सबरीमाला फैसले के बाद भगवान अयप्पा नाराज, पूर्व CJI दीपक मिश्रा लकवाग्रस्त.. जानिए वायरल तस्वीर का सच..

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को एंट्री देने का फैसला सुनाया है। कई लोग इस फैसले से नाराज हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक लगवाग्रस्त शख्स की तस्वीर शेयर कर दावा किया जा रहा है कि सबरीमाला मंदिर पर यह फैसला सुनाने की वजह से भगवान अयप्पा का क्रोध झेल रहे दीपक मिश्रा को लकवा मार गया है।

तस्वीर के साथ जो संदेश है वह अंग्रेजी में लिखा है, जिसका अनुवाद है - यह दीपक मिश्रा हैं, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस, जिन्होंने 3 हफ्ते पहले सबरीमाला में महिलाओं की एंट्री वाला फैसला दिया था। यह वाकई चौंकाने वाला है। भगवान अयप्पा के श्राप के कारण इनके शरीर का एक हिस्सा अब लकवाग्रस्त है। यह केरल के सीएम पिनाराई विजयन के लिए सबक होना चाहिए, जो सबरीमाला फैसले को लागू करने की बहुत कोशिश कर रहे हैं। भगवान से मत उलझो! जय श्री राम’।

क्या है सच्चाई..

वैसे तो अधिकतर लोग इस तस्वीर को देखकर पहचान जाएंगे कि यह शख्स कौन हैं। लेकिन अगर पहचान नहीं पा रहे हैं, तो हम आपको बता देते हैं कि यह तस्वीर महान भौतिकविज्ञानी प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग की है, जिनका निधन इसकी साल 14 मार्च को हुआ है।

आपको बता दें कि 1963 में स्टीफन हॉकिंग जब महज 21 साल के थे, तब उन्हें मोटर न्यूरॉन नाम की खतरनाक बीमारी हो गई थी। इसकी वजह से उनके अधिकतर अंगों ने धीरे-धीरे काम करना बंद कर दिया था और वह वीलचेयर पर आ गए थे।

आपकी तसल्ली के लिए पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की भी तस्वीर शेयर किए देते हैं..

दरअसल, Anoop Kumar Niravuparambi नाम के फेसबुक यूजर ने व्यंग्य करते हुए कई फेसबुक ग्रुप्स में यह तस्वीर पोस्ट किए थे, जिन्हें कुछ लोग सच मान बैठे और शेयर करने लगे।

‘Drunk Journalist’ नाम के फेसबुक पेज ने जब उनका पोस्ट शेयर करते हुए लिखा- ‘दीपक मिश्रा इसी के लायक हैं’, तो अनूप ने यह पोस्ट जिस कैप्शन के साथ शेयर किया, उससे स्पष्ट हो गया कि जब लोग उनके व्यंग्यात्मक पोस्ट को सच मान बैठते हैं तो उन्हें खुशी मिलती है।

स्टीफन हॉकिंग की तस्वीर का इस्तेमाल करने वाला असली पोस्ट मलयालम में किया गया है, और इसमें लिखा गया है- ‘सबरीमाला पर फैसला सुनाने वाले न्यायाधीशों में से एक जज परिपूर्ण राव आंशिक रूप से लकवाग्रस्त हो गए हैं। भगवान अयप्पा ने उन्हें यह आदेश सुनाने के लिए सजा देने का फैसला किया है’।

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