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Year Ender 2021: कोरोना से लेकर ड्रग्स तक 10 मामलों ने बढ़ाई महाराष्ट्र सरकार की मुश्किल

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, सोमवार, 20 दिसंबर 2021 (18:39 IST)
मुंबई। महाराष्ट्र में शिवसेना-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-कांग्रेस की गठबंधन सरकार ने इस साल कुछ मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच कोरोना वायरस महामारी, ड्रग्स मामले के साथ ही भाजपा के राजनीतिक हमलों का सामना किया। इन 10 मामलों ने बढ़ाई महाराष्‍ट्र सरकार की मुश्किलें...
 
1. मंत्रियों के इस्तीफे : अनिल देशमुख ने अप्रैल में गृह मंत्री के पद से उस समय इस्तीफा दे दिया था जब मुंबई के तत्कालीन पुलिस प्रमुख परमबीर सिंह ने दावा किया कि राकांपा नेता ने पुलिस अधिकारी सचिन वाजे से शहर में बार, रेस्त्रां तथा अन्य प्रतिष्ठानों से हर महीने 100 करोड़ रुपए की वसूली करने को कहा था। शिवसेना नेता संजय राठौड़ ने पुणे में एक महिला की मौत से कथित संबंधों को लेकर जांच के घेरे में आने के बाद फरवरी में मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था।
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2. सचिन वाझे मामला : राज्य में इस साल की शुरुआत कारोबारी मनसुख हिरेन की फरवरी में सनसनीखेज हत्या के साथ हुई थी जिनकी कार उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित आवास एंटीलिया के सामने खड़ी मिली थी जिसमें विस्फोटक और एक धमकी भरा पत्र रखा हुआ था। कुछ दिन बाद हिरेन का शव ठाणे के मुंब्रा क्रीक में मिला था। इस मामले के संबंध में गिरफ्तार किए गए लोगों में वाजे भी शामिल है।
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3. NCB, नवाब मलिक और ड्रग्स मामला : NCB द्वारा मादक पदार्थ के एक मामले में बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की गिरफ्तारी ने राजनीतिक घमासान पैदा कर दिया था। राकांपा के मंत्री नवाब मलिक ने एनसीबी अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ कई आरोप लगाए।
 
आर्यन पर मादक पदार्थ लेने और उसका वितरण करने का आरोप है। बहरहाल, एजेंसी अदालत में आरोपों को साबित करने में नाकाम रही और आर्यन को जेल में 26 दिन बिताने के बाद जमानत दे दी गई। बाद में आर्यन को एनसीबी कार्यालय में हर शुक्रवार को पेश होने की अनिवार्यता से भी छूट दे दी गई। मलिक ने एनसीबी के मंडल निदेशक वानखेड़े पर फिरौती के लिए आर्यन का अपहरण करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वानखेड़े ने अनुसूचित जाति के आरक्षण के तहत नौकरी हासिल करने के लिए फर्जी जाति प्रमाणपत्र दिया।
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4. फेल हुआ ममता का दांव : इस महीने की शुरुआत में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मुंबई दौरा भी काफी चर्चा में रहा। बनर्जी ने राकांपा अध्यक्ष शरद पवार से मुलाकात के बाद कहा कि संप्रग क्या है? अब कोई संप्रग नहीं है। हम एक साथ मिलकर इस पर फैसला करेंगे।
 
हालांकि, पवार ने इस पर सधा हुआ रुख अपनाते हुए कहा कि किसी को भी बाहर रखने का कोई सवाल नहीं है। जो भी भाजपा के खिलाफ है उनका हमारे साथ आने के लिए स्वागत है। अहम बात सभी को एक साथ लेकर चलना है। वहीं, मुंबई में बनर्जी से मुलाकात करने वाले शिवसेना सांसद संजय राउत ने बाद में दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की थी।
 
5. कोरोना की दूसरी लहर : कोरोना वायरस की दूसरी लहर राज्य के लिए सिरदर्द साबित हुई। देश में कोरोना के सबसे ज्यादा मामले महाराष्‍ट्र में ही दर्ज किए गए। साल के अंत में कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रोन का भी सबसे ज्यादा असर महाराष्ट्र में ही दिखाई दे रहा है। BMC लोगों ने क्रिस्मस और न्यू ईयर घर पर ही मनाने की अपील की है। कांग्रेस सांसद राजीव सातव समेत कई दिग्गजों को कोरोना ने हमसे छीन लिया।
 
6. राष्‍ट्रीय स्तर पर बढ़ी भाजपा नेताओं की ताकत : इस साल पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे को अन्य भाजपा नेताओं भारती पवार, भागवत कराड और कपिल पाटिल के साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिली। भाजपा नेता विनोद तावड़े को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बना दिया गया।
 
7. नारायण राणे के बयान पर बवाल : राणे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को थप्पड़ मारने वाली अपनी टिप्पणियों को लेकर विवाद खड़ा कर दिया था। राणे ने कहा था, यह शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री आजादी का वर्ष नहीं जानते हैं। वह अपने भाषण के दौरान आजादी के वर्षों की गिनती के बारे में पूछने के लिए पीछे मुड़े थे। अगर मैं वहां होता तो मैं उन्हें कसकर एक थप्पड़ लगाता। राणे को उनकी विवादित टिप्पणी के लिए गिरफ्तार कर लिया गया और शिवसेना तथा भाजपा कार्यकर्ताओं की राज्य के कई स्थानों पर झड़पें हुईं।
 
8. बाबा साहब पुरंदरे का निधन : ख्‍यात इतिहासकार बाबा साहब पुरंदरे 15 नवंबर को निधन हो गया।  छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास जन-जन तक पहुंचाने के लिए बाबा साहेब को पद्म विभूषण से भी नवाजा गया था। 
 
महाराष्ट्र में सबसे लंबे वक्त तक विधायक रहे गणपतराव देशमुख का 31 जुलाई को सोलापुर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 1962 से 11 बार सोलापुर जिले की संगोला सीट से विधायक रहे और 54 वर्षों तक राज्य में विधायक रहे।
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9. अमित शाह का बड़ा हमला : अब जब यह साल अपने अंतिम चरण में है तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 19 दिसंबर को पुणे में राज्य की महा विकास आघाडी सरकार की तुलना एक ऑटो रिक्शा से की। उन्होंने कहा कि ऑटो रिक्शा के तीन पहिए (तीन दल) अलग-अलग दिशा में होते हैं और पंक्चर होने पर वे आगे नहीं बढ़ सकते। यह केवल धुआं करता है और प्रदूषण बढ़ाता है। शिवसेना पर निशाना साधते हुए शाह ने उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली पार्टी पर महज मुख्यमंत्री बनने के लिए हिंदुत्व से समझौता करने का आरोप लगाया।
 
10. बाढ़, तूफान, आरक्षण और हड़ताल : महाराष्‍ट्र ने 2021 में चक्रवात ताउते के साथ ही कोंकण की बाढ़ का भी सामना किया। 28 अक्टूबर से लगातार हड़ताल कर रहे कर्मचारियों की वजह से एमएसआरटीसी की बस सेवा प्रभावित हो रही है। हड़ताल में शामिल होने वाले हजारों कर्मचारियों को अभी तक निलंबित किया जा चुका है जबकि कई कर्मचारियों को बर्खास्त भी किया गया। ओबीसी और मराठा आरक्षण गतिरोध से भी लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।

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