजनाएं शामिल हैं। इनके लिए नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र, लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ और सीतापुर समेत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में संभावनाएं विकसित की जा रही हैं।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि डेटा सेंटर विकास को केवल एनसीआर तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। प्रदेश के अन्य उपयुक्त शहरों और क्षेत्रों में भी डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित किए जाएं, ताकि डिजिटल निवेश और रोजगार के अवसरों का लाभ प्रदेश के अधिकाधिक हिस्सों तक पहुंच सके।
Edited By : Chetan Gour

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

मुंद्रा पोर्ट पर ATS की बड़ी कार्रवाई, पाकिस्तान से आए जहाज को रोककर गहन जांच शुरू