गर्मी में ठंडक का अहसास जरूरी है अन्यथा तेज धूप से हमारी त्वचा सुखी और चेहरा मुरझाया सा लगेगा। पानी की कमी से जहाँ गला व होंठ सूखने लगता है वहीं पानी व नमक की कमी होने से डी-हाइड्रेशन भी हो सकता है। इस सबके कारण बेचैनी, घबराहट, सुस्तपन और उल्टी-दस्त आदि गर्मी से संबंधित रोग बढ़ जाते हैं। तो इससे बचने के लिए जानें कुछ योगा टिप्स।
प्राणायाम करें : शीतली और शीतकारी प्राणायाम आपके शरीर को ठंडा बनाए रखने में सक्षम है। आप इसे कभी भी, कहीं भी कर सकते हैं। बस ध्यान रखें कि जहाँ भी कर रहे हैं वहाँ की वायु शुद्ध हो। इससे शरीर में भरपूर ऑक्सीजन का संचार होगा। फेफड़े और पेट में किसी भी प्रकार की गर्मी नहीं रहेगी।
*शीतली : इसमें मुख खोलकर जुबान की नाली बनाकर नाली के द्वारा श्वास धीरे-धीरे लय में अंदर खींचे फिर मुख बंद कर कुछ देर तक श्वास अंदर रोके रखने के बाद नाक से निकाल दें। इसे आठ या दस बार करें। इससे शरीर में ठंडक बढ़ती है।
*शीतकारी : शीतकारी में दाँतों को भींचकर होंठों से श्वास खींचें। कुछ देर तक रोके रखने के बाद नाक से निकाल दें। इसे भी आठ से दस बार करें और तेज गर्मी में भी भरपूर ठंडक का मजा लें।
मुद्रा का लाभ लें : गर्मी में आमतौर पर सुस्तपन छा जाता है। ऐसे में शून्य, वायु और वरुण मुद्रा गर्मी में लाभदायक है। शून्य मुद्रा आपके शरीर के सुस्तपन को कम कर स्फूर्ति जगाती है। वरुण मुद्रा शरीर के जल तत्व के संतुलन को बनाए रखती है और वायु मुद्रा एसिडिटी, दर्द, दस्त, कब्ज, अम्लता आदि को दूर करती है।
चेहरे की चमक : ज्यादा से ज्यादा पानी पीने से विषैले पदार्थ शरीर से बाहर निकल जाते हैं और गरमाहट भी छँट जाती है। त्वचा पर रूखापन भी नहीं रहता। अंग संचालन के अंतर्गत आने वाले मुँह के व्यायाम करें। जैसे शेर की तरह मुँह फाड़ना और बंद करना। मुँह में हवा भरकर उसे दाएँ-बाएँ घुमाना आदि।
आँखों पर रखें नजर : आँखों की जलन मिटाने के लिए धूप में निकले से पहले सनग्लासेस का प्रयोग करें। गुलाब जल में साफ कॉटन को भिगोकर आँखों पर रखें और कुछ देर आँखें बंद करके लेटें। अंग संचालन के अंतर्गत आने वाले आँखों के व्यायाम करें। जैसे आँखों को तेजी से झपकाना और आँखों की पुतलियों को दाएँ-बाएँ और ऊपर-नीचे करने के बाद गोल-गोल घुमाना।
स्नान-ध्यान : तेज धूप, प्रदूषण व देखभाल की कमी से शरीर, बाल और चेहरा अपनी चमक खो देते हैं और वे बेजान-से लगते हैं। अत: दही व मुलतानी मिट्टी का पैक बनाकर आधा घंटा तक पूरे शरीर पर लगाकर रखें और फिर ठंडे पानी से स्नान करें। आप चाहें तो योगा बाथ के बारे में भी जान सकते हैं।
योगासन : वैसे तो अंग संचालय या शूक्ष्म व्यायाम ही गर्मी के लिए अति उत्तम हैं, फिर भी आप ताड़ासन, कटि चक्रासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन, हलासन, ब्रह्म मुद्रा और पद्मासन कर सकते हैं।
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अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं।
दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।....
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