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New Year 2020 : नए वर्ष में लाल किताब अनुसार लें ये 10 संकल्प अन्यथा होगा नुकसान

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अनिरुद्ध जोशी

, गुरुवार, 12 दिसंबर 2019 (15:37 IST)
नए वर्ष में प्रत्येक व्यक्ति सोचता है कि इस वर्ष से मैं ये बुरी आदत छोड़ दूंगा या ये कार्य नहीं करूंगा। इनमें से बहुत से लोग संकल्प लेते हैं लेकिन फिर वे तोड़ भी देते हैं। क्यों तोड़ते हैं यह वे ही जानते होंगे। हालांकि आने वाला वर्ष ज्योतिष के अनुसार बुध के प्रधानमंत्रित्व का वर्ष है और अंक शास्त्र के अनुसार राहु का वर्ष है। बुध व्यापार और नौकरी को संभालता है तो राहु सजा देने वाला है। ऐसे में यदि आपके जीवन में किसी भी प्रकार का संकट है तो आप नए वर्ष में 10 नए संकल्प को लेकर उसे समाप्त कर सकते हैं और जो लोग नहीं सुधरना चाहते हैं उन्हें भारी नुकसान उठाना होगा।
 
 
1. संध्योपासन :- बहुत से लोग हैं जो सुबह जल्दी नहीं उठते और ना ही किसी भी प्रकार का पूजा-पाठ या प्रार्थना नहीं करते हैं, क्योंकि उन्हें इसका महत्व समझ में नहीं आता है। लेकिन इससे मन में विश्‍वास, आत्मविश्‍वास के साथ ही जीवन की चुनौतियों से लड़ने की क्षमता प्राप्त होती है और चमत्कारिक रूप से कार्य भी होते हैं। हिन्दू धर्म की पूजा पद्धति को संध्योपासना या संध्या वंदन कहते हैं। संध्या वंदन के कुछ तरीके हैं- 1.प्रार्थना-स्तुति, 2.ध्यान-साधना, 3.पूजा-पाठ-आरती और 4.भजन-कीर्तन। आपकी जो इच्छा हो वो करें और इसे अपने नित्य कर्म का हिस्सा बनाएं। कई लोग बुढ़ापे में यह कार्य करते हैं जो कि उचित नहीं है।
 
 
2. उपवास का संकल्प :- उपवास से हमारा जीवन बदला जा सकता है। बहुत से लोग हैं जो उपवास के दिन खिचड़ी खाकर पेट भर लेते हैं। जब पेट ही भरा गया तो फिर उपवास किस बात का? उपवास से जहां हमारा शरीर शुद्ध होता है वहीं हमारे ग्रह दोष और पितृदोष भी शांत होते हैं। आप संकल्प लें कि में सप्ताह में एक बार गुरुवार करूंगा, माह में दो बार एकादशी या प्रदोष का व्रत रखूंगा। इससे आपको चमत्कारिक रूप से लाभ मिलेगा।
 
 
3. दान का संकल्प :- वेदों में तीन प्रकार के दाता कहे गए हैं- 1.उक्तम, 2.मध्यम और 3.निकृष्‍ट। धर्म की उन्नति रूप सत्यविद्या के लिए जो देता है वह उत्तम। कीर्ति या स्वार्थ के लिए जो देता है तो वह मध्यम और जो वेश्‍यागमनादि, भांड, भाटे आदि को देता वह निकृष्‍ट माना गया है। पुराणों में अनेकों दानों का उल्लेख मिलता है जिसमें अन्नदान, विद्यादान, अभयदान और धनदान को ही श्रेष्ठ माना गया है, यही पुण्‍य भी है। सभी प्राणियों, पक्षियों, गाय, कुत्ते, कौए, चींटी आदि को अन्न जल देना। आप संकल्प लें कि इस वर्ष में ज्यादा से ज्यादा अन्न दान करूंगा, भूखे लोगों को भोजन कराऊंगा। यह सबसे बड़ा पुण्य कर्म है।
 
 
4.सेवा का संकल्प :- सेवा को सबसे बड़ा धर्म माना गया है। सर्व प्रथम माता-पिता, फिर बहन-बेटी, फिर भाई-बांधु की किसी भी प्रकार से सहायता करना ही धार्मिक सेवा है। इसके बाद अपंग, महिला, विद्यार्थी, संन्यासी, चिकित्सक, धर्म के रक्षकों,  प्राणियों, पक्षियों, गाय, कुत्ते आदि की सेवा-सहायता करना पुण्य का कार्य माना गया है।
 
