Publish Date: Thu, 17 Aug 2023 (12:51 IST)
Updated Date: Thu, 17 Aug 2023 (12:58 IST)
Significance of Singh Sankranti : सूर्य ग्रह 17 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 23 मिनट पर अपनी ही स्वराशि सिंह में गोचर कर गए हैं। सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश को संक्रांति कहते हैं। सिंह में प्रवेश को सिंह संक्रांति कहते हैं। अपनी ही राशि सिंह में प्रवेश को महत्वपूर्ण माना जाता है। सिंह संक्रांति का खास महत्व और जानें कि इस दिन कर सकते हैं कौन से शुभ उपाय।
सिंह संक्रांति का महत्व :
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भाद्रपद (भादो) माह की सिंह संक्रांति को उत्तराखंड में घी संक्रांति या ओल्गी संक्रांति कहते हैं।
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घी संक्रांति या घिया संक्रांद या घी-त्यार भी कहते हैं।
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गढ़वाल में घिया संक्रांद और कुमांऊ में घी-त्यार कहते हैं।
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वस्तुतः यह कृषि और पशुपालन से जुड़ा हुआ एक लोकपर्व है।
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इस दिन दाल की भरवां रोटियों के साथ घी का सेवन किया जाता है। इस रोटी को बेडु की रोटी कहा जाता है।
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चरक संहिता में कहा गया है कि घी- स्मरण शक्ति, बुद्धि, ऊर्जा, बलवीर्य, ओज बढ़ाता है।
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घी वसावर्धक है। यह वात, पित्त, बुखार और विषैले पदार्थों का नाशक है।
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सिंह संक्रांति के दिन कई तरह के पकवान बनाकर खाते हैं जिसमें दाल की भरवां रोटियां, खीर और गुंडला या गाबा प्रमुख हैं।
सिंह संक्रांति के 5 शुभ उपाय:-
1. सूर्यदेव को दें अर्घ्य और करें दान : कुंडली में सूर्यदोष है, तो उसे सूर्यदेव से जुड़ी वस्तुओं का खासकर दान करना चाहिए। जैसे कि तांबा, गुड़ आदि। इस दिन सूर्य मंत्र के साथ सूर्यदेव की विशेष पूजा जरूर करना चाहिए।
2. घी का उपयोग : पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है जो इस दिन घी नहीं खाएगा उसे अगले जन्म में घोंघे के रूप में जन्म लेना होगा। यही कारण है कि नवजात बच्चों के सिर और पांव के तलुवों में घी लगाकर जीभ पर भी थोड़ा सा घी रखा जाता है।
3. श्रीहरि विष्णु की करें पूजा : इस पावन पर्व के दिन भगवान विष्णु का पूजन होता है तथा श्री हरि के अन्य स्वरुप भगवान नरसिम्हा की पूजा का भी विशेष विधान बताया गया है।
4. लाल वस्तुओं का करें दान : सिंह संक्रांति वाले दिन स्नान और पूजा के बाद अपनी क्षमता के अनुसार लाल वस्तुओं का करें दान। लाल वस्त्र, तांबे का बर्तन, लाल चंदन या लाल रंग के रूमाल का दान करने से सूर्य देव मजबूत होंगे तो नौकरी में तरक्की के योग बनेंगे।
5. नदी में आटे की दीपकों का प्रवाहित करें : शुभ मुहूर्त में नदी में आटे के दीपक प्रवाहित करने से सभी तरह के संकटों के साथ ही कर्ज से भी मुक्ति मिलती है।