Hanuman Chalisa

भगवान भोलेनाथ शंकर की इन 8 तरह की मूर्तियों के बारे में आपको शर्तिया नहीं पता होगा

Webdunia
पुराणों अनुसार भगवान शंकर को अष्टरूप में दर्शाया गया है। दरसअल ये ब्रह्मांड में आठ रूप में विद्यमान हैं। इन आठ रूपों मे आधार पर शंकर की आठ प्रकार की प्रतिमाएं बताई गई हैं। विस्तार में जानते हैं कि उन आठ स्वरूपों या मूर्तियों के नाम क्या है।
 
1.क्षितिमूर्ति (सर्व)- शिव की क्षिति मूर्ति का अर्थ है कि पूरे जगत को धारण करने वाली पृथ्‍वीमयी प्रतिमा के स्वामी शर्व है। सर्व का अर्थ भक्तों के समस्त कष्टों को हरने वाला।
 
2.जलमूर्ति (भव)- शिव की जल से युक्त भावी मूर्ति पूरे जगत को प्राणशक्ति और जीवन देने वाली कही गई है। जल ही जीवन है। भव का अर्थ संपूर्ण संसार के रूप में ही प्रकट होने वाला देवता।
 
3.अग्निमूर्ति (रूद्र)- संपूर्ण जगत के अंदर-बाहर फैली समस्त ऊर्जा व गतिविधियों में स्थित इस मूर्ति को अत्यंत ओजस्वी मूर्ति कहा गया है जिसके स्वामी रूद्र है। यह रौद्री नाम से भी जानी जाती है। रुद्र का अर्थ भयानक भी होता है जिसके जरिये शिव तामसी व दुष्ट प्रवृत्तियों पर नियंत्रण रखते हैं।
 
4.वायुमूर्ति (उग्र)- वायु संपूर्ण संसार की गति और आयु है। वायु के बगैर जीवन संभव नहीं। वायुरूप में शिव जगत को गति देते हैं और पालन-पोषण भी करते हैं। इस मूर्ति के स्वामी उग्र है, इसलिए इसे औग्री कहा जाता है। शिव के तांडव नृत्य में यह उग्र शक्ति स्वरूप उजागर होता है।
 
5.आकाशमूर्ति (भीम)- तामसी गुणों का नाश कर जगत को राहत देने वाली शिव की आकाशरूपी प्रतिमा को भीम कहते हैं। आकाशमूर्ति के स्वामी भीम हैं इसलिए यह भैमी नाम से प्रसिद्ध है। भीम का अर्थ विशालकाय और भयंकर रूप वाला होता है। शिव की भस्म लिपटी देह, जटाजूटधारी, नागों के हार पहनने से लेकर बाघ की खाल धारण करने या आसन पर बैठने सहित कई तरह उनका भयंकर रूप उजागर होता है।
 
6.यजमानमूर्ति (पशुपति)- यह पशुवत वृत्तियों का नाश और उनसे मुक्त करने वाली होती यजमानमूर्ति है। इसलिए इसे पशुपति भी कहा जाता है। पशुपति का अर्थ पशुओं के स्वामी, जो जगत के जीवों की रक्षा व पालन करते हैं। यह सभी आंखों में बसी होकर सभी आत्माओं की नियंत्रक भी मानी गई है। 
 
7.चन्द्रमूर्ति (महादेव)- चंद्र रूप में शिव की यह मूर्ति महादेव के रूप में प्रसिद्ध है। महादेव का अर्थ देवों के देव होता है। यानी सारे देवताओं में सबसे विलक्षण स्वरूप व शक्तियों के स्वामी शिव ही हैं। चंद्र रूप में शिव की यह साक्षात मूर्ति मानी गई है।
 
8.सूर्यमूर्ति (ईशान)- शिव का एक नाम ईशान भी है। यह सूर्य जगत की आत्मा है जो जगत को प्रकाशित करता है। शिव की यह मूर्ति भी दिव्य और प्रकाशित करने वाली मानी गई है। शिव की यह मूर्ति ईशान कहलाती है। ईशान रूप में शिव को ज्ञान व विवेक देने वाला बताया गया है।

सम्बंधित जानकारी

Show comments

ज़रूर पढ़ें

गुरु का राहु से और केतु का शनि से बना है षडाष्टक योग, 5 राशियों के लिए चल रहा है शानदार समय

राहु के नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश: 4 राशियों की चमकेगी किस्मत, इन राशियों को रहना होगा सावधान

बुध का कर्क राशि में गोचर: 12 राशियों पर क्या होगा असर? जानिए पूरा राशिफल

3 दिन बाद बुध का कर्क राशि में प्रवेश, इन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत, खुलेंगे सफलता के नए द्वार

नरेंद्र मोदी के बाद अगला पीएम अमित शाह या योगी आदित्यनाथ, सटीक भविष्यवाणी

सभी देखें

नवीनतम

बुध का गुरु के नक्षत्र में गोचर: 8 अगस्त तक इन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत

Flat Vastu Tips: फ्लैट में रह रहे लोगों के लिए वास्तु के 5 टिप्स

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (25 जून, 2026)

25 June Birthday: आपको 25 जून, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 25 जून 2026: गुरुवार का पंचांग और शुभ समय

अगला लेख