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Motivation Tips : इनर और आउटर मेमोरी को समझें

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अनिरुद्ध जोशी

भारतीय दर्शनशास्त्र कहता है कि हमारा मस्तिष्क ही हमें सफल या असफल करता है कोई बाहरी व्यक्ति, परिवार, समाज या देश नहीं। आपकी असफलता के लिए आप खुद ही जिम्मेदार हैं किसी को दोष देने का मतलब यह है कि आप अपनी कमजोरी को छिपा रहे या दबा रहे हैं। जब व्यक्ति अपनी असफलता की जिम्मेदारी खुद लेता है तभी वह सफलता की ओर कदम भी बढ़ाना प्रारंभ कर देता है। आओ जानते हैं इसी संदर्भ में इनर और आउटर मेमोरी का कमाल। योग में इस संपूर्ण को चित्त कहते हैं। जैसा चित्त वैसा भविष्य, इसीलिए कहा जाता है योगश्चित्त वृत्ति निरोध। चित्त की वृत्तियों को रोकना ही योग है।
 
 
इनर और आउटर : वैज्ञानिक कहते हैं मानव मस्तिष्क में 24 घंटे में लगभग हजारों विचार आते हैं। उनमें से ज्यादातर नकारात्मक होते हैं। नकारात्मक विचार इसलिए अधिक होते हैं कि जब हम कोई नकारात्मक घटना देखते हैं जिसमें भय, राग, द्वैष, सहवास आदि हो तो वह घटना या विचार हमारे चित्त की इनर मेमोरी में सीधा चला जाता है जबकि कई अच्छी बातें हमारे चित्त की आउटर मेमोरी में ही घुम-फिरकर दम तोड़ देती है।
 
 
दो तरह की मेमोरी होती है- इनर और आउटर। इनर मेमोरी में वह डाटा सेव हो जाता है, जिसका आपके मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ा है और फिर वह डाटा कभी नहीं मिटता। रात को सोते समय इनर मेमोरी सक्रिय रहती है और सुबह-सुबह उठते वक्त भी इनर मेमोरी जागी हुई होती है। अपनी इनर मेमोरी अर्थात चित्त से व्यर्थ और नकारात्मक डाटा को हटाओ और सेहत, सफलता, खुशी और शांति की ओर एक-एक कदम बढ़ाओ।
 
 
आपको याद होगा कि आपको अपने बचपन की सिर्फ वही बातें याद होंगी जिसमें आपकी जमकर मार पड़ी होगी या कोई दु:खद घटना घटी होगी। हो सकता है कि आपने किसी चीज के लिए अपने मम्मी-पापा से बहुत ज्यादा ज़ीद की होगी तभी वह मिली होगी तो ऐसी बातें भी याद रह जाती है। दरअसल, हमारा मन दुख:भरी बातें ग्रहण करने में देर नहीं करता परंतु सुखभरी बातों में से अधिकतर तो हम भूल ही जाते हैं।
 
 
कैसे बन जाता है व्यक्ति दुखी और रोगी : जो भी विचार निरंतर आ रहा है वह धारणा का रूप धर लेता है। अर्थात वह हमारी इनर मेमोरी में चला जाता है। आपके आसपास बुरे घटनाक्रम घटे हैं और आप उसको बार-बार याद करते हैं तो वह याद धारणा बनकर चित्त में स्थाई रूप ले लेगी। बुरे विचार या घटनाक्रम को बार-बार याद न करें।

 
विचार ही वस्तु बन जाते हैं। इसका सीधा-सा मतलब यह है कि हम जैसा सोचते हैं वैसे ही भविष्य का निर्माण करते हैं। यदि आपको अपनी सेहत को लेकर भय है, सफलता को लेकर संदेह है और आप विश्वास खो चुके हैं तो समझ जाएं की चित्त रोगी हो गया है। किसी व्यक्ति के जीवन में बुरे घटनाक्रम बार-बार सामने आ जाते हैं तो इसका सीधा सा कारण है वह अपने अतीत के बारे में हद से ज्यादा विचार कर रहा है। बहुत से लोग डरे रहते हैं इस बात से कि कहीं मुझे भी वह रोग न हो जाए या कहीं मेरे साथ भी ऐसा न हो जाए....आदि। सोचे सिर्फ वर्तमान को सुधारने के बारे में।

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