मां बगलामुखी का पूजन, दुश्मन का करें दमन

Webdunia
बगलामुखी मां दुर्गा का तांत्रिक स्वरूप रूप हैं। वे दस महाविद्या में से आठवीं हैं। रूपाकारों में इन्हें अष्ट-दस भुजा रूप में चित्रित किया गया है। संयम-नियमपूर्वक मां बगलामुखी के पाठ-पूजा, जाप, अनुष्ठान से सर्व अभीष्ट सिद्ध होते हैं।
 
मां दुश्मनों का नाश करती हैं। यहां शत्रुओं से आशय काम, क्रोध, लोभ, मद और मोह से है। मां बगलामुखी की पूजा राज में विजय दिलाने वाली, राज्याधिकार के योग को संभव बनाने वाली और कुयोग को सुयोग में परिवर्तित करने वाली हैं।

ALSO READ: जानिए, कौन है बगलामुखी मां
 
ये एकमात्र देवी हैं जिनके मुकुट पर अर्धचंद्र और ललाट में तीसरा नेत्र है। यही कारण है कि यह महाकाल शिवजी को अति प्रिय हैं। यह शक्तिस्वरूप विष्णु के तेज से युक्त होने के कारण वैष्णवी हैं। मंगलवार युक्त चतुर्दशी की अर्द्धरात्रि में इनका अवतार हुआ था।
 
मां बगलामुखी के तीन प्रमुख मंदिर क्रमश: दतिया (मध्यप्रदेश), कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) तथा नलखेड़ा जिला शाहजहांपुर (मध्यप्रदेश) में हैं। दतिया का मंदिर पीतांबरापीठ के नाम से भी प्रसिद्ध है।
 
यह मंदिर महाभारत कालीन है। मां बगलामुखी का एक नाम पीताम्बरा भी है। इन्हें पीला रंग अति प्रिय है इसलिए इनके पूजन में पीले रंग की सामग्री का उपयोग सर्वाधिक किया जाता है।

ALSO READ: 3 मई को है मां बगलामुखी जयंती : चमत्कारी शक्तियां देती हैं देवी
Show comments

ज़रूर पढ़ें

सिद्धार्थ संवत्सर में सूर्य राजा, बुध धनेश, जानें कैसा होगा विश्व के लिए हिन्दू नववर्ष

हिंदू नववर्ष पर घर के सामने क्यों बांधी जाती है गुड़ी?

क्यों खास होता है गुड़ी पड़वा का पर्व? जानिए इससे जुड़े रोचक तथ्य

चैत्र नवरात्रि पर घट स्थापना और कलश स्थापना क्यों करते हैं?

रमजान के पवित्र महीने में क्यों रखे जाते हैं रोजे, जानिए क्यों मनाई जाती है मीठी ईद

सभी देखें

नवीनतम

31 मार्च 2025 : आपका जन्मदिन

31 मार्च 2025, सोमवार के शुभ मुहूर्त

Weekly Rashifal 2025: किन राशियों के लिए शुभ रहेंगे ये 7 दिन, पढ़ें 12 राशियों का साप्ताहिक राशिफल

साप्ताहिक पंचांग 31 से 06 तक, जानें अप्रैल 2025 के पहले सप्ताह के शुभ मुहूर्त

Aaj Ka Rashifal: गुड़ी पड़वा से हिन्दू नववर्ष शुरू, जानें 12 राशियों के लिए 30 मार्च का दैनिक राशिफल

अगला लेख