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Kalagnanam:रहस्यमयी ग्रंथ 'कालज्ञानम': सटीक हैं इस ग्रंथ की भविष्यवाणी, जानिए 10 बड़ी भविष्यवाणियां

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In the picture: Saint Shri Potuluri Veera Brahmendra Swami, with a battle in the background.
Kalagnanam:भारत में कई भविष्यवक्ता संत हुए हैं, जिन्होंने हजारों वर्षों की स्पष्ट भविष्यवाणियां की हैं। ये भविष्यवाणियां उन्होंने नास्त्रेदमस या बाबा वेंगा की तरह गोलमोल भाषा में नहीं, बल्कि एकदम स्पष्ट रूप से की हैं। इन्हीं भविष्यवक्ताओं में से एक हैं आंध्र प्रदेश के सिद्ध संत श्री पोतुलूरी वीर ब्रह्मेंद्र स्वामी। स्वामी जी का जन्म 1608 में हुआ था। उन्होंने तेलुगु भाषा में 'कालज्ञानम' नामक एक ग्रंथ लिखा, जिसकी भविष्यवाणियां वर्तमान में अत्यंत वायरल हैं।
 
कालज्ञानम में 'संवत्सर' को आधार बनाकर भविष्य लिखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि किस संवत्सर में कौन सी घटनाएं घटेंगी।

अब तक सच साबित हो चुकीं प्रमुख भविष्यवाणियां:

1. उन्होंने लिखा था कि भविष्य में बिना बैलों के गाड़ियां दौड़ेंगी।
2. घरों में रोशनी के लिए तेल के दीयों की जरूरत नहीं पड़ेगी, पानी (बिजली) के सहारे उजाला होगा।
3. आसमान में 'लोहे की चिड़िया' (हवाई जहाज) उड़ेंगी।
4. लाइलाज महामारियों से लाखों लोगों की मृत्यु होगी।
5. शासन व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा और जनता ही अपना शासक चुनेगी (लोकतंत्र)।
6. बताया जाता है कि उनके ग्रंथ में महात्मा गांधी का नाम स्पष्ट रूप से उल्लेखित है।
7. कालज्ञानम में प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध का भी वर्णन मिलता है।
 
ऐसी ही और भी कई भविष्यवाणियां हैं, जिनके सच साबित होने का दावा उनके भक्त करते हैं।

आने वाले समय की भविष्यवाणियां:

1. आसमान से लाल वर्षा होगी और समुद्र का जलस्तर बढ़ने से कई तटीय शहर डूब जाएंगे।
2. धरती का तापमान बढ़ने से पहाड़ों से आग निकलेगी और आसमान में 'दो सूरज' जैसा दृश्य दिखाई देगा।
3. दिन में तारे नजर आएंगे, जिससे कुछ क्षेत्रों की जनसंख्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
4. उत्तर दिशा में कार्तिक द्वादशी के दिन चार चेहरों वाला तारा कई दिनों तक दिखाई देगा।
5, छह धर्म मिलकर एक हो जाएंगे और वेंकटेश्वर स्वामी का खजाना चोरी हो जाएगा।
6. तिरुपति बालाजी मंदिर की महिमा वैश्विक होगी और हर धर्म के लोग वहां दर्शन के लिए आएंगे।
7. ग्रंथ में ऐसी बीमारी का उल्लेख है, जिसमें मनुष्य के सिर से रक्त निकलेगा और उसकी तत्काल मृत्यु हो जाएगी।
8. कलियुग के 5 हजार वर्ष बीतने के बाद, अधर्म के अंत से पहले दुनिया को लगभग 108 वर्षों के लंबे संघर्ष और उथल-पुथल से गुजरना होगा।
9. जब शनि मीन और मेष राशि में गोचर करेगा, तब एक भीषण और निर्णायक युद्ध होगा।
10. 'विश्ववसु' नामक संवत्सर में भगवान कल्कि का अवतार होगा, जो दुष्टों का नाश करेंगे।
 
ब्रह्मेंद्र स्वामी के अनुयायी इन घटनाओं का समय मुख्य रूप से 2026 से 2030 के बीच मान रहे हैं, हालांकि समय का सटीक अनुमान लगाना कठिन है। कुछ लोग मानते हैं कि संवत्सर के अगले चक्र में यह घटित होगा।

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