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28 दिसंबर तक रहेगा पंचक काल, करेंगे ये उपाय तो नहीं होगा कुछ भी अशुभ

Webdunia
वर्ष 2017 खत्म होने को है और पंचक भी जारी है। 23 दिसंबर 2017, शनिवार से पंचक शुरू हो चुका है, जो 28 दिसंबर, गुरुवार तक जारी रहेगा। जब भी शनिवार के दिन पंचक आता है तो उसे मृत्यु पंचक के नाम से जाना जाता है। पंचक के अंतर्गत धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र आते हैं। इन्हीं नक्षत्रों के मेल से बनने वाले विशेष योग को 'पंचक' कहा जाता है। 
 
ज्योतिष शास्त्र में पंचक को शुभ नक्षत्र नहीं माना जाता है। इसे अशुभ और हानिकारक नक्षत्रों का योग माना जाता है। अत: इन दिनों में विशेष संभल कर रहने की आवश्यकता होती है। ज्ञात हो कि शनिवार से शुरू हुआ पंचक सबसे ज्यादा घातक होता है, क्योंकि इसे मृत्यु पंचक कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि अगर इस दिन किसी भी नए कार्य की शुरुआत की गई तो व्यक्ति को मृत्यु तुल्य कष्टों से गुजरना पड़ता है। 
 
इसीलिए शनिवार से शुरू हुए पंचक के दौरान कोई भी जोखिम भरा कार्य करने से बचना चाहिए। इस दिन कार्य शुरू करने से उस व्यक्ति को चोट अथवा दुर्घटना होने की संभावनाएं प्रबल हो जाती है। यहां ‍तक कि मृत्यु तक की आशंका बनी रहती है, क्योंकि पांच पंचकों में सबसे अधिक कष्टकारक शनि पंचक माना गया है। 
 
ज्योतिष के अनुसार पंचक के 5 दिनों में कई कार्य ऐसे होते हैं, जो सपंन्न नहीं किए जा सकते लेकिन किसी कारणवश इस दौरान अगर कोई कार्य पूर्ण करना बहुत ज्यादा जरूरी हो तो कुछ ऐसे भी उपाय है, जिनको अपना कर आप अपना जरूरी कार्य कर सकते हैं। 
 
पढ़ें पंचक के दिनों में किए जाने वाले कुछ उपाय...
 
* अगर इन दिनों घर के मकान की छत डलवाना जरूरी हो तो ऐसे समय में मजदूरों को मिठाई खिलाएं, तत्पश्चात छत डलवाने का कार्य करें। 
 
* किसी रिश्तेदारी में शव दहन का समय हो या घर में ‍अचानक किसी की मृत्यु हो गई हो तो पंचक होने के कारण शव दहन के समय 5 अलग पुतले बनाकर उन्हें अवश्य जलाएं। तत्पश्चात दाह संस्कार करें। 
 
* पंचक में अगर ईंधन इकट्ठा करना जरूरी हो तो पंचमुखी दीपक (आटे से निर्मित, तेल से भरकर) शिवजी के मंदिर में जलाएं, उसके बाद ईंधन खरीदें।
 
* पंचक के दौरान अगर किसी कारणवश दक्षिण दिशा की यात्रा करना ही पड़ें तो हनुमान मंदिर में 5 फल चढ़ाकर यात्रा करें।
 
* अगर घर में शादी का शुभ समय आ गया है और समय की कमी है तब लकड़ी का समान खरीदना जरूरी हो तो गायत्री हवन करवा कर लकड़ी का फर्नीचर की खरीदारी कर सकते हैं।
 

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