Publish Date: Sat, 28 Feb 2026 (12:14 IST)
Updated Date: Sat, 28 Feb 2026 (16:43 IST)
Importance of Ravi Pradosh Vrat: रवि प्रदोष व्रत हर महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है, जो रविवार के दिन पड़ती है। यह विशेष दिन भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित होता है। रवि प्रदोष व्रत की तिथि हर महीने बदलती रहती है, लेकिन यह व्रत हमेशा रविवार को त्रयोदशी तिथि पर ही होता है।
क्यों मनाया जाता है?
रवि प्रदोष व्रत का महत्व विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा और अर्चना से जुड़ा हुआ है। इसे मनाने के पीछे निम्नलिखित कारण होते हैं:
1. भगवान शिव का आशीर्वाद: इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से जीवन की सारी परेशानियां दूर होती हैं और सुख-शांति मिलती है। भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने से व्यक्ति के सभी पाप समाप्त होते हैं और वह धन, यश, समृद्धि, और खुशहाली प्राप्त करता है।
2. रविवार का महत्व: रविवार सूर्य देवता का दिन होता है, और सूर्य को जीवनदाता माना जाता है। इस दिन शिव पूजा करने से व्यक्ति की सभी तरह की मानसिक और शारीरिक समस्याएँ दूर होती हैं। यह दिन विशेष रूप से ग्रहों के शुभ प्रभाव के लिए भी माना जाता है।
3. पापों से मुक्ति: रवि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की विशेष पूजा से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में शांति एवं समृद्धि का वास होता है।
मार्च 2026 में रवि प्रदोष व्रत की तिथि और मुहूर्त:
तारीख: 1 मार्च 2026, रविवार
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 28 फरवरी 2026 को रात 08:43 बजे से
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 1 मार्च 2026 को शाम 07:09 बजे तक।
प्रदोष काल (पूजा का समय): शाम 06:21 बजे से 07:09 बजे तक।
त्रयोदशी तिथि पर पूजा की कुल अवधि: लगभग 48 मिनट का समय।
व्रत-पूजा की विधि:
1. व्रत रखने वाला व्यक्ति सूर्योदय से पूर्व उबटन (स्नान) करके पवित्र होता है।
2. फिर दिनभर उपवासी रहते हुए, संतान, सुख-समृद्धि और भगवान शिव के आशीर्वाद के लिए पूजा करते हैं।
3. सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में यानी संजा के समय भगवान शिवजी की पूजा करनी होती है।
4. शिवलिंग पर जल, दूध, शहद, बेल पत्र, फल और फूल अर्पित कर विशेष रूप से 'ॐ नमः शिवाय' का जप करना बहुत लाभकारी होता हैं।
5. प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें।
6. पूरे दिन व्रत रखें और सात्विक रहें।
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