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कोविड-19 महामारी के दौर में घर पर करें ये 3 योगासन, एकदम रहेंगे फिट

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अनिरुद्ध जोशी

सोमवार, 12 अप्रैल 2021 (11:19 IST)
कोविड-19 कोरोना वायरस के दौर में घर पर ही रहना पड़ रहा है। बहुत से लोगों वर्क फ्रॉम होम है। ऐसे में ना तो पैदल चलना, दौड़ना, टहलना या जिम में कसरत करना नहीं हो पा रहा है तो एक ओर जहां मोटामा बढ़ रहा है, तोंद निकल रही है तो दूसरी ओर कई तरह के रोग की चपेट में भी आप आ सकते हैं। ऐसे में आप घर पर ही रहकर बहुत ही सरल योगासन करके खुद को फिट रख सकते हो।
 
 
1. सूर्य नमस्कार : घर में ही आप अच्छे से योग करते रहेंगे तो आप स्वस्थ रहेंगे और आपका वजन भी नहीं बढ़ेंगे। योग में आप सूर्यनमस्कार की 12 स्टेप को 12 बार करें और दूसरा यह कि कम से कम 5 मिनट का अनुलोम विलोम प्रणायाम करें। उक्त संपूर्ण क्रिया को करने में मात्र 15 से 20 मिनट ही लगते हैं। आप नहीं जानते हैं कि यह आपके लिए कितनी फायदेमंद साबित होगी। यदि ये नहीं कर सकते तो निम्नलिखित आसन करें। लेकिन डायबिटीज के मरीज हैं तो अवश्य करें।
 
2. मंडूकासन : डायबिटीज के मरीजों के लिए यह बहुत अच्छा आसन है। हालांकि कुर्मासन भी किया जा सकता है। यह आसन पेन्क्रियाज को सक्रिय करके डायबिटीज को कम करने में लाभकारी है। क्योंकि इसके अभ्यास से पेट का उत्तम व्यायाम होता है। जठराग्नि प्रदीप्त होती है तथा गैस, अपचन व कब्ज आदि उदर रोग भी मिट जाते हैं।
 
विधि : सर्वप्रथम दंडासन में बैठते हुए वज्रासन में बैठ जाएं फिर दोनों हाथों की मुठ्ठी बंद कर लें। मुठ्ठी बंद करते समय अंगूठे को अंगुलियों से अंदर दबाइए। फिर दोनों मुठ्ठियों को नाभि के दोनों ओर लगाकर श्वास बाहर निकालते हुए सामने झुकते हुए ठोड़ी को भूमि पर टिका दें। थोड़ी देर इसी स्थिति में रहने के बाद वापस वज्रासन में आ जाए।मंडूकासन करने के बाद उष्ट्रासन जरूर करें।
 
3. आंजनेयासन : संस्कृत शब्द आंजनेय का अर्थ होता है अभिवादन या स्तुति। हनुमान जी का एक नाम आंजनेय भी है। अंग्रेजी में आजकल इसे Salutation Pose कहते हैं। यह आसन उसी तरह किया जाता है जिस तरह हनुमानजी अपने एक पैर का घुटना नीचे टिकाकर दूसरा पैर आगे रखकर कमर पर हाथ रखते हैं।
 
अंजनेय आसन में और भी दूसरे आसन और मुद्राओं का समावेश है। इससे छाती, हथेलियां, गर्दन और कमर को लाभ मिलता है। इसका नियमित अभ्यास करने से जीवन में एकाग्रता और संतुलन बढ़ता है।
 
विधि : सर्वप्रथम वज्रासन में आराम से बैठ जाएँ। धीरे से घुटनों के बल खड़े होकर पीठ, गर्दन, सिर, कूल्हों और जांघों को सीधा रखें। हाथों को कमर से सटाकर रखें सामने देंखे। अब बाएं पैर को आगे बढ़ाते हुए 90 डिग्री के कोण के समान भूमि कर रख दें। इस दौरान बायां हाथ बाएं पैर की जंघा पर रहेगा।
 
फिर अपने हाथों की हथेलियों को मिलाते हुए हृदय के पास रखें अर्थात नमस्कार मुद्रा में रखें। श्वास को अंदर खींचते हुए जुड़ी हुई हथेलियों को सिर के ऊपर उठाकर हाथों को सीधा करते हुए सिर को पीछे झुका दें। इसी स्थिति में धीरे-धीरे दाहिना पैर पीछे की ओर सीधा करते हुए कमर से पीछे की ओर झुके। इस अंतिम स्थिति में कुछ देर तक रहे। फिर सांस छोड़ते हुए पुन: वज्रासन की मुद्रा में लौट आए। इसी तरह अब यही प्रक्रिया दाएं पैर को 90 डिग्री के कोण में सामने रखते हए करें।
 
नोट : पेट और पैरों में किसी प्रकार की कोई गंभीर समस्या होतो यह आसन योग शिक्षक की सलाह पर ही करें। इस आसन की अंतिम स्टेप में एक मिनट तक रह सकते हैं और इसे दो बार कर सकते हैं।

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