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'आकाशीय रिकॉर्ड' विद्या क्या है, जानिए कैसे करती है ये आपकी समस्याओं का समाधान?

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हमें फॉलो करें आकाशीय रिकॉर्ड विद्या

अनिरुद्ध जोशी

, गुरुवार, 11 दिसंबर 2025 (15:27 IST)
Akashic Records: आकाशीय रिकॉर्ड एक गूढ़ विद्या है। यह विद्या लोगों बताती उनके पिछले जन्म के रिकॉर्ड बताती है और इससे वर्तमान जीवन की समस्याओं को जोड़कर उसका समाधान बताती है। यह विद्या के जानकार मानते हैं कि विशाल ब्रह्मांड की लाइब्रेरी में प्रत्यके आत्मा के कर्मों का रिकॉर्ड दर्ज है। इन्हीं पिछले कर्मों के कारण ही यह वर्तमान का जन्म मिला हुआ है जिसमें हिसाब किताब चलता रहता है। प्रत्येक व्यक्ति खुद इस रिकॉर्ड को थोड़े से प्रयास से प्राप्त कर सकता है या फिर उसे किसी आकाशीय रिकॉर्ड रिडर्स की मदद लेना चाहिए। इसे जातकर आप अपना वर्तमान जीवन बदल सकते हो।
 
पूर्व में थियोसोफी सोसायटी इस तरह की विद्या के प्रचार का माध्यम बनी। हालांकि भारत में इसे प्रारब्ध कर्म का लेखा-जोखा माना जाता है। थियोसोफी में वर्णित एक रहस्यमय, अभौतिक संग्रह है, जिसमें ब्रह्मांड में घटित हर विचार, शब्द, भावना और घटना का रिकॉर्ड दर्ज होता है- अतीत, वर्तमान और भविष्य का। इसे एक विशाल ब्रह्मांडीय पुस्तकालय माना जाता है, जो "आकाश" (ईथर/सूक्ष्म स्थान) में मौजूद है और आत्माओं या कुछ विशेष माध्यमों द्वारा पढ़ाया जा सकता है, ताकि जीवन के गहरे रहस्यों और पिछले जन्मों के ज्ञान को समझ कर वर्तमान जन्म को सुधारा जा सकें। कहते हैं यदि किसी व्यक्ति को किसी भी प्रकार का कोई रोग है, समस्या है या कोई अन्य दुख: है तो उसकी जड़े आपके पूर्व के कर्मों में छुपी है। इसी प्रकार आपको इस जन्म में जो भी माता पिता, भाई बहन मिले हैं या आपको अपना जीवनसाथी मिला है तो उसमें भी कार्य एवं कारण की श्रृंखला के साथ ही आपके विचार ने गहराई से काम किया है।
 
आकाशीय रिकॉर्ड क्या है: यह सभी घटनाओं, विचारों और भावनाओं का एक ऊर्जावान रिकॉर्ड है, जो अस्तित्व के सूक्ष्म स्तर पर संग्रहीत है। आकाशीय रिकॉर्ड्स ब्रह्मांड की 'ब्लैक बॉक्स' रिकॉर्डिंग की तरह हैं, जो हर चीज को संग्रहीत करती हैं और कुछ खास लोगों को इसे देखने की क्षमता होती है।
 
आकाशीय रिकॉर्ड कैसे काम करता है: ऐसा माना जाता है कि यह एक विशाल लाइब्रेरी की तरह है, जहाँ हर आत्मा और हर घटना का विवरण दर्ज है, जिसे कुछ लोग पढ़ सकते हैं। यह कोई भौतिक जगह नहीं है, बल्कि एक गैर-भौतिक आयाम है जहाँ सभी अस्तित्व की जानकारी ऊर्जा के रूप में दर्ज है।
 
इसमें क्या जानकारी दर्ज होती है?
माना जाता है कि यह रिकॉर्ड हर प्राणी, हर घटना, और हर विचार का एक विस्तृत सचित्र इतिहास रखता है:
अतीत: समय की शुरुआत से लेकर अब तक घटी हर घटना, हर कार्य और हर भावना का रिकॉर्ड।
वर्तमान: आपके वर्तमान जीवन के पैटर्न, संबंध और चुनौतियों की जड़ें।
भविष्य: आपकी वर्तमान दिशा के आधार पर भविष्य की संभावित संभावनाएं (यह भविष्य को तय नहीं करता, बल्कि संभावनाएँ दिखाता है)।
आत्मा का इतिहास: आपके आत्मा का मूल, पिछले जन्मों के चुनाव, सबक और कर्म संबंधी समझौते।
 