 
5.झूठ न बोलने का संकल्प :- लाल किताब के अनुसार कुंडली का दूसरा खाना बोलने और तीसरा खाना बोलने की कला से संबंध रखता है। पहला आपके पास क्या है और दूसरा आप उससे क्या कर सकते हैं? इससे संबंध रखता है। यदि आप झूठ बोलते हैं तो दूसरे और तीसरे भाव अर्थात खाने में अपने आप ही गलत असर चला जाता है। कहते हैं कि पहला मनसा, दूसरा वाचा और तीसरा कर्मणा। कुंडली में दूसरा भाव आपके ससुराल, धन और परिवार का है और तीसरा भाव आपके कर्म और पराक्रम का भी है। झूठ बोलने वाला यह तीनों ही नष्ट कर लेता है।
 
 
6.भोजन करें उत्तम :- लाल किताब के अनुसार मांस खाने से मंगल और शराब पीने से शनि खराब हो जाता है। इसी तरह यदि आप तामसिक भोजन कर रहे हैं तो राहु और केतु के अधिन रहेंगे।  मंगल के खराब होने से जीवन से पराक्रम, कार्य और शांति नष्ट हो जाती है। साथ ही खून खराब हो जाता है। जिस तरह से मांस खाने से मंगल खराब होता है, उसी तरह शराब पीने से शनि और राहु। राहु हमारे दिमाग की ताकत है, दिमाग नहीं। शराब पीने से दिमाग की ताकत खत्म होती है। राहु खराब तो गुरु भी नष्ट समझो।
 
 
8.कभी भी ब्याज का धंधा ना करें :- लाल किताब के अनुसार ब्याज का धंधा करने से शनि का प्रकोप प्रारंभ हो जाता है। यह जीवन के किसी भी मोड़ पर दंड देता है। कभी-कभी यह भयंकर परिणाम देने वाला होता है, तो कभी यह संचित कर्म का हिस्सा बन जाता है। हालांकि इसके पीछे एक तथ्य यह है कि ब्याज का धंधा करने वाले को बद्दुआ ज्यादा मिलती है। उसकी बुद्धि रुपयों को लेकर अलग ही तरह की निर्मित हो जाती है। वह अपने परिवार पर भी यदि किसी भी प्रकार का खर्च करना है तो अपने नुकसान के बारे में सोचता है।
 
 
9.इन नियमों के पालन करने का लें संकल्प :-जैसे, पराई स्त्री के साथ संबंध ना बनाएं, सलीके से कपड़े पहनें, कान और नाक को छिदवाएं, नाक को हमेशा साफ रखें, दांतों को साफ रखें, कीकर से कभी कभी दातुन करें, संयुक्त परिवार में रहना, ससुराल से बैर न रखना रखना, कन्या, बहन और बेटी को प्रसन्न रखना और उन्हें मीठी चीजें देना, माता, भाभी और मौसी की सेवा करें। विधवा की सहायता करें, पत्नी की देखभाल करें, मेहतर को रुपए दें, नि:संतान से रुपए नहीं लें, छत में छेद न करें, कुत्ते को न सताएं, कुत्ते को रोटी दें, दक्षिणामुखी मकान में न रहें, घर में कच्ची जगह रखें, अपंगों और अंधों को भोजन खिलाएं, चिड़ियों, मुर्गियों और पक्षियों को दाना डालें, बंदरों को गुड़ खिलाएं, गाय को रोटी खिलाएं, मंदिर में झाडू लगाएं, हनुमान चालीसा पढ़ें आदि कई नियम हैं जिनका पालन करने से व्यक्ति पर किसी भी प्रकार का संकट नहीं आता है और उसे दैवीय सहायता मिलती है।
 
 
10.तीर्थ यात्रा का संकल्प :- ‍जो मनमाने तीर्थ और तीर्थ पर जाने के समय हैं उनकी यात्रा का सनातन धर्म से कोई संबंध नहीं। तीर्थों में कैलाश मानसरोवर, अमरनाथ, चार धाम, सप्तपुरी, द्वादश ज्योतिर्लिंग और 51 शक्तिपीठ ही प्रमुख है। चार धार्म की यात्रा में सभी के दर्शन हो जाते हैं। चार धाम:- बद्रीनाथ, द्वारका, रामेश्वरम, जगन्नाथ पुरी। द्वादश ज्योतिर्लिंग:- सोमनाथ, द्वारका, महाकालेश्वर, श्रीशैल, भीमाशंकर, ॐकारेश्वर, केदारनाथ विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, रामेश्वरम, घृष्णेश्वर, बैद्यनाथ। सप्तपुरी- काशी, मथुरा, अयोध्या, द्वारका, माया, कांची और अवंति (उज्जैन)।
 

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