मघा नक्षत्र

मघा में जन्मा जातक बात का धनी

पं. अशोक पँवार 'मयंक'
Devendra SharmaND
मघा नक्षत्र सूर्य की सिंह राशि में आता है। नक्षत्र स्वामी केतु है, इसकी महादशा 7 वर्ष की होती है। केतु को राहु का धड़ माना गया है, जबकि वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो केतु पृथ्वी का दक्षिण छोर है। केतु प्रधान होने से ऐसे जातक जिद्दी स्वभाव के होते हैं।

इनसे आदेशात्मक दृष्टि से कार्य नहीं निकाला जा सकता है। इन्हें प्रेम से कहा जाए तो ये हर कार्य कर सकते हैं। इस नक्षत्र में जन्मे जातकों पर सूर्य व केतु के साथ-साथ लग्नानुसार प्रभाव होता है।

मेष लग्न हो तो रा‍शि पंचम भाव में होगी। राशि स्वामी सूर्य होगा। सूर्य के साथ केतु की युति यदि पंचम भाव में हो तो ऐसे जातक विद्या में तेज होते हैं। इनकी संतान जिद्दी स्वभाव की व ऑपरेशन से भी हो सकती है। ये जुबान के पक्के होते हैं। यदि सूर्य लग्न में हो व केतु भी लग्न में हो तो उत्तम सफलता पाते हैं।

प्रशासक राज्यमंत्री भी बन जाते हैं। लेकिन दांपत्य सुख में कहीं ना कहीं बाधा रहती है। वृषभ लग्न में सूर्य की राशि सिंह चतुर्थ भाव में होने से यदि नक्षत्र स्वामी भी चतुर्थ में हुआ तो जनता के बीच प्रसिद्ध होते हैं, मकान भूमि, भवन, माता का सुख उत्तम मिलता है। स्थानीय राजनीति में अधिक सफल होते हैं।
  मघा नक्षत्र सूर्य की सिंह राशि में आता है। नक्षत्र स्वामी केतु है, इसकी महादशा 7 वर्ष की होती है। केतु को राहु का धड़ माना गया है, जबकि वैज्ञानिक दृष्टि से देखे तो केतु पृथ्वी का दक्षिण छोर है। केतु प्रधान होने से ऐसे जातक जिद्दी स्वभाव के होते है।      


आय भाव में हो तो आय भी उत्तम होगी। द्वितीय भाव में हो तो वाणी में प्रभावशीलता देखी जा सकती है। मिथुन लग्न में सूर्य पराक्रम भाव का स्वामी होगा व नक्षत्र स्वामी लग्न में हो तो ऐसे जातक अड़ियल स्वभाव के होंगे।

सप्तम में हो तो पत्नी जिद्दी मिलेगी। दशम में हो तो व्यापार में उन्नति करने वाले होंगे। सूर्य की स्थिति शुभ हो तो जीवन में अधिक सफल होंगे। कर्क लग्न में द्वितीय भाव में सिंह राशि होगी। नक्षत्र स्वामी केतु द्वितीयस्थ हो तो वाणी में कुछ अटकाव या हकलाहट होगी।

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कुटुंब आदि से नहीं बनेगी। दशम में सूर्य के साथ केतु हो तो व्यापार, राज्य नौकरी में सफल होगा। नवम में हो तो भाग्यशाली होगा। सिंह लग्न में नक्षत्र स्वामी केतु नवम भाव में पंचम भाव में या सुख भाव में हो तो उत्तम फल मिलेंगे।

कन्या लग्न में द्वादश भाव में सिंह राशि होगी यदि नक्षत्र स्वामी केतु द्वादश में हो तो चश्मा अवश्य लगेगा। चतुर्थ भाव में केतु उत्तम फल देने वाला होगा। माता से कष्ट या अलग रहने की नौबत आ सकती है। तुला लग्न में केतु तृतीय षष्ठ भाव में व सूर्य एकादश भाव में हो तो उतम आय होगी। पराक्रम बढ़ा-चढ़ा रहेगा। शत्रु नहीं होंगे। वृश्चिक लग्न में दशम भाव में सिंह राशि होगी वहीं नक्षत्र स्वामी दशम पंचम लग्न में हो तो राज सुख मिलेगा।

ऐसा जातक राजसी सुख पाने वाला होता है। धनु लग्न में नवम भाव में सूर्य की सिंह राशि होगी। यदि सूर्य लग्न में केतु के साथ हो तो जिद्दी स्वभाव वाले, लेकिन भाग्यशाली होंगे। चतुर्थ भाव में केतु उत्तम फल देने वाला होगा। मकर लग्न में सूर्य की सिंह राशि अष्टम भाव में होगी। केतु यदि अष्टम में हुआ तो ऑपरेशन या एक्सीडेंट अवश्य कराएगा।

सूर्य शुभ स्थिति में हुआ तो परिणाम न्यून होंगे। ऐसी स्थिति वाला जातक काले कुत्ते को रोटी डाले तो उत्तम फल मिलेगा। कुंभ लग्न में केतु लग्न में हो तो सूर्य सप्तम में होता आवाज का धनी होगा। सूर्य यदि अष्टम में हो तो मृत्यु तुल्य कष्ट होगा।

मीन लग्न में षष्ठ भाव में सिंह राशि होगी। लग्न में केतु जिद्दी बनाएगा। षष्ठ में केतु हो तो शत्रु नाश हो। दशम में हो राज्य, व्यापार, नौकरी से लाभ होगा। केतु यदि अशुभ परिणाम दे तो काले कुत्ते को मीठी रोटी रविवार को खिलाएँ तो शांति मिलेगी।
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