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मिथुन-चारित्रिक विशेषताएँ
मिथुन राशि के जातकों में निम्न चारित्रिक विशेषताएं पाई जाती हैं चरित्र के प्रारंभिक लक्षण- अत्यधिक तर्कसंगत तथा विवेकशील होना, सिर्फ तात्कालिक वातावरण की अनुभूति, सिर्फ भौतिक अभिव्यक्तियों के द्वारा विश्व का अनुभव करना, उन्नत मानसिक समझ की कमी के कारण पूर्वाग्रही होना, प्रतिदिन के जीवन का आध्यात्मिक दर्शनशास्त्र से संयोजन करने में असमर्थ, अस्थिर चित्त, लगातार विचारों में परिवर्तन। चरित्र के उत्तरकालीन लक्षण- विचारों तथा मौखिक अभिव्यक्ति में अनिश्चित, आत्मा तथा शारीरिक रचना की द्वैतावस्था को स्वीकार करना, अंतर्ज्ञान की पहचान का आरंभ, यह स्वीकार करना कि सभी व्यक्ति प्रेम के धागे से संयोजित हैं, विरोधाभासों को परस्पर संबद्ध करने में सक्षम होना, स्वयं को विरोधाभासों से संबद्ध करने में सक्षम होना। अंतःकरण के लक्षण- द्वैतावस्था का विश्लेषण करना, विरोधाभासों की 'एक ही सिक्के के दो पहलुओं' के रूप में पहचान करना, अंतरात्मा तथा भौतिक विषयों की एकात्मकता का अनुभव करना, उच्च मनोभावों के साथ निम्न मनोभावों का समन्वय, दुरुह विचारों के साथ तर्क का सम्मिश्रण, बुद्धिमत्ता में ज्ञान तत्वांरित करना, यह स्वीकार करना कि हम सभी आपस में भाई व बहन हैं, सार्वभौमिक रूप से प्यार करना, प्रेम-बुद्धिमत्ता की अभिव्यक्ति करना, यह स्वीकार करना कि हम सभी संगठित हैं किंतु अलग-अलग रहते हैं, प्रेम-बुद्धिमत्ता की अभिव्यक्ति के दृष्टिकोण से बोलना तथा लेखन कार्य करना, शिक्षण के द्वारा प्रेम-बुद्धिमत्ता का प्रसार करना।

राशि फलादेश