Vrishchik Sankranti 2025 : वृश्चिक संक्रांति पर इन 15 चीजों में से करें कोई भी दान, जीवन में होगा सकारात्मक परिवर्तन
Publish Date: Sat, 15 Nov 2025 (10:50 IST)
Updated Date: Sat, 15 Nov 2025 (10:49 IST)
आइए यहां जानते हैं वृश्चिक संक्रांति के पुण्य काल यानी शुभ समय में दान की वस्तुओं की सूची...
सूर्य देव से संबंधित दान: चूंकि संक्रांति पर सूर्य का राशि परिवर्तन होता है, इसलिए सूर्य से संबंधित चीजों का दान करना शुभ माना जाता है।
गुड़ : गुड़ का दान करने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है और करियर/कारोबार में सफलता मिलती है।
लाल वस्त्र: लाल रंग के वस्त्र, विशेष रूप से ऊनी वस्त्रों का दान करना शुभ होता है।
गेहूं: अन्न और सूर्य दोनों से संबंधित होने के कारण, गेहूं का दान विशेष पुण्यकारी होता है।
लाल चंदन और लाल फूल: पूजा सामग्री के रूप में इनका दान करना भी सूर्य देव को प्रसन्न करता है।
अन्न, वस्त्र और धन का दान: वैसे सभी संक्रांतियों पर इन मूलभूत चीजों का दान करना सबसे उत्तम माना गया है।
अन्न का दान: जरूरतमंदों को गेहूं, चावल, दाल और अन्य अनाज का दान करना चाहिए। मान्यता है कि इससे घर में अन्न की कभी कमी नहीं होती और मां अन्नपूर्णा की कृपा बनी रहती है।
वस्त्र का दान: पुराने या अच्छी स्थिति वाले या नए कपड़ों का दान करना भाग्य वृद्धि करता है। ठंड का मौसम शुरू होने के कारण, गर्म वस्त्र, कंबल, शॉल आदि का दान करना भी बहुत शुभ माना जाता है।
धन का दान: अपनी क्षमतानुसार मंदिर, गौशाला, आश्रम या अनाथालय में धन का दान करें। माना जाता है कि इससे आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है।
फल और मिठाई का दान: वृश्चिक संक्रांति पर लाल रंग के फलों जैसे अनार, सेब आदि का दान करने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और जीवन में सकारात्मकता आती है।
मिठाई: मिठाई का वितरण करने से घर-परिवार में खुशहाली आती है।
अन्य विशेष दान:
गाय का दान: शास्त्रों में गाय का दान महादान माना गया है और यह विशेष पुण्यदायी होता है।
तिल का दान: तिल या खासकर काले तिल दान करने से नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और मानसिक शांति मिलती है।
तांबे/पीतल के बर्तन: तांबे या पीतल के बर्तन तथा पूजा या दैनिक उपयोग के लिए उपयोगी वस्तुयें दान करने से घर में दीर्घकालिक समृद्धि आती है।
दान करने से पहले ध्यान रखें: संक्रांति के दिन स्नान और सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही दान करें।
दान हमेशा ज़रूरतमंदों या ब्राह्मणों को करना चाहिए।
पितृ तर्पण: पितरों की शांति के लिए इस दिन श्राद्ध और तर्पण कर्म करना भी श्रेष्ठ माना गया है।
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