आषाढ़ मास में क्या करें, क्या न करें

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आषाढ़ मास में सूर्य के राशि परिवर्तन को आषाढ़ संक्रांति कहा जाता है...इस माह सूर्य मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। 
 
आषाढ़ संक्रांति 14 जून 2020, को रविवार के दिन रात्रि 23:53 पर आरंभ होगी।
 
इस संक्रांति का स्नान और पुण्य काल अगले दिन प्रात:काल 06:17 तक रहेगा।
 
आषाढ़ मास विशेष 
 
आषाढ़ मास में तीर्थस्नान, जप-पाठ, दान आदि का विशेष महत्व रहेगा। संक्रान्ति, पूर्णिमा और चन्द्र ग्रहण तीनों ही समय में यथा शक्ति दान कार्य करने चाहिए। जो तीर्थ स्थलों में न जा पाए उन्हें अपने घर में ही स्नान, दान कार्य कर लेने चाहिए।

आषाढ़ मास में भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए ब्रह्मचारी रहते हुए नित्यप्रति भगवान लक्ष्मी नारायण की पूजा अर्चना करना पुण्य फल देता है।
 
इसके अतिरिक्त इस मास में विष्णु के सहस्त्र नामों का पाठ भी करना चाहिए तथा एकादशी तिथि,अमावस्या तिथि और पूर्णिमा के दिन ब्राह्मणों को भोजन तथा छाता, खडाऊ,आंवले, आम, खरबूजे आदि फल, वस्त्र, मिष्ठानादि का दक्षिणा सहित यथाशक्ति दान कर, एक समय भोजन करना चाहिए।

इस प्रकार नियम पूर्वक यह धर्म कार्य करने से विशेष पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।

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