आई एम कलाम

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नीला माधव पांडा की फिल्म आई एम कलाम सन 2010 में रीलिज हुई थी। इस फिल्म को भले ही कमर्शियल सक्सेस न मिली हो, लेकिन इसे समीक्षकों ने जी भर के सराहा था। इस फिल्म का प्रीमियर कांस फिल्म फेस्टिवल में हुआ था और उसके बाद कई फिल्म समारोहों में इसकी स्क्रीनिंग की गई। इस फिल्म में छोटू का कैरेक्टर हर्ष मायर ने निभाया था। हर्ष को अपने बेहतरीन अभिनय के लिए देश-विदेश में काफी तारीफ मिली। कहानी एक गरीब राजस्थानी बच्चे छोटू के आसपास घूमती है। छोटू पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम की जिंदगी से बहुत प्रभावित है और पढ़ाई कर उनके जैसा बनना चाहता है।

एक दिन छोटू तय करता है कि खूब पढ़ाई करना है और कलाम से मिलना है। छोटू अपना नाम भी कलाम रख लेता है। अपने दोस्त प्रिंस के लिए एक स्पीच लिखने का निर्णय उसे एक मुसीबत में फँसा देता है। आखिरकार अपने दोस्त की मदद से छोटू स्कूल का मुँह देख पाता है। आई एम कलाम भारत के गरीब बच्चों की सच्ची कहानी कहती है। सब छोटू जैसे खुशकिस्मत नहीं होते और जिंदगी में कभी स्कूल का मुँह नहीं देख पाते। इस फिल्म को कई समारोहों में दिखाया गया और इसने कई पुरस्कार भी जीते। निर्देशक ने इस बेहद खूबसूरत फिल्म के जरिए संदेश दिया है कि हमारे देश में कलाम बनाए जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए गरीब बच्चों तक शिक्षा को खुद ही पहुँचना होगा।

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