कुछ प्राणायाम ऐसे है जो सर्दी में गर्मी और गर्मी में ठंडक पहुँचाते हैं। शीतली प्राणायाम से गर्मी के मौसम से निजात पाई जा सकती है। इसके अलावा यह मन की शांति और शारीरिक शीतलता प्रदान करता है। शीतली प्रणायाम छायादार वृक्ष की तरह है।
विधि : सर्व प्रथम रीढ़ को सीधा रखते हुए किसी भी सुखासन में बैठ जाएँ। फिर जीभ को बाहर निकालकर उसे इस प्रकार मोड़े ही वह एक ट्यूब या नली के आकार जैसी बन जाए। फिर इस नली के माध्यम से ही धीरे-धीरे मुँह से श्वास लें। हवा नलीनुमा इस ट्यूब से गुजरकर मुँह, तालु और कंठ को ठंडक प्रदान करेगी।
इसके बाद जीभ अंदर करके श्वास को धीरे-धीरे नाक के द्वारा बाहर निकालें। इस प्राणायाम का अभ्यास दस बार कर सकते हैं। प्राणायाम का अभ्यास होने के बाद गर्मी के मौसम में इसकी अवधि आवश्यकता अनुसार बढ़ा सकते हैं।
सावधानी : शीतली प्राणायाम के समय श्वास लयबद्ध और गहरी होना चाहिए। प्राणायाम के अभ्यास के बाद शवासन में कुछ देर विश्राम करें। जहाँ तक संभव हो सूर्योदय या सूर्यास्त के समय ही यह प्रणायम करें। तेज धूप में यह प्रणायाम न करें। धूल भरे वातावरण में भी प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
सर्दी होने या सर्दी में यह प्रणायाम ना करें। बीमार हो या कोई बीमारी हो तो यह प्राणायाम नहीं करें। कम ब्लड प्रेशर की शिकायत, सर्दी-खाँसी, दमा, कफ आदि की समस्या होने पर यह प्राणायाम कतई नहीं करें।
इसके लाभ : सूक्ष्म और स्थूल रूप से प्राणायाम हमारे शरीर और मन को लाभ पहुँचाता है, इसीलिए इसके लाभ एकदम से नजर नहीं आते। शीतली प्राणायाम शरीर में शीतलता प्रदान करता है, जिसके कारण गर्मी से होने वाले रोगों में लाभ मिलता है। इससे मानसिक शांति प्राप्त होती है और रक्तचाप भी नियंत्रण रहता है। इसके नियमित अभ्यास से एसिडिटी की शिकायत नहीं रहती। उक्त प्राणायाम से ह्रदय, फेफड़े, और तंत्रिका तंत्र मजबूत होते हैं।
शीतली प्राणायाम के अभ्यास से भूख-प्यास पर नियंत्रण पाया जा सकता है तथा गर्मी में शरीर को ठंडक पहुँचाने के लिए भी इसका अभ्यास किया जाता है।
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अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं।
दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।....
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