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वसंत पंचमी : विद्या, प्रेम, काम और ज्ञान का संगम

पं. अशोक पँवार 'मयंक'
सरस्वती पूजन और संगीत सीखने का श्रेष्ठ मुहूर्त
 

 
वसंत पंचमी पर्व 24 जनवरी को मनाया जाएगा। यह एक अनोखा त्योहार है। इस त्योहार में एक ओर ज्ञान की देवी सरस्वती की पूजा का विधान है वहीं दूसरी ओर प्रेम के देवता कामदेव की आराधना का उल्लेख है। ज्ञान और प्रेम का यह अद्भुत पर्व है जिसे छात्र सरस्वती पूजा के रूप में मनाते हैं।

 
 
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वसंत पंचमी व सरस्वती पूजा
 


 
शास्त्रों में बताया गया है कि माघ शुक्ल पंचमी के दिन ज्ञान और विद्या की देवी माता सरस्वती का जन्म हुआ है। छात्रगण इसी उपलक्ष्य में इस दिन माता सरस्वती की पूजा करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शिक्षा हेतु मुहूर्त के लिए यह दिन सबसे उत्तम होता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा करके बच्चे को अक्षर ज्ञान देना उत्तम माना गया है। इस दिन छात्र अपने स्कूलों में माता सरस्वती की पूजा करते हैं, साथ ही पुस्तक और लेखनी की भी पूजा करते हैं।
 
पहले गुरुकुल में विशाल आयोजन के साथ शास्त्रोक्त विधि से गुरु के साथ मिलकर छात्र वीणा-धारिणी माता शारदा की पूजा करते थे, आज भी इस परंपरा को स्कूल, कॉलेज एवं अन्य शिक्षण संस्थान में निभाया जाता है।
 
वसंत  पंचमी के दिन हंसवाहिनी मां सरस्वती को पीला और धानी रंग का वस्त्र भेंट किया जाता है। इस दिन प्रसाद के रूप में मां को बूंदी, बेर व मूंग की दाल भेंट की जाती है।
 
माता सरस्वती को ब्रह्मा की पुत्री कहा गया है। परमपिता माता सरस्वती के साथ वेदों में निवास करते हैं अत: इस दिन वेदों की भी पूजा की जाती है। जो छात्र संगीत एवं किसी कला का ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं उनके लिए माघ शुक्ल पंचमी यानी वसंत पंचमी बहूत ही शुभ मुहूर्त होता है। 

 
 
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कामदेव-कृष्ण पूजा
 
माघ शुक्ल पंचमी का एक अन्य रूप से भी विशेष महत्व है। इस दिन ऋतु करवट लेती है और प्रकृति बदलते मौसम का स्वागत करती है। इस बदलते मौसम में मदन यानी कामदेव अपनी पत्नी देवी रति के साथ पृथ्वी पर भ्रमण के लिए आते हैं। वसंत  मदन के प्रिय मित्र हैं, जो कामदेव के साथ मिलकर लोगों के मन में काम की भावना जागृत करते हैं। वसंत  के स्वागत में इस दिन कामदेव और रति की भी पूजा की जाती है, क्योंकि जहां वसंत होता है वहीं कामदेव भी होते हैं। भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी प्रेम के साक्षात स्वरूप हैं इसलिए इस दिन राधा और मुरलीधर भगवान श्रीकृष्ण की भी पूजा होती है।
 
वसंत पंचमी के दिन से रंगोत्सव की शुरुआत हो जाती है। लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाते हैं और खुशियां मनाते हैं। इस दिन घरों में मालपुआ और खीर बनती है और लोग पूरे दिन मीठा भोजन करते हैं। आनंद और उत्साह के इस पर्व से एक संदेश यह मिलता है कि ज्ञान और काम दोनों समानांतर चलते हैं। जीवन में ज्ञान और काम दोनों का ही अपना महत्व है अत: ज्ञान की डोर थामकर ही काम को अपने हृदय में प्रवेश की आज्ञा दें अन्यथा वसंतरूपी माया के बयार में खो जाएंगे।

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