आकाशीय रिकॉर्ड तक कैसे पहुंच सकते हैं: कुछ आध्यात्मिक लोग, जैसे कि माध्यम, इन रिकॉर्ड्स तक पहुंच सकते हैं और अपने या दूसरों के जीवन के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, जिसमें पिछले जन्मों के सबक और कर्मों की जानकारी भी शामिल है। इस रिकॉर्ड तक पहुँचने के लिए विशेष तकनीकों और आध्यात्मिक अभ्यास की आवश्यकता होती है, जैसे कि गहन ध्यान, विशिष्ट प्रार्थना, या चेतना की उच्च अवस्था।
 
रिकॉर्ड को कैसे करते हैं डिकोड: रिकॉर्ड से मिली जानकारी अक्सर प्रतीकात्मक या ऊर्जा भाषा में होती है, जिसकी सही व्याख्या करने के लिए प्रशिक्षित मार्गदर्शन और अंतर्ज्ञान की आवश्यकता होती है। ऐसा वही लोग कर पाने में सक्षम हैं जो इसी विद्या में काम करते रहते हैं। 
 
क्या है इसका लाभ लाभ: इन्हें पढ़कर व्यक्ति अपने जीवन के अनदेखे प्रभावों, नकारात्मक बंधनों (जैसे श्राप, कसम, वादे, हिसाब किताब, लेन देन), और जीवन के उद्देश्य को समझ सकता है।
 
कहां आई ये अवधारणा: यह थियोसोफी और विभिन्न आध्यात्मिक परंपराओं का हिस्सा है, जो हर चीज के ऊर्जावान रिकॉर्ड के रूप में इसे देखती है। आकाशीय रिकॉर्ड की अवधारणा को 19वीं सदी के अंत में पश्चिमी गूढ़ विज्ञान में प्रमुखता मिली, खासकर थियोसोफिकल सोसायटी के माध्यम से, जिसकी स्थापना भारत में भी हुई थी। थियोसोफिस्टों ने प्राचीन भारतीय 'आकाश' की अवधारणा को लिया और इसे एक सार्वभौमिक 'मेमोरी बैंक' के रूप में व्यवस्थित किया, जिसे उन्होंने 'आकाशीय रिकॉर्ड' नाम दिया।
 
आकाशीय रिकॉर्ड विद्या की जड़ें वास्तव में प्राचीन भारतीय दर्शन और गूढ़ विज्ञान में निहित हैं, हालाँकि इसे 'आकाशीय रिकॉर्ड्स' नाम आधुनिक युग में पश्चिमी गूढ़वादियों और थियोसोफिस्टों द्वारा दिया गया। प्राचीन ऋषि और योगी अति-चेतना या समाधि की अवस्था में पहुँचकर इस 'आकाश' से ज्ञान प्राप्त करने की क्षमता रखते थे। वेदों के एक भाग को 'श्रुति' (वह जो सुना गया है) इसीलिए कहा जाता है, क्योंकि ऋषियों ने ये मंत्र किसी इंसान से नहीं सीखे, बल्कि उन्हें आकाश में सुना या उस सार्वभौमिक ज्ञान से प्राप्त किया था। योग दर्शन में माना जाता है कि हर अनुभव, विचार और कार्य आत्मा पर एक सूक्ष्म छाप छोड़ता है, जिसे संस्कार कहते हैं। यही संस्कार भविष्य के कर्मों को निर्धारित करते हैं। ये संस्कार ही एक तरह से आत्मा के व्यक्तिगत 'आकाशीय रिकॉर्ड' होते हैं।
 
आज के दौर में, भारत और दुनिया भर में, इस विद्या को पिछले जन्मों की समस्याओं को ठीक करने, कर्म संबंधी पैटर्न को समझने, और आध्यात्मिक विकास के लिए एक तकनीक या रीडिंग मोडैलिटी के रूप में सिखाया और अभ्यास किया जाता है।
 
इस विद्या का उद्देश्य क्या है?
लोग इस विद्या का उपयोग निम्नलिखित कारणों से करते हैं:-
आत्म-जागरूकता: जीवन के बार-बार दोहराए जाने वाले पैटर्न को समझना।
कर्म संबंधी स्पष्टता: कर्मिक संबंधों और पिछले जन्मों के प्रभावों को जानना।
जीवन उद्देश्य: आत्मा के वास्तविक उद्देश्य और दिशा को पहचानना।
उपचार: अतीत के भावनात्मक या ऊर्जावान निशानों (इम्प्रिंट्स) को ठीक करना।
 
संक्षेप में, आकाशीय रिकॉर्ड विद्या वह आध्यात्मिक अभ्यास है जो व्यक्ति को अपनी आत्मा के सबसे गहरे सत्य और ब्रह्मांड की सामूहिक चेतना से जुड़ने में मदद करता है ताकि वह जीवन को अधिक जागरूकता और उद्देश्य के साथ जी सके।

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